Infantry day: चीन बॉर्डर की सुरक्षा में तैनात Fire and Fury कमांड में भी शहीदों को किया गया याद

लेह। 27 अक्‍टूबर को सेना इनफेंट्री डे के तौर पर मनाती है। इस मौके पर लेह स्थित 14 कोर जिसे फायर एंड फ्यूरी के तौर पर जानते हैं, वहां पर भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई है। लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन जिन्‍होंनेने पिछले दिनों इस कोर की जिम्‍मा संभाला है, वॉर मेमोरियल पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इनफेंट्री डे उन सैनिकों के लिए समर्पित है जो पैदल सेना का अहम हिस्‍सा हैं।

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क्‍यों खास है फायर एंड फ्यूरी कमांड

27 अक्‍टूबर के दिन ही पहली बार भारतीय सेना जम्‍मू कश्‍मीर में दाखिल हुई थी। ले. जनरल पीजीके मेनन ने इस खास दिन पर शहीदों को याद करते हुए उन्‍हें श्रद्धांजलि दी। ले. जनरल मेनन ने 14 अक्‍टूबर को बतौर जनरल-ऑफिसर-इन-कमांड (जीओसी) 14 कोर की कमानसंभाली है। फायर एंड फ्यूरी वह कमांड है जिस पर चीन से लगी लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएएसी) के साथ द्रास-कारगिल-बटालिक और सियाचिन सेक्‍टर में पाकिस्‍तान से निबटने की जिम्‍मेदारी है। ऐसे में इस कमान की चुनौतियां भी दोगुनी हो जाती है। इस खास मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे ने राजधानी दिल्‍ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सेना के मुताबिक इनफेंट्री डे उसके स्‍वर्णिम इतिहास का पहला अध्‍याय है। पाकिस्‍तान की तरफ से जम्‍मू कश्‍मीर में घुसपैठ कराकर भेजे गए कबायलियों को सेना ने खदेड़ कर इस राज्‍य के अस्तित्‍व की रक्षा की थी। पाकिस्‍तान आर्मी के मुंह पर वह पहला तमाचा था जो सेना की पहली इनफेंट्री बटालियन ने उसे मारा था। 1 सिख इनफेंट्री बटालियन के सैनिकों श्रीनगर एयरबेस पर उतरे और फिर बहादुरी के साथ उन्‍होंने घुसपैठियों को घाटी से बाहर किया।

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