• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

क्या पवित्र कैलाश पर्वत के नाम पर धमकाना चाहता है चीन, मानसरोवर झील के पास मिसाइल तैनाती की तैयारी

|

नई दिल्ली- एक ताजा सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे पता चला है कि चीन अब पवित्र मानसरोवर झील के पास सतह से हवा तक मार करने वाली मिसाइल के लिए जमीन तैयार कर रहा है। सवाल है कि भारत के लिए इतनी अहम पवित्र मानसरोवर झील के पास इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देकर चीन करना क्या चाहता है। क्योंकि, यही वह पवित्र झील है, जहां से पवित्र कैलाश शिखर की दूरी महज 30 किलोमीटर है। हर साल लाखों भारतीय तीर्थयात्री इसी झील में पवित्र स्नान करके भगवान भोले नाथ की पूजा के लिए अपनी यात्रा को पवित्र कैलाश की ओर आगे बढ़ाते हैं। लेकिन, चीन की नजर अब उस पवित्र स्थल पर भी लग चुकी है। जानकारी मिल रही है कि चीन उस इलाके में करीब 100 किलोमीटर के दायरे में सैनिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है और अपनी सेना की बटालियनें भी तैनात कर चुका है।

पवित्र मानसरोवर झील को भी नजर लगाना चाहता है चीन

पवित्र मानसरोवर झील को भी नजर लगाना चाहता है चीन

खबरों के मुताबिक चीन की सेना पवित्र मानसरोवर झील के किनारे सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर समेत बाकी निर्माण कार्यों को अंजाम देने में लगी है। नई सैटालाइट तस्वीरों से संकेत मिल रहा है कि चीन मानसरोवर झील के पास जिस इलाके में इस तरह के निर्माण कार्यों में लगा हुआ है, वह इलाका लिपुलेख दर्रे के पास है, जो भारत-नेपाल-चीन के ट्राई जंक्शन के करीब है। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस Detresfa की ओर से जारी इन सैटेलाइट तस्वीरें में सतह पर चल रहे निर्माण कार्यों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए दावा किया गया है कि वहां पर एक नई सड़क का निर्माण हुआ है, लाल रंग वाले कुछ संदिग्ध टेंट भी नजर आ रहे हैं, जो चीनी सेना के लिए ठहरने का प्रबंध हो सकता है।

लिपुलेख दर्रे के पास मिसाइल तैनाती के पीछे क्या है इरादा?

लिपुलेख दर्रे के पास मिसाइल तैनाती के पीछे क्या है इरादा?

सैटेलाइन तस्वीरों में दिखाया गया है कि मानसरोवर झील के किनारे किस तरह से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल के लिए जमीन को विकसित किया गया है, जो कि हिंदुओं के लिए अत्यंत ही पवित्र स्थान है और यहां से पवित्र कैलाश पर्वत की दूरी महज 30 किलोमीटर के करीब है। किसी हिंदू की कैलाश यात्रा तब तक सफल नहीं मानी जाती, जबतक कि वह मानसरोवर के पवित्र जल में एक डुबकी न लगा ले। लेकिन, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन की सेना पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी ने वहां अपने जवानों की एक बटालियन की तैनाती भी कर दी और यह इलाका लिपुलेख दर्रे के भी पास है, जो उत्तराखंड में है। बता दें कि यह एक ट्राई जंक्शन का इलाका है, जहां चीन (तिब्बत)-नेपाल और भारत की सीमाएं लगती हैं।

(सैटेलाइट तस्वीर-Detresfa)

चीन के साथ साजिश में नेपाली पीएम ओली भी तो शामिल नहीं ?

चीन के साथ साजिश में नेपाली पीएम ओली भी तो शामिल नहीं ?

इस इलाके में अभी हालिया तनाव तब शुरू हुआ था, जब मई महीने में भारत ने एक नई सड़क बनाकर 'नए कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग' का उद्घाटन किया। यह सड़क करीब-करीब समुद्र तल से 17,000 फीट उंचे लिपुलेख दर्रे तक जाती है, जहां भारत और चीन (तिब्बत) की सीमा है। इसी के बाद चीन के इशारे पर नेपाल ने अपना एक नया राजनीतिक जारी किया था, जिसमें उसने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा जैसे भारतीय क्षेत्रों को अपना बता दिया। इसी नक्शे के बाद से भारत और नेपाल में विवाद शुरू हुआ है और नेपाली नक्शे को भारत पूरी तरह से खारीज कर चुका है। लेकिन, नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली की सरकार पूरी दुनिया को वह जाली नक्शा भेज चुकी है।

एलएसी के उस पार सैन्य गतिविधियां बढ़ाने में जुटा है चीन

एलएसी के उस पार सैन्य गतिविधियां बढ़ाने में जुटा है चीन

नई सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के बाद जानकारों ने माना है कि चीन, सीमा के 100 किलोमीटर के दायरे में इस तरह के निर्माण कार्यों में जुटा हुआ है, ताकि वह क्षेत्र में अपने हवाई क्षमता को मजबूत कर सके। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए साइट का निर्माण या उन्हें अप्रगेड करने में चीन एलएसी के आसपास कई इलाकों में लगा हुआ है, जिसमें रुटोग काउंटी (पैंगोंग त्सो के पास), नागरी गुनसा एयरपोर्ट, शिकाज एयरपोर्ट,ल्हासा गोंग्गार एयरपोर्ट और नियांगची एयरपोर्ट शामिल (सभी तिब्बत के इलाके) हैं। रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस तरह के सतह से हवा में मार करने वाली साइटों का इस्तेमाल आमतौर पर महत्त्वपूर्ण जगहों की सुरक्षा के लिए किया जाता है, लेकिन चीन इन इलाकों में ऐसा क्यों कर रहा है, यह अभी साफ नहीं हो पा रहा है।

चीन की किसी भी नापाक हरकत को माकूल जवाब देने की तैयारी

चीन की किसी भी नापाक हरकत को माकूल जवाब देने की तैयारी

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख की गलवान वैली, पैंगोग त्सो और हॉट स्प्रिंग जैसे इलाकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भारत और चीन में तीन महीने से ज्यादा वक्त से तनाव की स्थिति बनी हुई है। दोनों देशों में बड़े कमांडर स्तर पर भी सेना की मौजूदगी कम करने और खासकर चीन के सैनिकों के अपने मौजूदा पोजिशनों से और पीछे हटने की कई दौर की बातचीत हो रही है, लेकिन चीन बात तो करता है, लेकिन एलएसी के उसपर तिब्बत के इलाकों में अपना सैन्य जमावड़ा और सैन्य इस्तेमाल के लिए निर्माण का कार्य लगातार जारी रखे हुए। ड्रैगन के इस संदिग्ध हरकतों के लिए भारतीय सेना ने उस इलाकों में लंबे समय के लिए ताल ठोककर जमे रहने की तैयारी कर ली है।

इसे भी पढ़ें- चीन ने पाकिस्‍तान को 2 बिलियन डॉलर देने से मना किया, कहा-हमें कर्ज के बदले चाहिए गिलगित-बाल्टिस्‍तान!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
China is preparing for missile deployment near Mansarovar lake,The trick to take advantage of the new map of Nepal
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X