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व्‍हाट्सएप पर चल रही थी पुलवामा आतंकी हमले की साजिश, रावलपिंडी के नंबर से दिए जा रहे थे निर्देश

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नई दिल्‍ली। राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पुलवामा आतंकी हमले की जांच जारी है। अब इस जांच में यह बात पूरी तरह से साबित हो गई है कि हमले को पाकिस्‍तान में मौजूद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकियों ने अंजाम दिया था। 14 फरवरी को हुए इस हमले की जिम्‍मेदारी ने कुछ ही घंटों बाद एक मैसेज भेजकर ली थी। लेकिन पाक ने हमेशा इससे इनकार किया। पाकिस्‍तान की सरकार की ओर से कहा गया था कि भारत अगर इस बात के सुबूत दे पाए कि हमले के पीछे जैश का हाथ था तो आतंकी संगठन के खिलाफ जरूर कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें-Video: पाक ऑफिसर ने कुबूला 200 आतंकियों की मौत का सच

रावलपिंडी से अपलोड किया गया वीडियो

रावलपिंडी से अपलोड किया गया वीडियो

एनआईए को हमले में जो सुबूत मिले हैं उनमें सबसे अहम है आईपी यानी इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस जो पाकिस्‍तान के रावलपिंडी के करीब का है। इस जगह से ही हमले को अंजाम देने वाले सुसाइड बॉम्‍बर आदिल अहमद डार का वह वीडियो अपलोड किया गया था जिसमें उसने इस हमले को स्‍वीकारा था। इसके अलावा जैश के प्रवक्‍ता मोहम्‍मद हसन के बयान को भी इसी आईपी एड्रेस की मदद से अपलोड किया गया था। ये वह सुबूत है जिसे भारत ने न सिर्फ पाकिस्‍तान को सौंपा है बल्कि दूसरे देशों के राजनयिकों को भी दिया है जो यूनाइटेड नेशंस सिक्‍योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) के सदस्‍य हैं। भारत हमेशा पाकिस्‍तान से आतंकियों के खिलाफ एक्‍शन लेने की अपील करता है। इसके साथ ही जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर को भी यूएनएससी की तरफ से ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित करने की उसकी कोशिशें जारी हैं।

एक घंटे बाद तक एक्टिव था व्‍हाट्स एप नंबर

एक घंटे बाद तक एक्टिव था व्‍हाट्स एप नंबर

इंग्लिश डेली हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक एनआईए की जांच में एक व्‍हाट्सएप नंबर 7006250771 का पता लगा है। यह नंबर जैश के प्रवक्‍ता मोहम्‍मद हसन का है। यह नंबर 14 फरवरी कसे शामिल 4:42 मिनट तक एक्टिव था यानी हमले के करीब डेढ़ घंटे बाद तक। नंबर आईपी एड्रेस 103.255.7.0 से जुड़ा है जो कि रावलपिंडी के करीब किसी जगह से प्रयोग हो रहा था। जैश ने अपने टेलीग्राम चैनल अफजल गुरु स्‍क्‍वाड-अल इस्‍लाम के जरिए आदिल अहमद डार का वीडियो अपलोड किया था।

रिश्‍तेदारों की मौत का बदला लेना था मकसद

रिश्‍तेदारों की मौत का बदला लेना था मकसद

सुबूतों पर अगर यकीन करें तो पुलवामा हमले की पूरी साजिश जैश के सरगना मसूद अजहर और उसके छोटे भाई अब्‍दुल रऊफ असगर ने तैयार की थी। अजहर इस हमले के जरिए अपने भांजे तल्‍हा राशिद की मौत का बदला लेना चाहता था जो उसके साले अब्‍दुल राशिद का बेटा था। तल्‍हा को छह नवंबर 2017 को पुलवामा में हुए एक एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया था। तल्‍हा की मौत के बाद रऊफ असगर का करीबी और बॉडीगार्ड मोहम्‍मद इस्‍माल और मोहम्‍मद उमर और मसूद अजहर के बड़े बेटे इब्राहीम अजहर ने साल 2018 के मध्‍य में कश्‍मीर में घुसपैठ की। इस्‍माइल अजहर का एक और बेटा उस्‍मान अजहर घुसपैठ के कुछ ही दिनों के अंदर 30 अक्टूबर 2018 को त्राल में हुए एनकाउंटर में ढेर हो गया था। भारत का कहना है कि तल्‍हा राशिद और उस्‍मान हैदर की मौत के बाद जैश ने घाटी के लोगों को उकसाने का काम किया।

पाकिस्‍तान से आए कमरान ने बनाई साजिश

पाकिस्‍तान से आए कमरान ने बनाई साजिश

जांच में यह बात भी सामने आई है कि जैश का आतंकी अब्‍दुल राशिद गाजी नौ दिसंबर 2018 को घाटी में दाखिल हुआ था। उसका मकसद तल्‍हा राशिद और उस्‍मान हैदर की मौत का बदला लेने के लिए घाटी के युवाओं को भड़काना था। गाजी अफगान युद्ध में हिस्‍सा ले चुका था और वह एक्‍सप्‍लोसिव्‍स का एक्‍सपर्ट है। पुलवामा हमले को किस तरह से पूरा किया जाए इसकी सारी प्‍लानिंग पाकिस्‍तान के नागरिक कामरान ने की थी। 18 फरवरी को कामरान पुलवामा में हुए एनकाउंटर में मारा जा चुका है।

टेलीग्राम से लेकर फेसबुक तक का प्रयोग

टेलीग्राम से लेकर फेसबुक तक का प्रयोग

भारत की तरफ से जो सुबूत इकट्ठा हुए हैं उनमें कई भाषण के वीडियोज, पैम्‍पलेट्स और पाकिस्‍तानी नंबर पर प्रयोग हो रहे व्‍हाट्स एप नंबरों का प्रयोग करके सोशल मीडिया पोस्‍ट्स शामिल हैं। इसके अलावा टेलीग्राम और फेसबुक का भी प्रयोग किया गया था। साल 2018 के एक भाषण में मुफ्ती असगर बालाकोट में यह कहता हुआ नजर आ रहा है कि वह पुलवामा को तल्‍हावामा में बदलकर रहेगा और अपने बेटे की मौत का बदला लेगा। इसके अलावा पांच फरवरी को मसूद अजहर का भी एक वीडियो सामने आया था जिसमें कश्‍मीरी मुसलमानों से एकजुट होने की मांग की गई थी और उसने कहा था कि इस माह के अंत में ही वह अपना मकसद हासिल करके रहेंगे।

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English summary
Investigation by NIA has established the involvement of Pakistan based Jaish-e-Mohammed involvement in Pulwama attack.
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