क्या कोरोना की दूसरी लहर पहले से ज्यादा खतरनाक होने वाली है, डरा रहे हैं ये आंकड़े

नई दिल्ली: बीते करीब डेढ़ महीने में ही देश में कोरोना की स्थिति पूरी तरह से बदल गई है। लग रहा था कि भारत इसकी गिरफ्त से बाहर निकल चुका है। लेकिन, फिर से एक साल पहले वाली स्थिति ही बनती जा रही है। पिछले साल सितंबर से लेकर इस साल आधे फरवरी तक निश्चित तौर पर भारत ने नए संक्रमण पर काबू कर लिया था। लेकिन, उसके बाद से चाइनीज वायरस ने फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। लेकिन, सवाल है कि दूसरी लहर क्या पहली से ज्यादा खतरनाक होने वाली है? यह डराने की बात नहीं है। हालत वाकई बिगड़ते जा रहे हैं और केंद्र सरकार की ओर से भी राज्य सरकारों को इसके लिए बार-बार आगाह किया जा रहा है। ऊपर से विदेशों से आए नए वैरिएंट बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। कुछ राज्यों ने तो उसपर अमल करना शुरू भी कर दिया है, लेकिन कई लोग शायद खतरे की आहट को महसूस करने को तैयार नहीं हैं। उनके लिए कुछ तथ्यों पर ध्यान दिलाना बहुत ही जरूरी हो गया है।

मई, 2020 के बाद सबसे तेज रफ्तार से फैल रहा है कोरोना

मई, 2020 के बाद सबसे तेज रफ्तार से फैल रहा है कोरोना

23 मार्च, 2021 को खत्म हुए हफ्ते में देश में औसतन कोरोना के 42,162 नए मामले सामने आए। जबकि, ठीक इससे पहले वाले हफ्ते में रोजाना का औसत 25,137 था। यानी एक हफ्ते में संक्रमण की बढ़ने की रफ्तार 7.7 फीसदी रही। दूसरे शब्दों में कहें तो पिछले हफ्ते के मुकाबले हर दिन देश में 7.7 फीसदी नए केस बढ़ते चले गए हैं। इससे पहले देश में संक्रमण बढ़ने की यही तेज रफ्तार 10 मई, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में थी, जब इसी रफ्तार से रोजाना कोविड के नए मामले सामने आ रहे थे। लेकिन, 10 महीने पहले भारत में कोरोना के मामलों और आज की स्थिति में बहुत बड़ा फर्क है। 10 मई, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में रोज नए मामले आने का औसत सिर्फ 3,508 था, जबकि, इस साल 23 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में यह संख्या 42,162 है। यही नहीं दूसरी लहर में 20,000 से 42,000 नए संक्रमण पहुंचने में सिर्फ 11 दिन लगे हैं। जबकि, पहली लहर में 20,000 से 42,000 संक्रमण पहुंचने में 21 दिन (3 जुलाई से 24 जुलाई, 2020) लगे थे।

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    अगले हफ्ते अमेरिका और ब्राजील को पीछे छोड़ सकता है भारत

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    23 मार्च को खत्म हुए हफ्ते के आधार पर ही अनुमान लगाएं तो दूसरी लहर में रोजाना नए संक्रमण के मामले में भारत 27 मार्च को अमेरिका को पीछे छोड़ देगा और 2 अप्रैल तक इसका हाल ब्राजील से भी बुरा होने वाला है। इस समय कोरोना संक्रमण मामले में ब्राजील टॉप पर है, जहां पिछले हफ्ते औसतन 75,570 केस रोज आए हैं। उसके बाद अमेरिका है, जहां औसतन 54,141 कोरोना केस रोजाना आ हैं। गुरुवार की सुबह जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में देश में कोविड-19 के 53,476 नए मामले सामने आए हैं। यानी भारत में कोरोना संक्रमण बढ़ने की रफ्तार ब्राजील और अमेरिका से कहीं ज्यादा हो चुकी है। हकीकत ये है कि अमेरिका में पिछले हफ्तों में 0.2 फीसदी की रफ्तार से नए केस में कमी दर्ज की गई है। हालांकि, ब्राजील में यह अभी भी बढ़ रहा है, लेकिन उसकी रफ्तार भारत के 7.7 फीसदी के मुकाबले सिर्फ 1.4 फीसदी है। यानी मौजूदा संक्रमण के हिसाब से भारत दो दिन बाद अमेरिका से और 8 दिन बाद ब्राजील से भी आगे निकल जाएगा।

    मौत के आंकड़े भी चेतावनी दे रहे हैं

    मौत के आंकड़े भी चेतावनी दे रहे हैं

    पिछले हफ्ते देश में औसतन रोज 199 लोगों की कोरोना के चलते मौत हुई। उससे पहले वाले हफ्ते में यह औसत सिर्फ 140 था। यानी मौत के आंकड़े में भी 5.1 फीसदी का औसत इजाफा हुआ है। 22 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते के बाद कोरोना से मरने वालों की तादाद में यह सबसे अधिक बढ़ोतरी है। हालांकि, कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि पहली लहर की तुलना में इसबार कोरोना से मरने वालों की संख्या कम है। यानी जितने लोग बीमार पड़ रहे हैं, उसके मुकाबले उससे होने वाली मौत के आंकड़े कम हैं। क्योंकि,23 मार्च तक देश में कुल 1,15,54,894 लोग संक्रमित हुए, जिसमें से मरने वालों की संख्या 1,59,615 रही। इस आधार पर केस फर्टिलिटी रेट (सीएफआर) सिर्फ 1.4 फीसदी है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि शुरू के दिनों में ज्यादा मौत की वजह ये रही कि इस वायरस को डॉक्टर भी नहीं समझ पा रहे थे और ना ही इसके लिए उतना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा हो पाया था। इसके चलते जून के अंत में सीएफआर बढ़कर 3 फीसदी तक चला गया था, जो कि सितंबर के अंत तक 1.6 फीसदी पर आ गया था। पिछले 6 महीने में यह 1.1 फसदी पर बना हुआ है और इस समय भी इसकी रफ्तार यहीं पर है। यानी ये कहना कि दूसरी लहर में सीएफआर कम हो गया तो यह सही नहीं लग रहा है। फिलहाल राहत की बात यही है कि यह पूरे एक साल के औसत सीएफआर (1.4 फीसदी) से कम है। लेकिन, ये तब है जब देश कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए अपने को काफी हद तैयार कर चुका है और करीब 5 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगने से एक भरोसा भी कायम हुआ है।

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