भारतीय अर्थव्यवस्था हर मोर्चे पर मजबूत, धूल चाट रहे हैं प्रतिद्वंद्वी
पहली बार भारतीय अर्थव्यस्था की कामयाबी के चर्चे दुनिया भर में उदाहरण देकर हो रहे हैं। यह तब हो रहा है जब भारत की आर्थिक नीतियां सफल हुई हैं और देश के प्रतिद्वंद्वी हमसे पिछड़ गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमजोरी को देखने के बाद जब भारतीय अर्थव्यवस्था को 'ब्राइट स्पॉट' कहा था, तो भारत के नीति-निर्माताओं ने भी उसपर बहुत ही सधी हुई प्रतिक्रिया दिखाई थी। लेकिन, सच्चाई ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम ने वैश्विक महामारी के फौरन बाद देश की अर्थव्यस्था को संभालने के लिए जो नीति अपनाई, वह बहुत ही विवेवकपूर्ण थे और आखिरकार अब जाकर यह बात सही साबित हो रही है।
भारत की जीडीपी ने आंखें खोल दीं
ज्यादा इधर-उधर की बातों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। हाल में जारी भारत की जीडीपी के आंकड़े ही आंखें खोलने के लिए बहुत है। इसने तो सरकार के अपने 7 फीसदी के अनुमानों को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत ने विपरीत वैश्विक परिस्थियों के बावजूद जिस तरह से 7.2 फीसदी का विकास दर हासिल किया है, उससे यह सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यस्थाओं में से एक बन गया है।
'कैसे एक दशक से भी कम समय में भारत बदल गया है'
यह ऐसे समय में हो रहा है, जब पड़ोसी चीन अभी भी महामारी की चपत से उबरने में ही लगा हुआ है। यह तय है कि भारत अपने प्रतिद्वंद्वियों से ज्यादा तेजी के साथ आर्थिक तरक्की कर रहा है। अमेरिकी फाइनेंसियल सर्विस कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने 'कैसे एक दशक से भी कम समय में भारत बदल गया है' पर एक विस्तृत रिपोर्ट दी है। इसमें यह भरोसा जताया गया कि भारत भविष्य में भी बहुत ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम है।
अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में दिख रहा है दम
अप्रत्याशित राजस्व के कलेक्शन से लेकर विवेकपूर्ण खर्च, निर्यात से लेकर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बढ़ोतरी, भारत ने हर मोर्चे पर झंडा गाड़ा है। ऊपर से लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास फिर भी मुद्रास्फीति में लगातार हुई गिरावट यही संकेत दे रहे हैं कि अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में जो फैसले लिए गए हैं, वह लाभदायक रहे हैं।
'यह भारत उससे भिन्न है, जो यह 2013 में था'
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट की हेडलाइन है, 'यह भारत उससे भिन्न है, जो यह 2013 में था'। 'भारत ने ऐसा क्या किया है, जो दूसरे नहीं कर सके, जहां वह आज पहुंचा है?' 'दुनिया की 5 प्रतिष्ठित अर्थव्यवस्थाओं में से एक जो सबसे तेजी से बढ़ रही है।' यह इसलिए हो पाया है कि भारत में इसके लिए लगभग हर तरह की कोशिशें हुई हैं, तभी देश आज यह दिन देख रहा है।
भारत आज अपने लंबे समय की अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों को भी साध रहा है और प्रभावी तरीके से सुधारों पर भी अमल कर रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था के पीछे जो दिमाग काम कर रहे हैं, उन्होंने व्यक्तित आकांक्षाओं को पूरा करने में भी कामयाबी पाई है तो राष्ट्र निर्माण के भी वाहक बन रहे हैं।
'सकल स्थिर पूंजी निर्माण में हमने बहुत अच्छा किया'
स्वतंत्र रिसर्च से जुड़ी एक अलाभकारी संस्था एग्रो फाउंडेशन से जुड़े चरण सिंह का कहना है, 'वार्षिक आंकड़ों में आपने सही कहा कि हम 7.2 फीसदी के हिसाब से बढ़े हैं। यह प्रोजेक्शन 6.8 फीसदी था। हम फिर प्रोजेक्शन से बढ़ गए। यह बहुत बहुत ही सकारात्मक है। हम किधर बढ़ रहे हैं? हमने निर्यात में अच्छा किया है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण अच्छी चीज जो हमने की है वह सकल स्थिर पूंजी निर्माण (gross fixed capital formation)।'
उनका कहना है कि मोदी सरकार ने टैक्स बेस का दायरा बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किए हैं और कम आय वर्ग वालों को जिस तरह से वित्तीय गतिविधियों का अवसर दिया है, वह सफल साबित हुए हैं। अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण बढ़ने से देश के कारोबारी माहौल में चार चांद लग गया है और लोगों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ भी मिल रहे हैं, वित्तीय गतिविधियों से भी जुड़ रहे हैं।
जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड तोड़ रहे
कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट ने कुछ तत्वों को बहुत अहम माना है जैसे कि सप्लाई-साइड पॉलिसी रिफॉर्म्स। मतलब कॉर्पोरेट टैक्स करीब 26 फीसदी तक पहुंच गया है, अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण के चलते जीएसटी का कलेक्शन हर महीने 1.5 लाख करोड़ रुपए की दर से होने लगी है। रियल एस्टेट में भी अहम बदलाव हो रहे हैं। ऊपर से डिजिटलाइजेशन भी बड़े पैमाने पर हुए हैं।
भविष्य के लिए भी अच्छा संकेत
इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में भी देश जबर्दस्त तरक्की कर रहा है। एयरवेज, रेलवेज और रोडवेज सबका भारी विस्तार हो रहा है, जिससे देश को व्यापक आर्थिक लाभांश (macroeconomic dividends) मिल रहा है। सबसे बड़ी राहत की बात है कि मॉर्गन स्टेनली ने देश की मुद्रास्फीति के लिए यह भी अनुमान लगाया है कि यह 'सौम्य और कम अस्थिर' बना रहेगा। यानि देश की अर्थव्यस्था में आने वाले समय में भी रुकावट नजर नहीं आ रही है।
भारत के लिए अच्छी बात है कि यहां खपत के दायरे में भी विस्तार हो रहा है और देश विवेकपूर्ण खर्च को अपनाने की ओर तेजी से बढ़ता जा रहा है। (इनपुट-एएनआई)
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