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UP Assembly Election 2017: भाजपा-बसपा के बाद क्या अब ब्राह्मण कांग्रेस के साथ?

By हिमांशु तिवारी आत्मीय
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2017 के मद्देनजर जैसे ही कांग्रेस ने सीएम कैंडिडेट के तौर पर शीला दीक्षित का नाम लिया, वैसे ही कयासों का दौर शुरू हो गया।

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जिसमें सबसे ऊपर इसी बात का जिक्र था कि ब्राह्मणों को लुभाने के लिए कांग्रेस ने अच्छा दांव चला है। हालांकि कभी यह वर्ग कांग्रेस का समर्थक रहा है। लेकिन राजनीतिक उठापटक के चक्कर में यह वोटबैंक हाशिए पर चला गया था।

माया ने काटी कन्नी

उत्तर प्रदेश में 18 प्रतिशत सवर्ण वोटबैंक में तकरीबन 12 प्रतिशत ब्राह्मण वोटबैंक को टारगेट करते हुए शीला दीक्षित को सूबे का सियासी मैदान थमा दिया गया। पर, एक वक्त ऐसा भी था कि राज्य में मतदाता के तौर पर ब्राह्मणों की पहचान समाप्त हो जा रही थी लेकिन ऐसे में ब्राह्मणों को अपने साथ जुटाकर मायावती ने 2007 में पूर्ण बहुमत के साथ यूपी की सत्ता हासिल की। लेकिन इस बार मायावती ने चुनाव के काफी पहले से ही ब्राह्मणों से कन्नी काट ली है।

मुस्लिम मतदाताओं पर मायावती की नजर

अंबेडकर के 125वीं जयंती पर उन्होंने कहा हमारे मसीहा अंबेडकर हैं, राम नहीं। जिससे यह साफ हो गया कि ब्राह्मण वोटबैंक से ज्यादा वे अपने दलित वोटबैंक को जुटाने की कवायद में हैं। साथ ही हिंदुत्ववादी राजनीति की पक्षधर मानी जाने वाली भाजपा पर आक्रामक प्रहार कर बीजेपी के तीव्र आलोचकों की फेहरिस्त में शामिल होकर मुस्लिम मतदाताओं के प्रति अपनी हमदर्दी जाहिर की है।

हिंदू मतदाताओं का काउंटर पोलराइजेशन निश्चित तौर पर होगा

ऐसे में आम है कि हिंदू मतदाताओं का काउंटर पोलराइजेशन निश्चित तौर पर होगा। जिसे ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा दिल्ली की पूर्व सीएम शीला को यूपी की जिम्मेवारी सौंपी गई है। जिससे ब्राह्मण मतदाता कांग्रेस की ओर अपना झुकाव बना ले।

कांग्रेस भुनाएगी यह मौका

वहीं गर भाजपा की बात की जाए तो मौजूदा स्थितियों को देखकर यही लग रहा है कि बीजेपी खुद को दलितों पर पूरी तरह से कन्संट्रेट किए हुए है। फिर वो प्रदेश अध्यक्ष के नाम का चुनाव हो या फिर स्वामी की भाजपा में हाल ही में हुई एंट्री के लिहाज से।

एकमात्र कांग्रेस पार्टी ने ही राज्य में ब्राह्मण मुख्यमंत्री दिए हैं

राजनीति विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस पार्टी न सिर्फ़ शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री घोषित करने के फ़ैसले को चुनाव में भुनाएगी बल्कि वो इस बात को भी प्रचारित करेगी कि एकमात्र कांग्रेस पार्टी ने ही राज्य में ब्राह्मण मुख्यमंत्री दिए हैं। जो कि कहीं न कहीं पूर्णतया सत्य भी है।

भाजपा के सीएम कैंडिडेट पर टिकी सभी दलों की निगाहें

बहरहाल कांग्रेस की इस घोषणा से ब्राह्मण वर्ग पर जो प्रभाव हुआ है, उसे तो चुनाव ही तय करेंगे। लेकिन इतना जरूर है कि कांग्रेस की ओर से यह एक बड़ा दांव माना जा रहा है। क्योंकि पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में यह अहम् भूमिका अदा करता है।

भाजपा के सीएम कैंडिडेट के नाम पर सभी दलों की निगाहें

इन सबके इतर भाजपा के द्वारा घोषित किए जाने वाले सीएम कैंडिडेट के नाम पर सभी दलों की निगाहें टिकी हुई हैं, जिसके बाद तमाम आंकलनों के पुष्ट होने या फिर फ्लॉप होने का पता चलेगा।

English summary
Seeking desperately to revive its electoral fortunes in Uttar Pradesh, the Congress, by projecting former Delhi chief minister Sheila Dixit as its chief ministerial candidate, clearly eyes the ‘Brahmin’ vote bank.
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