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International Men's Day 2019: महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अधिक करते हैं आत्महत्‍या

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बेंगलुरु। मर्द को दर्द नहीं होता कहावत को सच मान कर, ता उम्र अपना दर्द छिपाता है, वो भी पुरुष ही होता है। लेकिन यह कहकर भले ही वह यह सच्‍चाई छिपा ले लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पुरुष महिलाओं से कही अधिक भावुक होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि महिलाएं अपना दर्द बया कर देती है तो पुरुष पूरा दर्द अपने अंदर समेटे रहता है। यही कारण हैं कि दुनिया भर में महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अधिक आत्महत्‍या करते हैं। हो सकता हैं कि आप यह सुनकर हैरान हुए होंगे लेकिन ये ही सच हैं।

    International Men's Day 2019: Vegetables and dry Fruits help improve men's health | वनइंडिया हिंदी

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    महिला के रूप में मां, बहन, पत्नी या बेटी की हमारी जिंदगी में क्या अहमियत है ये हम अच्छे से जानते हैं लेकिन एक पिता, पति, भाई या बेटे के तौर पर एक पुरुष के बारे में हम कम ही बात करते हैं? क्या हम समझने की कोशिश करते हैं कि एक पुरुष की जिंदगी कैसी होती है?

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    दरअसल आज 19 नवंबर हैं और हर साल इस तारीख को इंटरनेशनल मेंस डे यानी अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस डे के रुप में मनाया जाता है। कमाल की बात ये है कि ज्यादातर पुरुषों को इसके बारे में पता ही नहीं है। यह दिन खासतौर पर पुरुषों के साथ होने वाले भेदभाव, शोषण,उत्पीड़न, हिंसा और असमानता को रोकने और उन्हें समाज में उनके अधिकार दिलाने के लिए मनाया जाता है। आइए इस खास दिन जानते हैं पुरुषों से जुड़ी ऐसी ही कई सच्‍चाई..

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    यह पुरुष ही है जब दुनिया में आता हैं तो पूरे परिवार के सपने पूरे करने का जरिया बन जाता हैं, कोई इन्‍हें बुढ़ापे का सहारा कहता है, तो किसी की आंखों का तारा बन जाता है लेकिन फिर भी मैं अत्याचारी कहलाता हैं।

    पुरुष अपनी जिम्मेदारियों व दायित्वों का भलीभांति निर्वहन करता जाता है। बचपन से ही पुरुषों को ताकतवर और निडर बनना सिखाया जाता हैं इसलिए वह अपनी भावनाएं व्‍यक्त करने में झिझकते हैं। यही कारण हैं कि पुरुष जल्‍दी रोते नही है। वह दिल की बात दिल में छिपाने के कारण कई बार एग्रेसिव हो जाते हैं, ऐसे में या तो वह दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं या फिर अपना जीवन समाप्‍त कर लेते हैं।

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    महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अधिक आत्महत्‍या करते हैं

    कई मायनों में पुरुष, महिलाओं से ज्यादा भावुक होते हैं।अहम के कारण पूरी जिंदगी भर दर्द झेलते रहते हैं और जब दर्द असहनीय हो जाता है तो मौत को गले लगा लेते हैं। नेशलल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो 2014 की रिपोर्ट के आंकड़े कुछ ऐसा ही सच बया कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 2014 में 30 साल तक के 27343 और 45 साल तक के 30659 पुरुषों ने आत्महत्‍या की। जबकि 30 साल की उम्र में महिलाओं के आत्महत्‍या के आंकड़ो के अनुसार 17527 और 45 साल की उम्र की महिलाओं की 11723 है।

    इसका मतलब महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अधिक आत्महत्‍या करते हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार 30 से 45 साल की उम्र की बीच के पुरुष सबसे अधिक आत्महत्‍या करते हैं। वहीं दूसरी रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के मुकाबलें पुरुषों में सुसाइड प्रवृति 3 गुना ज्यादा होती है। महिलाओं के मुकाबले पुरुष की मौत 4 से 5 साल पहले हो जाती है। हार्ट डिसीज के मामले में महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में सामने आते हैं।

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    40 फीसदी पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं

    दुनिया में 76 फीसदी आत्महत्या करने वाले पुरुष होते हैं। 86 फीसदी बेघर पुरुष होते हैं, 40 फीसदी पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं। दुनिया में होने वाले ज्यादातर अपराधों का शिकार पुरुष होते हैं। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को 64 फीसदी ज्यादा जेल में रहना पड़ता है यानी उन्हें महिला की अपेक्षा सजा भी ज्यादा मिलती है। हर 3 में से 1 पुरुष घरेलू हिंसा से जूझता है।

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    2019 की थीम 'मेकिंग ए डिफरेंस फॉर मेन एंड बॉय'

    इंटरनेशनल मेन्स डे हर साल 19 नवंबर को मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस की शुरुआत 1999 में त्रिनिदाद एवं टोबागो से हुई थी। तब से प्रत्येक वर्ष 19 नवम्बर को "अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस" दुनिया के 30 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इसे मान्यता देते हुए इसकी आवश्यकता को बल दिया और पुरजोर सराहना एवं सहायता दी है।

    समाज और परिवार में पुरुषों को अक्सर बेसब्र, गुस्सैल और हिंसक दिखाया जाता है। फिल्में हों या किताबें, इतिहास में भी उनकी परिभाषा इसी तरह से लिखी गई है।पुरुषों के प्रति प्रति लोगों की सोच को बदलने के लिए वेस्टइंडीज के हिस्ट्री लेक्चरर डॉ. जीरोम तिलक सिंह ने 19 नवंबर 1999 को इंटरनेशनल मेन्स डे की शुरुआत की। डॉ. जीरोम तिलकसिंह ने जीवन में पुरुषों के योगदान को एक नाम देने का बीड़ा उठाया था। उनके पिता के बर्थडे के दिन विश्व पुरुष दिवस मनाया जाता है। डॉ. जीरोम ने ही अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस की पहल की थी। इंटरनेशनल मेन्स डे 2019 की थीम 'मेकिंग ए डिफरेंस फॉर मेन एंड बॉय' है।

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    भारत में 2007 में इस महिला ने की इंटरनेशलन डे की शुरुआत

    भारत में इसकी शुरुआत 2007 में हुई, जिसका श्रेय हैदराबाद की लेखिका उमा चल्ला को जाता है। उमा का मानना है कि जब हमारी संस्कृति में शिव और शक्ति दोनों बराबर हैं तो पुरुषों के लिए भी सेलिब्रेशन का इन दिन क्यों नहीं होना चाहिए। महिलाओं को हमेशा समस्या से जोड़कर निर्बल दिखाया जाता है, जबकि पुरुष और महिला दोनों की अपनी-अपनी खूबियां हैं।

    शिव से शक्ति को अलग नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्हें अर्द्धनारीश्वर कहा जाता है। जब दोनों बराबर हैं, तो सेलिब्रेशन पुरुष के लिए भी होना चाहिए। इसी सोच के साथ उमा ने अमेरिका में रहकर कैंपेन शुरू किया। भारत में आकर जमीनी स्तर पर इसकी शुरुआत करना आसान नहीं था । इसलिए उन्‍होंने डिजिटल प्लेटफार्म पर आवाज उठाई और इस विषय पर लिखना जारी रखा।

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    English summary
    The International Men's Day is celebrated on 19 November. According to the report, Comparison to women Men commit more suicide. Not only this,in the world 1 in 3 men are victims of domestic violence.
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