55 साल की उम्र में भाजपा विधायक ने उठाया कलम, बेटियों ने किया पढ़ने के लिए प्रोत्साहित
कहते हैं पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती। इंसान जब चाहे तब कलम-किताब उठाकर अपनी किस्मत को बदल सकता है। राजस्थान के एक विधायक ने इसी सोच के साथ 55 साल की उम्र में वापस से पढ़ाई शुरू की है।

जयपुर। कहते हैं पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती। इंसान जब चाहे तब कलम-किताब उठाकर अपनी किस्मत को बदल सकता है। राजस्थान के एक विधायक ने इसी सोच के साथ 55 साल की उम्र में वापस से पढ़ाई शुरू की है। उदयपुर ग्रामीण से भाजपा विधायक फूल सिंग मीणा ने इस उम्र में पढ़ाई करने का फैसला लिया है ताकि वो बच्चों को पढ़ाई की अहमियत बता सकें। 10वीं-12वीं की परीक्षा पास करने के बाद अब मीणा बीए फर्स्ट ईयर की परीक्षा दे रहे हैं।

बेटियों ने आगे पढ़ने के लिए किया प्रोत्साहित
राजस्थान के उदयपुर ग्रामीण से भाजपा विधायत फूल सिंह मीणा लोगों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। 55 वर्षीय मीणा इस उम्र में अपने बीए फर्स्ट ईयर की परीक्षा दे रहे हैं। उन्होंने 40 साल बाद किताब-कलम उठाकर दोबारा पढ़ाई करने का फैसला लिया है। ये फैसला मीणा ने अपनी पांच बेटियों के प्रोत्साहन के बाद लिया है।

पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते छोड़ी थी पढ़ाई
सातवीं कक्षा तक पढ़ने वाले मीणा पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर सके। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार मीणा के पिता आर्मी में शहीद हो गए थे। उनकी मौत के बाद मीणा ने पढ़ाई छोड़ दी और परिवार का सहारा बनने के लिए खेती-बाड़ी शुरू कर दी। अब सालों बाद उनकी बेटियों ने उन्हें फिर से पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। मीणा ने बताया, 'राजनीति में आने के बाद मेरी बेटियों ने मुझे पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने मुझसे कहा कि आप वरिष्ट अधिकारियों और नेताओं से मिलते हैं, इसलिए आपके लिए शिक्षा जरूरी है।' (फोटो: फूल सिंह मीणा)

काम के चक्कर में नहीं ले पाते रोज क्लास
'लेकिन मैं अपनी उम्र के कारण संकोच में था। फिर मुझे लगा कि वो सही हैं। मैं लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताता हूं, लेकिन मैं खुद शिक्षित नहीं हूं। इसके बाद मैंने दोबारा पढ़ाई करने का फैसला लिया।' मीणा ने 10वीं-12वीं की कक्षा पास कर ली है और अब वो ग्रेजुएशन कर रहे है। राजनीति के कारण मीणा रोज क्लास नहीं ले पाते, इसलिए उनके शिक्षक उन्हें अलग शिक्षा देते हैं। मनवाखेड़ा में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल संजय लुनावत मीणा को यात्रा के दौरान पढ़ाते हैं।

मीणा की लगन से खुश हैं उनके टीचर
लुनावत ने बताया कि वो उन्हें तब पढ़ाते हैं जब वो एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा कर रहे होते हैं। 'या फिर मैं पढ़ाई का ऑॉडियो बनाकर उन्हें व्हाट्सऐप पर भेज देता हूं। वो ये ऑडियो सुन लेते हैं।' मीणा की लगन पर लुनावत ने कहा कि उन्होंने 40 साल बाद अपनी पढ़ाई शुरू और आज भी वो उसी लगन से पढ़ाई करते हैं। वो परीक्षा में बैठने के लिए कोई बहाना भी नहीं बनाते। मीणा अभी ग्रेजुएशन कर रहे हैं। इसके बाद वो पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी करना चाहते हैं।












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