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पंजाब में एक ही परिवार के तीन किसानों ने कर ली ख़ुदकुशी, अब खाने के लाले

By Bbc Hindi

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पंजाब में किसानों की आत्महत्या अब कोई नयी बात नहीं है, आए दिन अख़बारों के पन्नों पर ऐसी कोई ख़बर रहती हैं.

फतेहगढ़ साहिब पंजाब के अन्य जिलों की तुलना में अधिक समृद्ध है, लेकिन किसानों की आत्महत्या के मामले में इसका नाम भी शुमार होता जा रहा है.

फतेहगढ़ साहिब के चनारथल कलां गांव किसानी के संकट से इस कदर घिरा कि एक ही परिवार से तीन तीन अर्थियां निकलीं.

सबसे पहले बड़े लड़के ने आत्महत्या की फिर पिता और छोटे बेटे ने भी कर ली.

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आढ़तियों के जुल्मों से तंग आकर आत्महत्या?

घर में केवल एक ही बुजुर्ग बची हैं. दोनों लड़के के सेहरे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि घर में खुशी का माहौल था जो अब एक भयानक चुप्पी में बदल गई है.

परिवार के अनुसार तीनों ने कर्ज़ और आढ़तियों (कमीशन एजेंट्स) के जुल्मों से तंग आकर आत्महत्या की. इसके बाद पुलिस ने कमीशन एजेंट्स के ख़िलाफ़ आत्महत्या का मामला दर्ज़ किया.

घर की महिला बुजुर्ग जसपाल कौर ने कहा, "कुछ साल पहले, मेरा घर खुशियों से भरा था, लेकिन आज पूरी तरह से निराशा है." उदासी और निराशा उनके चेहरे पर साफ़ दिखती है.

जसपाल कौर कहती हैं, "आठ साल पहले अपने युवा बेटे की मौत की उदासी अभी गयी भी नहीं थी कि पिछले साल दिसंबर में मेरे पति ने कीटनाशक पीकर जान दे दी."

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झांसा देकर ज़मीन बेचा

वो कहती हैं, "गांव के कमीशन एजेंट्स ने झांसा देकर हमारी ज़मीनें किसी को बेच दी. चक्कर काटने के बाद भी पैसे नहीं दिए. इसी वजह से पहले मेरे पति ने और फिर छोटे बेटे ने जान दे दी."

जसपाल कौर कहती हैं, "पैसे का लेन-देन कमीशन एजेंट्स के साथ था, हमें उन्हें चार लाख देने थे. लेकिन उन्होंने देनदारी 24 लाख रुपये बना दी और धोखे से सारी ज़मीनें बेच दी और पैसे भी हड़प लिए."

जसपाल कौर की बेटी बलजिंदर कौर कहती हैं कि घर में गरीबी का आलम ऐसा है कि खाना खाने से भी लाले पड़ गए हैं.

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सरकार नहीं सुन रही

बेटे देविंदर की पत्नी अपनी आठ साल की बेटी को लेकर हमेशा के लिए मायके चली गई है.

अपने भाई को याद करते हुए बलजिंदर कौर कहती हैं, "पिता की मौत और ज़मीन की धोखाधड़ी के बाद, वह तनाव में था, इसलिए एक दिन उसने कमरे की कुंडी बंद की और खुद को फांसी पर लटका कर अपनी जान दे दी."

इस मुद्दे को को लेकर भारतीय किसान संघ के नेता हरनेक सिंह ने कहा कि वो इस परिवार के साथ हुई जबरदस्ती के विरोध में कई बार धरना कर चुके हैं, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी.

दूसरी ओर, फतेहगढ़ साहिब के डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कमीशन एजेंट्स के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ कर लिया गया है और इस मामले में तीन भाइयों पर आरोप हैं. जिनमें से एक पहले से जेल में है, जबकि अन्य दो को पकड़ने की कोशिश चल रही है.

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क्या कहते हैं आंकड़े?

अपराधों का लेखा-जोखा रखने वाली संस्था नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार 2015 में पूरे भारत में 12602 किसानों ने आत्महत्या की थी.

इसकी सबसे बड़ी तादाद महाराष्ट्र में थी.

हालांकि पंजाब में आत्महत्या के मामले अन्य राज्यों की तुलना में काफ़ी कम है, लेकिन चिंता का विषय यह है कि यह संख्या लगातार बढ़ रही है.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2014 में राज्य के 24 किसानों ने आत्महत्या की. जिसकी संख्या 2015 में 100 तक पहुंच गयी.

पटियाला स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा राज्य सरकार को प्रस्तुत एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 से 2016 के अंत तक राज्य के 22 ज़िलों में 1674 किसानों ने आत्महत्या की है.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

कृषि मामलों के विशेषज्ञ देवेन्द्र शर्मा कहते ​​हैं, "इस समय किसानों की ज़रूरत सबसे बड़ी है, अगर सरकार अपने कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग की स्थापना कर सकती है तो फिर किसानों के लिए कोई किसान आयोग क्यों नहीं है."

कृषि अर्थशास्त्र विशेषज्ञ रंजीत सिंह घुम्मन के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में किसानों की आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हुई है. किसानों की आय में गिरावट जबकि कर्ज़ में वृद्धि हुई है."

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English summary
Indian farmer Three farmers of the same family in Punjab have been self-satisfied now eat lal
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