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चीन में काम करने वाले भारतीय रिसर्चर ने 63 दिन क्वारंटाइन में बिताए, सुनाई वुहान से कांगड़ा तक की कहानी

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नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के रहने वाले एक खोजकर्ता (जीव-विज्ञानी) ने कोरोना वायरस लॉकडाउन को लेकर अपनी आपबीती सुनाई है। कांगड़ा जिले के रहने वाले सोम दत्त (36) उस वक्त चीन के वुहान में ही थे, जब वहां कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमण तेजी से फैल रहा था। सोम दत्त ने अपने बीते दो महीने की कहानी सुनाते हुए कहा कि वह वुहान शहर के अपने अपार्टमेंट में 36 दिन तक बंद रहे, इसके बाद दिल्ली के इंस्टीट्यूश्नल क्वारंटाइन में 16 दिन तक रहे और अब बीते 11 दिन से अपने घर पर बंद हैं।

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कांगड़ा जिले के मतलहर गांव के रहने वाले सोम दत्त कहते हैं कि ये साल उनके लिए क्वारंटाइन वाला रहा है। कांगड़ा अब तक हिमाचल में कोरोना से प्रभावित अकेला जिला है। जहां तीन मामले सामने आए हैं और एक शख्स की मौत हो गई है। दत्त चीन की एक कंपनी में काम करते हैं, जो वैक्सीन की रिसर्च और डेवलपमेंट का काम करती है। वह साढ़े तीन साल पहले वुहान गए थे। वह बताते हैं, 'चीन में 10 जनवरी से स्थानीय प्रशासन ने लोगों से मास्क पहनने को कहा था। तब एक नया वायरस आया था, जिसके बारे में किसी को नहीं पता था।'

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'जब मामले तेजी से बढ़े तो सरकार ने 23 जनवरी को शहर में लॉकडाउन लगा दिया। लोगों को केवल जरूरी सामान लेने के लिए बाहर जाने को कहा गया। लेकिन 10 फरवरी के बाद सभी को घरों से बिलकुल निकलने से मना किया गया। हर कम्युनिटी के लिए एक वालंटियर असाइन किया गया, जो लोगों को घरों तक सामान देता था। हम वी-चैट पर बात करते थे और कभी नहीं मिले। मैं किसी भी इंसान से उस समय नहीं मिला। मुझे अपनी बाल्कनी से भी कोई इंसान नहीं दिखता था। मैं उन 36 दिनों में केवल 1.5 घंटे के लिए अपने ऑफिस के काम से बाहर निकला था।'

सोम दत्त उन 112 भारतीयों में शामिल हैं, जिन्हें भारत सरकार ने वुहान से बाहर निकाला था। दिल्ली आने पर उन्हें आईटीबीपी कैंप की क्वारंटाइन फैसिलिटी में रखा गया। यहां का अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि 'कैंप में सब लोग नए वायरस के कारण डरे हुए थे। सभी को कैंप में अलग-अलग पलंग दिए गए, यहां साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा गया, दिन में दो बार डॉक्टर जांच करने आते थे। खाना भी अच्छा मिलता था और वाईफाई की सुविधा भी थी।' सोम दत्त ने कहा कि उन्हें यहां जिस तरह की सुविधा मिली उसकी उन्होंने उम्मीद भी नहीं की थी।

कोरोना वायरस का टेस्ट निगेटिव आने के बाद 14 मार्च को सोम दत्त अपने घर लौटे। इसके 6 दिन बाद ही कांगड़ा जिले में कोरोना वायरस के पहले मामले की पुष्टि हो गई। जिसके बाद से जिले में कर्फ्यू और लॉकडाउन लागू किया गया है। सोम दत्त का कहना है कि उनका ये नया क्वारंटाइन अब 21 दिनों तक चलेगा। भारत में लगाए गए 21 दिन के लॉकडाउन की दत्त ने सराहना की और कहा कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाया गया बेहद अच्छा कदम है। अपने घर पर भी दत्त अधिकतर समय वायरस से संबंधित रिसर्च पढ़कर बिताते हैं। उनका कहना है, 'इस वक्त, मेरे साथ मेरी पत्नी, माता-पिता और मेरी पांच साल की बेटी हैं।'

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English summary
indian researcher from himachal tells story of quarantine from wuhan to kangra coronavirus
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