क्या प्रशांत किशोर पर कांग्रेस हुई दो फाड़ ? अंदर की बात जानिए

नई दिल्ली, 25 अप्रैल: चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कांग्रेस में एंट्री का मसला उलझ गया है। दूसरी पार्टियों से उनके हितों को जुड़ा देखकर पार्टी का एक खेमा, उनके नाम पर तैयार नहीं हो रहा है। खासकर किशोर के पुराने संगठन ने एक दिन पहले ही तेलंगाना में जिस तरह से मुख्यमंत्री केसीआर के साथ हाथ मिलाया है, उससे पार्टी के अंदर उनके विरोधियों के कान खड़े हो गए हैं। वैसे कांग्रेस में अंतिम फैसला पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ही लेंगी, इसलिए लगता है कि देर-सबेर प्रशांत किशोर की एंट्री पर बात बन सकती है।

कांग्रेस में अटक गई प्रशांत किशोर की बात ?

कांग्रेस में अटक गई प्रशांत किशोर की बात ?

चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कांग्रेस में एंट्री का मामला फंस गया लगता है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसपर सोमवार को बात नहीं बन पाई। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली संस्था रही आईपीएसी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की अगुवाई वाली टीआरएस के साथ अगले विधानसभा चुनाव के लिए डील किया है। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस के अंदर से ही उन्हें पार्टी में लिए जाने को लेकर सवाल उठाए जा चुके हैं। हालांकि, औपचारिक तौर पर किशोर ने खुद को आईपीएसी से दूर कर लिया है, लेकिन उनकी पहचान अभी भी उससे जुड़ी हुई है और रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस में उनकी एंट्री के लिए जो विशेष समिति बनाई गई है, उसके कई सदस्य विरोधी पार्टी से उनके संगठन के हाथ मिलाने के बाद उनके नाम पर ऐतराज कर रहे हैं।

प्रशांत किशोर पर कांग्रेस हुई दो फाड़ ?

प्रशांत किशोर पर कांग्रेस हुई दो फाड़ ?

इस रिपोर्ट में कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पार्टी की यह विशेष समिति प्रशांत किशोर को शामिल करने पर बंटी हुई है। पार्टी के कुछ नेताओं का जहां मानना है कि वही हैं, जो पार्टी को जीवन दान दे सकते हैं। प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल कराने के हक में जो नेता बताए जा रहे हैं, उनमें गांधी परिवार से खुद प्रियंका गांधी वाड्रा हैं और अंबिका सोनी भी इसके पक्ष में हैं। जबकि, दिग्विजय सिंह, मुकुल वासनिक, राहुल गांधी के खासमखास रणदीप सुरजेवाला और जयराम रमेश को उनको लेकर आपत्ति है। दिग्विजय तो पहले भी इसके बारे में अपनी राय रख चुके हैं। केसी वेणुगोपाल और एके एंटनी ने दोनों पक्षों की राय नोट कर ली है, लेकिन उनकी निजी राय के बारे में पता नहीं चला है।

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    पीके का विरोध करने वालों की चिंता क्या है?

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    सूत्रों के मुताबिक आपत्ति प्रशांत किशोर को पार्टी के भीतर खुली छूट देने को लेकर है, जिसमें वह पार्टी के अंदर अपने हिसाब से काम करना चाहेंगे। सवाल प्रशांत किशोर के दूसरे दलों के साथ जुड़े उनके हितों को लेकर भी खड़े किए जा रहे हैं, जिससे कांग्रेस का हित प्रभावित होने की चिंता है। मसलन, किशोर तृणमूल चीफ और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख एवं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के राजनीतिक सलाहकार भी हैं। ममता कभी कांग्रेस पर नरम और कभी गरम होती रहती हैं, तो जगन की पार्टी के साथ प्रदेश में कांग्रेस की अदावत पुरानी है।

    अंतिम फैसला सोनिया के हाथ

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    रिपोर्ट में समिति के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सोमवार को पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ के साथ अलग से बैठक की है। यह भी माना जा रहा है कि अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान का ही होगा, चाहे समिति के सदस्यों में प्रशांत किशोर के मसले में आम सहमति बन पाए या नहीं; और बड़ी बात ये है कि प्रियंका ने किशोर के नाम पर अपनी मुहर लगा दी लगती है।

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