12वीं पास करने के लिए 17 स्कूल बदलने पड़े, 8 घंटे के अंदर पिता का ट्रांसफर, IRS अधिकारी ने सुनाए रोचक किस्से
भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी IRS Kundan Yadav ऐसा किरदार हैं, जो कई मायने में विशेष हैं। नवंबर, 1976 में जन्मे कुंदन बताते हैं कि उन्हें 12वीं क्लास पास करने में 17 स्कूल बदलने पड़े। जानिए कुछ दिलचस्प किस्से

IRS Kundan Yadav अपनी किताब गंडासा गुरु की शपथ के कारण सुर्खियों में हैं। अपनी किताब के सिलसिले में एक इंटरव्यू के दौरान इन्होंने कई रोचक किस्से सुनाए हैं। इन्होंने अपनी किशोरावस्था को याद करते हुए बताया कि बनारस में इन्होंने पहलवानी भी की है। दशकों पहले की गई पहलवानी के बारे में डॉ कुंदन यादव बताते हैं कि उनके नाम पर आज तक एक रिकॉर्ड कायम है। उन्होंने बताया कि 25 किलो का गदा घुमाने में उन्होंने कीर्तिमान कायम किया है। तुलसीघाट अखाड़े के दिनों का जिक्र कर उन्होंने बताया कि 16 साल की आयु में उन्होंने 122 बार घुमाया था।

गुंडा बनना है तो पुलिस बनो
पिता की नौकरी के सिलसिले में उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पढ़ाई कर चुके कुंदन बताते हैं कि गोरखपुर के महाराणा प्रताप कॉलेज से 12वीं पास करने से पहले उन्हें 17 स्कूल-कॉलेज बदलने पड़े। कुंदन यादव के अनुसार पिता की नौकरी पुलिस में होने के कारण उनकी छवि थोड़ी दबंग जैसी हो गई थी। पिता की सीख के बारे में कुंदन बताते हैं कि एक कंप्लेन आने पर उनके पिता ने उन्हें चौंकाने वाली बात कही। मामूली बात पर झड़प के बाद दूसरे गुट के 15-20 लोगों ने उनकी पिटाई कर दी। इसके बाद पिता ने भी उन्हें दो बेंत मारे। बकौल कुंदन इस घटना के बाद पिता ने उनसे कहा, 'गुंडा बनना है तो पुलिस बनो।'

JNU कैंपस से चोरी की साइकिल चोरी
यूट्यूब प्लेटफॉर्म दी लल्लनटॉप के साथ एक इंटरव्यू में कुंदन यादव बताते हैं कि JNU में पढ़ने के दौरान उनकी साइकिल चोरी हो गई थी। बकौल कुंदन, छह महीने तक लगातार देखने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि हॉस्टल कैंपस में खड़ी एक साइकिल का कोई मालिक नहीं है। पैसे खर्च करने के बाद रिपेयरिंग कराई लेकिन डेढ़ दिन चलाने के बाद साइकिल चोरी हो गई। दूसरी साइकिल अरेंज करने के बाद मुनिरका चौराहे पर ऑटो से टक्कर हो गई। भीड़ छंटने के बाद साइकिल गायब हो गई। पुलिस से कंप्लेन करने के बाद उन्हें थाने में खड़ी दूसरी साइकिल लेने को कहा गया। पुलिस से मिली साइकिल नौकरी मिलने तक उनके साथ रही।

अमेरिकी एयरपोर्ट पर दिलचस्प वाकया
2007 बैच के अधिकारी मसूरी में प्रशासनिक अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान अपने दिनों को याद करते हैं। कुंदन यादव बताते हैं कि ऑफिसर ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने बेबाकी से सवाल पूछे। हिंदी भाषा के अधिक इस्तेमाल पर टोके जाने पर कुंदन बताते हैं कि हिंदी का इस्तेमाल करना संविधान के आदेश का पालन करना है। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपनी अमेरिका यात्रा के बारे में भी रोचक किस्सा शेयर किया। कुंदन बताते हैं कि बिहार के आरा में रहने वाले अभिषेक के साथ उन्हें अमेरिका जाने का मौका मिला। फुल ब्राइट स्कॉरशिप के लिए उन्हें अमेरिका जाने का मौका मिला था। एयरपोर्ट पर उनके साथ दिलचस्प वाकया हुआ।

गुरू बस पांच मिनट लगेगा, मैं पहुंच रहा हूं
कुंदन बताते हैं कि वॉशिंगटन डलास में विमान लैंड करने के बाद एयरपोर्ट के डोमेस्टिक टर्मिनल से दूसरी फ्लाइट लेनी थी। इसी दौरान उनके पासपोर्ट का बैग कहीं गुम हो गया। पहली बार अमेरिका पहुंचने के बाद ये घटना झटका देने वाली थी। साथी अभिषेक से बिछड़ने के बाद उन्होंने अनाउंसमेंट सेंटर से मदद मांगी। काफी मशक्कत के बाद उसने अनाउंसमेंट की, लेकिन बात नहीं बनी।

हिंदी से हीनताबोध वाली फीलिंग को तिलांजलि
बकौल कुंदन फ्लाइट छूटने के डर से उन्होंने अधिकारी से खुद हिंदी में अनाउंसमेंट की अपील की। जैसे ही उन्होंने अभिषेक को पुकारा, और कहा फ्लाइट का टाइम हो चुका है, जहां भी हो हिंदी में जवाब दो। दूसरी तरफ से अभिषेक ने कहा- गुरू बस पांच मिनट लगेगा, मैं पहुंच रहा हूं। पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम पर हिंदी की अनाउंसमेंट लोगों को चौंकाने वाली थी। यही वो मौका था जब उन्होंने हिंदी से हीनताबोध वाली फीलिंग को तिलांजलि दी। अब वे हिंदी के आयोजनों में मानदेय नहीं लेते।

तमिलनाडु में हिंदीभाषी का विरोध नहीं
राजभाषा हिंदी के प्रति भारत सरकार की नीति के बारे में 16 साल की नौकरी के बाद IRS कुंदन बताते हैं कि ऐसी नीतन नहीं होने पर उनके खिलाफ समस्याएं खड़ी हो सकती थीं, लेकिन इस पॉलिसी से उन्हें कवच मिलता है। तमिलनाडु की एक रोमांचक और भावुक घटना का जिक्र करते हुए कुंदन यादव बताते हैं उन्हें नहीं लगता कि तमिलभाषी इलाकों में हिंदीभाषी लोगों के प्रति किसी भी तरह का विरोध है।

शादी के बाद चाय का दिलचस्प किस्सा
IRS कुंदन बताते हैं कि यलागिरी जिले में उन्होंने एक बार चाय लेने के लिए दुकान वाले से बात की। उसने बताया कि वहां चाय नहीं बिकती। इसके बाद बिस्किट का पैकेट लिया। थोड़ी देर में दो कप चाय आ गई। 100 रुपये का नोट दे रहे थे तो दुकान वाले ने तमिल भाषा में केवल पांच रुपये मांगे। कंडक्टर से पूछने पर पता लगा कि दुकान पर चाय नहीं थी, लेकिन पड़ोसी ने उनकी बात सुनी। शादी के बाद नई दंपती को पड़ोसी ने सौहार्द में मेहमानवाजी के रूप में चाय पिलाई, इसलिए उन्हें पैसे देने की जरूरत नहीं। इस घटना ने उन्हें काफी भावुक किया।












Click it and Unblock the Notifications