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किसी और ने नहीं, अपनों ने पंचर की है सपा की साइकिल

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Mulayam Singh Yadav
लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने पूरी लोकसभा क्षेत्र में चमचमाती सड़कों का जाल बिछाया, पीने के पानी की भरपूर व्‍यवस्‍था की, 24 घंटे बिजली का तोहफा दिया, बावजूद इसके सपा के हाथों से मुलायम की चहेती सीट इटावा पर कमल खिल गया। इसके पीछे के कारणों को सख्‍ती से तलाशा जा रहा है।

घूम-फिरकर सभी की नजरें समाजवादियों के भीतरघात पर आकर टिक गईं हैं। वर्चस्‍व व खींचतान से अपने ही प्रत्‍याशी को हराने में इस बार सबसे ज्‍यादा सपाई ही लगे रहे। गौरतलब है कि इटावा में के खुद को समाजवादी पार्टी का सिपाही कहने वालों की अच्‍छी-खासी संख्‍या है व हर बार पार्टी के जिला सचिव से लेकर युवा नेता पद के लिए यहां नौंकझौंक सार्वजनिक होती रही है।

बीते कई महीनों से जिस तरह सपा पर दंगों, गैर-जरूरी वक्‍त पर सैंफई महोत्‍सव का आयोजन जैसी बातों ने नकारात्‍मक माहौल तो बनाया ही, साथ ही भीतरखाने चल रही बर्चस्‍व और वजन के कांटे ने साइकिल को बुरी तरह पंचर कर दिया। कई सपाई अब इस हार को 'मोदी लहर' कहकर भले ही अपना पल्‍ला झाड़ रहे हों, पर पीछे की कहानी इससे कहीं अलग है।

औरैया हो या सिकंदरा, दिबियापुर हो या फिर भरथना या फिर पैतृक सीट इटावा, सभी विधानसभाओं मेंमें बड़े स्‍तर के नेता भी भीतरघातियों की श्रेणी में शामिल होने से पीछे नहीं रहे। जो नेता टिकट ना मिलने, महत्‍व ना मिलने पर बगावत करके पार्टी नहीं छोड़ पाए, उन्‍होंने भीतर रहकर ही डंक मारना मुनासिब समझा, जिससे सपा की अहम सीटों में भी कमल खिल गया।

खबर यह भी है कि जो सपा नेता नेतृत्‍व से नाराज रहे, उन्‍होंने भाजपा के प्रत्‍याशी को चुनाव जिताने के लिए बैकडोर से धन तक पहुंचाया। ऐसा केवल बर्चस्‍व व खींचतान के लिए ही किया गया। किसी को लालबत्‍ती ना मिलने से तमतमाहट थी, तो कोई प्रत्‍याशी ना बनाए जाने से बगावती रंग में खुद को रंग रहा था।

कोई सपा प्रत्‍याशी के चुनाव की बागडोर संभालने वालों से खफा था तो कोई बसपा सरकार में अशोक दोहरे से लाभ लेने के कारण उनके साथ अंदरखाने जुटा रहा। चुनाव में अपना बूथ संभालने और अपनी ही पार्टी के अपने विरोधी का बूथ हराने की होड़ सी मच गई थी। इन्‍हीं कुछ वजहों ने समाजवादी पार्टी की साइकिल को कई अहम रास्‍तों पर पंचर किया और मुलायम सिंह के तालाब में कमल खिल उठा।

सपा के एक बड़े नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि भीतरघातियों ने जो किया है वह किसी से छिपा नहीं रहा, जिस पार्टी ने उन्‍हें नाम, पद, इज्‍जत दिलाई उसी दल के दिल में लोगों ने छेद किया।

अब जब पार्टी के भीतर घमासान मंथन चल रहा है, तो आसार लगाए जा रहे हैं कि मुलायम सिंह जल्‍द ही अहम फैसले सकते हैं। बीते दिन सपा सूत्र से खबर उड़ी थी कि मुलायम सिंह यूपी की कमान अपने हाथों में ले सकते हैं व अखिलेश को संगठन में कामकाज का मौका दिया जा सकता है।

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English summary
In Etawah or nearby seats, there is inner conflicts are responsible behind the loss of Samajwadi Party.
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