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पुरानी बीमारियों वाले भारतीय युवाओं को भी है Covid19 का अधिक खतरा: स्टडी

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नई दिल्ली। एक नए शोध की मानें तो वैश्विक स्तर पर हर पांच में से एक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति ऐसी है, जो उसके गंभीर कोरोना वायरस बीमारी के खतरे को बढ़ाती है। शोध अनुमान में कहा गया है कि भारत में 15 से 64 वर्ष की आयु के बीच की लगभग 30 फीसदी कामकाजी आबादी में कम से कम एक की ऐसी स्थिति है, जो उन्हें Covid -19 की जटिलताओं के प्रति संवेदनशील बनाती है।

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लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में हुए शोध पत्र के मुताबिक वैक्सीन की अनुपस्थिति में गहन फिजिकल डिस्टेंसिंग उपायों द्वारा उच्च जोखिम वाले लोगों से बाकी लोगों की बचाने का एकमात्र विकल्प है।

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अध्ययन में कहा गया है, यह कई बार और ऐसी जगहों पर महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां मामलों से स्वास्थ्य प्रणाली के अभिभूत होने का जोखिम है। शोध पत्रों के प्रकाशन से पूर्व मेड्रिक्सिव नामक वेबसाइट में यह शोध रिपोर्ट प्रकाशित किया गया है।

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शोध पत्र के मुताबिक अनुमानित 170 करोड़ लोगों (वैश्विक आबादी का 22%) में कम से कम एक और 0.4 लाख की कम से कम दो अंतर्निहित स्थितियां ऐसी हैं, जो गंभीर Covid -19 संक्रमण के अपने जोखिम को बढ़ा सकती हैं। एक या अधिक स्थिति की व्यापकता 25 वर्ष की आयु तक 10 फीसदी है।

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जबकि 50 वर्ष तक 33 फीसदी और 70 वर्षों तक 66 फीसदी थी, जो यह दर्शाता है कि युवाओं के एक बड़े हिस्से को भी सह-रुग्णता का खतरा है। वहीं, क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी), हृदय रोग (सीवीडी), और क्रोनिक श्वसन रोग (सीआरडी) से पीड़ित 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में सबसे अधिक प्रचारित स्थिति में पाए गए थे।

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 उच्च आय वाले देशों की आबादी में है Covid19 का अधिक जोखिम

उच्च आय वाले देशों की आबादी में है Covid19 का अधिक जोखिम

शोध पत्र में सबसे महत्वपूर्ण यह कही गई है कि अफ्रीका और दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों की तुलना में उच्च आय वाले देशों की आबादी में इससे अधिक जोखिम में है। पत्र के मुताबिक यह जोखिम कमजोर आबादी वाले अफ्रीका में 16 फीसदी, उत्तरी अमेरिका में 28 फीसदी और यूरोप में 31 फीसदी है।

पुरानी बीमारियों वाले यूरोपीय और उच्च आय वाले देशों में अधिक जोखिम

पुरानी बीमारियों वाले यूरोपीय और उच्च आय वाले देशों में अधिक जोखिम

अनुमानों पर पहुंचने के लिए ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) अध्ययन और अन्य वैश्विक अध्ययनों का उपयोग करने वाले शोधकर्ताओं के अनुसार सबसे ज्यादा अनुमान पुरानी बीमारियों वाले यूरोपीय और अन्य उच्च आय वाले देशों में थे।

ऐसे किया गया शोध के दौरान मरीजों की जोखिम के व्यापकता का अनुमान

ऐसे किया गया शोध के दौरान मरीजों की जोखिम के व्यापकता का अनुमान

शोध के दौरान जोखिम के व्यापकता का अनुमान सीवीडी, सीकेडी, सीआरडी, क्रोनिक यकृत रोग, मधुमेह, कैंसर, एचआईवी / एड्स, तपेदिक, क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल विकार, सिकल सेल रोग से पीड़ित मरीजों की उम्र, लिंग और देश द्वारा किया गया है।

उच्च मधुमेह आबादी में Covid-19 के बढ़े हुए जोखिम का हिस्सा उच्च था

उच्च मधुमेह आबादी में Covid-19 के बढ़े हुए जोखिम का हिस्सा उच्च था

पाया गया कि अफ्रीकी देशों में एचआईवी / एड्स और उच्च प्रसार है जबकि द्वीप देश मसलन फिजी, गुआम, किरिबाती आदि में मधुमेह के एक उच्च प्रसार के साथ उनकी आबादी में Covid-19 के बढ़े हुए जोखिम का हिस्सा उच्च था।

जहां भी लोग लंबे समय तक रहते हैं, गैर-संचारी रोग का बोझ उन पर अधिक होता है

जहां भी लोग लंबे समय तक रहते हैं, गैर-संचारी रोग का बोझ उन पर अधिक होता है

हालांकि लाइफ़कोर्स एपिडेमियोलॉजी पब्लिक हेल्थ फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया प्रमुख और प्रोफेसर डा गिरिधर बाबू ने कहा कि जहां भी लोग लंबे समय तक रहते हैं, गैर-संचारी रोग का बोझ उन पर अधिक होता है, जो उन्हें वायरल संक्रमणों के प्रति संवेदनशील बनाता है।

भारत में तीन वयस्कों में से एक में उच्च रक्तचाप के जल्दी विकसित होते हैं

भारत में तीन वयस्कों में से एक में उच्च रक्तचाप के जल्दी विकसित होते हैं

भारत में गैर-संचारी रोगों की समय से पहले शुरुआत होती है, अधिकांश मामलों में उनमें से तीन वयस्कों में से एक में उच्च रक्तचाप के जल्दी विकसित होते हैं और 10 में से एक को मधुमेह होता है। इसलिए हमारे पास बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्हें गंभीर Covid -19 बीमारी हो सकती है, लेकिन भारत में Covid19 पॉजिटिव पाए गए 70 फीसदी से 80 फीसदी मरीजों में बहुत हल्के लक्षण हैं या सिर्फ स्पर्शोन्मुख हैं।

जब संक्रमण चरम पर होने की आशंका हो तब क्या करना चाहिए?

जब संक्रमण चरम पर होने की आशंका हो तब क्या करना चाहिए?

शोध पत्र में कहा गया है कि जब संक्रमण चरम पर होने की आशंका हो तब बुजुर्गों और पोस्ट लॉकडाउन अवधि के लिए शुरुआती कॉम्बिडिटीज़ वालों के लिए एक योजना बनाने में शोध पत्र में मौजूद डेटा को मदद करना चाहिए। उनके मूवमेंट को सीमित करके, मास्क का उपयोग, सोशल डिस्टेंसिंग आदि के द्वारा उन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए। ऐसे लोग अस्पतालों में भी विशेष देखभाल पा सकते हैं।

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English summary
According to a research paper led by researchers from the London School of Hygiene and Tropical Medicine, in the absence of a vaccine, intensive physical distancing measures are the only option to protect others from high-risk people, the study said, many times and such May be important in places where there is a risk of the health system being overwhelmed by cases. Prior to publication of research papers, this research report has been published in a website called Medrixive.
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