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Indian Railways:कैसी है दुनिया की पहली हॉस्पिटल ट्रेन Lifeline Express,इसके बारे में सबकुछ जानिए

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नई दिल्ली- भारत की अकेली और दुनिया की पहली हॉस्पिटल ट्रेन लाइफ एक्सप्रेस (Lifeline Express) इस समय असम की बराक वैली (Barak Vally) के बदरपुर स्टेशन (Badarpur Station) पर खड़ी है। भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इस ट्रेन की तस्वीरों के साथ इसकी विशेषताओं की कुछ जानकारियां साझा की हैं। हम यहां पर आपको इस 'जीवन रेखा एक्सप्रेस' से जुडी हर खास बातें बताने जा रहे हैं, जो दुनिया में इस तरह का पहला और कामयाब प्रयोग रहा है। यह लाइफलाइन एक्सप्रेस भारतीय रेलवे और स्वास्थ्य मंत्रालय की साझेदारी में चलाई जाती है। इस ट्रेन में कुल सात कोच लगे हुए हैं।

10 लाख से ज्यादा लोग हो चुके हैं लाभांवित

10 लाख से ज्यादा लोग हो चुके हैं लाभांवित

जानकारी के मुताबिक ये लाइफलाइन एक्सप्रेस अपने जीवन के 210वें प्रोजेक्ट पर इस समय असम (Assam) पहुंची हुई है और 26 जनवरी के आसपास तक वहीं पर दूर-दराज इलाकों के गरीबों को मुफ्त में इलाज मुहैया करवाने वाली है। यह ट्रेन पिछले तीन दशकों से पूरे देश में जगह-जगह जाकर इसी तरह से गरीब तबकों तक बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध करवाने की कोशिशों में लगी हुई है। एक अनुमान के मुताबिक इस हॉस्पिटल ट्रेन (Hospital Train) के जरिए अब तक देश के 10 लाख से ज्यादा मरीजों का मुफ्त स्वास्थ्य परामर्श, इलाज और सर्जरी मुहैया करवाई जा चुकी है। इस महीने यह ट्रेन असम की बराक वैली में कम से कम तीन जिलों के लोगों तक सेवाएं पहुंचाएगी।

ट्रेन में दो मॉडर्न ऑपरेशन थियेटर

ट्रेन में दो मॉडर्न ऑपरेशन थियेटर

अगर इस ट्रेन (Lifeline Express)के जरिए आम लोगों को उपलब्ध करवाई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में बताएं तो इसमें दो स्टेट ऑफ आर्ट ऑपरेशन थियेटर्स (modern operation theatres) हैं, जिनमें 5 ऑपरेटिंग टेबल (operating tables) मौजूद हैं। इनके अलावा इस हॉस्पिटल ट्रेन में डेंटल डिपार्टमेंट भी है, जिसमें तीन डेंटल चेयर हैं। मरीजों की विभिन्न तरह की जांच के लिए एक्सरे (Xray),मैमोग्राफी कोलपोस्कोप (Mammography Colposcope) और पैथोलोजी लैब (Pathology lab)का भी इंतजाम है। इस लाइफलाइन एक्प्रेस में मरीजों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए 20 लाइफलाइन स्टाफ (Lifeline staffs) मौजूद हैं। इनके अलावा जरूरत के मुताबिक देश के विभिन्न मेडिकल इंस्टीट्यूट के सर्जन भी यहां अपनी सेवाएं देने के लिए बाए जाते हैं।

निर्धारित संख्या में मरीजों को अस्पताल ट्रेन तक बुलाया जाएगा

निर्धारित संख्या में मरीजों को अस्पताल ट्रेन तक बुलाया जाएगा

इस समय लाइफलाइन स्टाफ वहां आसपास के इलाकों में जाकर मरीजों को इस हॉस्पिटल ट्रेन के बारे में जानकारी देकर उनके उपचार के लिए समय निर्धारित कर रहे हैं। क्योंकि,पहले तो इस ट्रेन को लोग मेडिकल कैंप के तौर पर लेते थे और मुफ्त इलाज के लिए भीड़ उमड़ पड़ती थी। लेकिन,कोरोना की वजह से मरीजों की संख्या निश्चित कर दी गई है और लाइफलाइन स्टाफ घर-घर जाकर मरीजों की स्क्रीनिंग के बाद सिर्फ उन्हें ही अस्पताल ट्रेन तक बुला रहे हैं, जिन्हें इसकी आवश्यकता है।

चलते-फिरते अस्पताल में होती हैं ये सर्जरी

चलते-फिरते अस्पताल में होती हैं ये सर्जरी

इस ट्रेन में जिन सर्जरी की सुविधा आमतौर पर उपलब्ध करवाई जाती है, उसमें आंख की रोशनी वापस लाने की सर्जरी या मोतियाबिंद, पोलियो पीड़ितों के लिए आवश्यक सर्जरी, बहरेपन से जुड़ी सर्जरी और जिनके होठों में फांक होते हैं उनकी सर्जरी। इसके अलावा इस अस्पताल में मिर्गी के मरीजों का भी उपचार किया जाता है। इसके अलावा इस अस्पताल में कैंसर के प्रति जागरूकता भी फैलाई जाती है और ओरल (Oral), सर्वाइकल(cevical) और ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancers) से जुड़ी स्कीनिंग सेवाएं भी मुहैया करवाई जाती हैं। इनके अलावा लगभग गणतंत्र दिवस तक जबतक यह ट्रेन वहां रहेगी, मरीजों के ब्लड प्रेशर और सुगर की भी जांच की जाएगी। मरीज यहां पहले से अप्वाइंटमेंट लेकर जेनरल कंसल्टेशन के अलावा मैमोग्राफी और ओरल सीए-स्क्रीनिंग की सुविधाओं का भी लाभ उठा सकते हैं।

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English summary
Indian Railways:How is the world's first hospital train Lifeline Express, know everything about it
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