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गिरिराज के बहाने भाजपा से अलग होने का बहाना खोज रहे नीतीश?

By अशोक कुमार शर्मा
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    Giriraj Singh के बहाने क्या BJP से अलग होने के बहाना ढूंढ रहे Nitish Kumar ? | वनइंडिया हिंदी

    पटना। नीतीश कुमार भाजपा से फिर अलग होने का बहाना खोज रहे हैं। नीतीश बहाना खोज ही रहे थे कि केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने उनकी राह आसान कर दी। नीतीश की इफ्तार पार्टी की तस्वीर पर ट्वीट कर गिरिराज सिंह ने राख में दबी चिनगारी को हवा दे दी है। पहले से भड़के नीतीश अब और भी आक्रामक हो गये हैं। ईद के मौके पर नीतीश ने गिरिराज सिंह पर सीधा हमला बोला। सीएम ने कहा कि जो सभी धर्मों सा सम्मान नहीं करता वह अधार्मिक है। अल्पसंख्यक वोट के लिए नीतीश कुछ भी कर सकते हैं। बहुत मुश्किल के बाद नीतीश ने मुस्लिम मतों पर पकड़ बनायी है। इसके लिए वे बेहिचक भाजपा का साथ छोड सकते हैं। वे 2020 के लिए अभी से पिच तैयार कर रहे हैं। जैसे ही वे पिच के हिसाब से फील्डिंग सजा लेंगे, भाजपा के साथ पारी समाप्ति की घोषणा देंगे। गिरिराज सिंह ने सीधे-सीधे नीतीश से पंगा लिया है। इसका हिसाब नीतीश भाजपा से चुकता करेंगे। एक बार फिर एक 'तस्वीर' बिहार की तकदीर बदलने का कारण बनेगी।

    सियासी आसमान पर संदेहों के बादल

    सियासी आसमान पर संदेहों के बादल

    इफ्तार की दावतों के बाद बिहार का सियासी माहौल कुछ बदला-बदला सा दिख रहा है। जीतनराम मांझी और नीतीश गले मिल रहे हैं। राबड़ी देवी नीतीश की हमदर्द हो गयीं हैं। नये साथी की तलाश में कांग्रेस की उम्मीदें उड़ान भरने लगी हैं। मोदी कैबिनेट में जदयू के शामिल नहीं होने के बाद हालात तेजी से बदले हैं। नीतीश ने भाजपा के पूर्ण बहुमत पर तंज कसा और सम्मानजनक भागीदारी नहीं देने पर सवाल उठाया। अटल बिहारी बाजपेयी के बहाने नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष भी किया। भाजपा चुप रही। बिहार में अपनी हनक दिखाने के लिए नीतीश ने कैबिनेट का विस्तार किया। मंत्रिपरिषद में दो दलित, तीन अतिपिछड़े, एक पिछड़े को शामिल कर नीतीश ने अपने वोटरों को संतुष्ट करने की कोशिश की। केन्द्र की भरपायी उन्होंने बिहार में कर दी। सामाजिक समीकरण साधने के लिए दो सवर्णों को भी मंत्री बनाया। अब नीतीश यह दिखाना चाहते हैं कि वे अल्पसंख्यक हितों के लिए भाजपा की भी कुर्बानी दे सकते हैं।

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    नीतीश के लिए अल्पसंख्यक वोटर अहम

    नीतीश के लिए अल्पसंख्यक वोटर अहम

    2019 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोटरों ने जदयू को भरपूर समर्थन दिया है। नीतीश पिछले पांच दिनों में कई बार किशनगंज में जदयू के प्रदर्शन का बखान कर चुके हैं। क्या कभी किसी ने सोचा था कि एनडीए को किशनगंज में तीन लाख से अधिक वोट मिलेंगे ? 70 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले किशनगंज में जदयू को 3 लाख 32 हजार 551 वोट मिले थे। इस सीट पर कांग्रेस के डॉ. जावेद केवल 34 हजार 466 वोट से ही जीत पाये थे। नीतीश इस वोटिंग पैटर्न को अपनी बहुत बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। कटिहार सीट जीतने के बाद नीतीश यह मान चुके हैं कि मुस्लिम वोटर अब उन पर भरोसा करने लगे हैं। 2014 की तुलना में यह बहुत बड़ा बदलाव है। पिछले लोकसभा चुनाव में धर्मनिरपेक्ष छवि बनाने के बाद भी नीतीश को मुस्लमानों ने समर्थन नहीं दिया। इसकी वजह से जदयू केवल दो सीटों पर सिमट गया था। अब जब नीतीश की मुराद पूरी हो गयी है तो वे हर हाल में मुस्लिम मतों पर पकड़ बनाये रखना चाहते हैं।

    नीतीश अकेले जा सकते हैं चुनाव में

    नीतीश अकेले जा सकते हैं चुनाव में

    2010 में भी नीतीश-मोदी की तस्वीर वाले विज्ञापन पर सियासी भूकंप आया था। भोज रद्द होने के बाद नरेन्द्र मोदी भाजपा से समर्थन वापस लेने का दबाव बना रहे थे। तब नीतीश के मंत्री गिरिराज सिंह भी नरेन्द्र मोदी के साथ थे। चार महीने बाद विधानसभा का चुनाव होना था। उस समय नीतीश ने जदयू की एक अहम बैठक में कह दिया था कि अगर जरूरत पड़ी तो हम अकेले चुनाव में जाएंगे। 2019 में भी कुछ उसी तरह की परिस्थितयां बन रही हैं। नीतीश इस बात के आकलन में जुटे हैं अगर जदयू अकेले चुनाव में जाएगा तो क्या-क्या संभावनाएं बन सकती हैं। नीतीश राजद के साथ फिर जाएंगे, इसमें संदेह है। नीतीश अपमान झेल कर शायद ही सत्ता में जाना चाहें। भविष्य में वे कांग्रेस की तरफ देख सकते हैं। इसके लिए उनके मंत्री अशोक चौधरी मददगार हो सकते हैं। नये-नये मंत्री बने अशोक चौधरी कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं। 2013 में नीतीश कांग्रेस के सहयोग से सरकार चला चुके हैं। धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर कांग्रेस नीतीश की स्वभाविक पार्टनर साबित होगी। नीतीश अब भाजपा पर बिल्कुल निर्भर नहीं रहना चाहते। वे भाजपा के बगैर 2020 का विधानसभा चुनाव जीतने की तैयारी में हैं।

    इसे भी पढ़ें:- मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल ना होकर नीतीश ने चली बड़ी चाल

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    English summary
    Is Nitish Kumar Searching excuse to be separated from BJP on pretext of Giriraj Singh.
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