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भारत का एक राजकुमार जो खुद है 'गे', और 15 एकड़ में बनवा रहा है समलैंगिकों के लिए आश्रम

By Yogesh Ranta
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    नई दिल्ली। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देश में समलैंगिकता के संबंधों पर ऐतिहासिक फैसला दिया। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने दो वयस्कों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाली धारा 377 से बाहर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसलने एक बार फिर इस बात को स्थापित कर दिया कि देश में संविधान ही सर्वोपरी है और कोई उससे बाहर नहीं और कोई उससे ऊपर नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बहुतमत से सभी चीज़ें नहीं चल सकती है और हमें सभी को समान अधिकार देते हुए साथ चलना होगा। कोर्ट का ये फैसला समलैंगिक लोगों के ओर हमरे समाज की सोच को भी बदले में कारगर साबित होगा।

    manvendra

    'गे' राजकुमार की कहानी
    हमारे समाज में हमेशा से समलैंगिक लोग रहे हैं लेकिन हमने उन्हें कभी खुलकर अपनाया नहीं। ऐसे लोग खुद भी आगे आने से बचते रहे लेकिन हमारे देश में ही एक शख्स ऐसा है जिसने खुले तौर पर खुद के 'गे' होने की बात स्वीकार की थी। 23 सितंबर 1965 को अजमेर में महाराजा रघुबीर सिंह जी राजेंद्र सिंह जी के घर में एक बच्चा पैदा होता। बच्चे का नाम मानवेंद्र रखा गया। मानवेंद्र का बचपन और बच्चों की तरह ही बीता। बाद में मानवेंद्र ने मुंबई स्कॉटिश स्कूल और अमृत बेन जीवन लाल कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनोमिक्स से अपनी पढ़ाई पूरी की।
    समलैंगिक होने का कब चला पता

    समलैंगिक होने का कब चला पता

    प्रिंस मानवेंद्र सिंह गोहिल खुद बताते हैं कि उन्हें अपनी यौन इच्छा के बार में ज्यादा कुछ पता नहीं था। उन्हें लग रहा था कि शादी के बाद चीजें ठीक हो जाएंगी और उनका परिवार होगा। साल 1991 में मानवेंद्र की शादी मध्यप्रदेश के झाबुआ की रहने वाली चंद्रेश कुमारी से होती। शादी के एक साल के बाद ही मानवेंद्र की जिंदगी पलट जाती है और 1992 में मानवेंद्र और उनकी पत्नी अलग हो जाते हैं। शादी टूटने का कारण मानवेंद्र का समलैंगिक होना था। मानवेंद्र ने शुरु में ये बात छुपाए रखी लेकिन 2002 में जब मानवेंद्र को मानसिक तनाव के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा तो फिर डॉक्टर ने समलैंगिक होने की बात उनके परिजनों को बताई। इसके बाद भी बात परिवार के अंदर ही रही। 2005 में वडोदरा के पत्रकार मानवेंद्र से मिलते हैं और फिर मार्च 2006 में ये बात एक अखबार के जरिए सामने आती है कि प्रिंस मानवेंद्र समलैंगिक हैं।

    लोगों ने किया अपमान

    लोगों ने किया अपमान

    जब मानवेंद्र के समलैंगिक होने का खुलासा हुआ तो राजपीपला शहर के लोगों ने जहां मानवेंद्र रह रहे थे उनका विरोध किया,शहर में उनके पुतले जलाए गए और जब कभी वो लोगों के बीच निकले उन्हें अपशब्द कहे गए और धक्कामुक्की तक की गई।

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    समलैंगिकों के लिए आश्रम

    समलैंगिकों के लिए आश्रम

    अपनी समलैंगिकता को सारवजनिक तौर पर स्वीकार करने के बाद मानवेंद्र ने दूसरे ऐसे ही लोगों की मदद का बीड़ा उठाया।पहले मानवेंद्र ने HIV और AIDS पीड़तों की मदद के लिए ट्रस्ट बनाया और फिर उन्होंने गुजरात के नर्मदा जिले के राजपीपला में समलैंगिकों के लिए वृद्धाश्रम की स्थापना की। इस आश्रम में करीब 50 से अधिक 'गे' लोगों के रहने की व्यवस्था की गई थी और इसी साल मानवेंद्र 15 एकड़ की जमीन परे बनवा रहे हैं ताकि इसमें और ज्यादा उन समलैंगिक लोगों को आश्रय दिया जा सके जिन्हें उनके परिवार और समाज ने ठुकरा दिया है।

    समलैंगिक लोगों की सशक्त आवाज़

    समलैंगिक लोगों की सशक्त आवाज़

    आज राजकुमार मानवेंद्र का नाम सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जाना जाता है। वो 24 अक्टूबर 2007 को मशहूर अमेरिकी टेलीविजन शो 'द ओपरा विनफ्रे शो' में अतिथि के रूप में मौजूद थे। मानवेंद्र ने 25 जुलाई 2008 को स्वीडन के स्टॉकहोम में 'यूरो प्राइड' समलैंगिक त्यौहार का उद्घाटन किया। मानवेंद्र 2009 में बीबीसी टेलीविजन की एक श्रृंखला में भी नजर आए। मानवेंद्र जुलाई 2010 से राजपीपला से प्रकाशित हो रही समलैंगिक पुरुष केंद्रित प्रिंट पत्रिका 'फन' का संपादन कर रहे हैं। उनकी संस्था लक्ष्य फाउंडेशन समलैंगिक पुरुषों तथा ट्रांसजेंडरों के साथ काम करती है, और सुरक्षित सेक्स का प्रचार करती है।

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    English summary
    Indian 'Gay Prince' who always fought for gay rights and safe sex.

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