पूर्वी लद्दाख में अब चीन को भारी पड़ेगा भारतीय सैनिकों से भिड़ना, जानिए क्यों खास है सेना की ये तैयारी
नई दिल्ली, 09 अगस्त। भारत और चीन के बीच जिस तरह से पिछले कुछ सालों से तनाव बढ़ा है उसके बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में अपनी सतर्कता को काफी बढ़ा दिया है और अब यहां टैंक रेजिमेंट को भी तैनात किया गया है। भारतीय सेना पिछले एक साल से पूर्वी लद्दाख में टैंकों की तैनाती को बड़ी संख्या में बढ़ा रही है। यही नहीं भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में चीन के खतरे को देखते हुए अपनी रणनीति में भी काफी बदलाव किया है और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में काफी सुधार किया है जिससे कि भारतीय सैनिक 14000 से 17000 फीट की ऊंचाई पर भी इन टैंक और हथियारों का बेहतर इस्तेमाल कर सके।
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चीन से निपटने की पुख्ता तैयारी
भारतीय सेना ने लद्दाख में टी-90 भीष्म और टी-72 अजय टैंकों की तैनाती बीएमपी सीरीज के इन्फैंट्री कॉम्बैट वेहिकल्स को भी यहां लाना शुरू कर दिया है। इन साजो-सामान को इतनी ऊंचाई पर दुर्गम हालात में पहुंचाने का काम सेना की ओर से लगातार किया जा रहा है। भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड की शुरुआत चीनी सैनिकों की किसी भी तरह की उकसाने वाली हरकत से निपटने के लिए किया है। दरअसल जिस तरह से पिछले साल चीनी सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख में उकसाने वाली कार्रवाई की उसके बाद दोनों देशों की सेना के बीच झड़प हुई जिसमे कई सैनिकों की जान भी चली गई। इस झड़प के बाद से ही भारत ने ऑपरेशन ब्लू लैपर्ड की शुरुआत की है।

माइनस 45 के तापमान में एक साल से डटे हैं सैनिक
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि हम पहले ही पूर्वी लद्दाख में इतनी ऊंचाई पर एक साल से अधिक का समय बिता चुके हैं, यहां का तापमान माइनस 45 डिग्री है। हमने अपनी एसओपी में भी बतालव किया है जिससे कि इतनी मुश्किल हालात में टैंक को ऑपरेट करने में कोई कठिनाई ना हो। गौर करने वाली बात है भारत और चीन की सेनाओं के बीच पैंगॉन्ग लेक और गोगरा हाइट्स के पास कुछ ठिकानों पर डिसइंगेजमेंट हुआ है, लेकिन बावजूद इसके दोनों ही देश की सेनाएं लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर बड़ी संख्या में तैनात हैं। भारतीय सेना ने भी लगातार अपनी स्थिति को यहां मजबूत करने का काम किया है, जिससे कि किसी भी संभावित चुनौती का सामना किया जा सके।

दुर्गम इलाकों में अभ्यास
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में पूर्वी लद्दाख में टैंकों की तैनाती है, माइनस 45 डिग्री के तापमान में इतनी ऊंचाई पर भी सैन्य अभ्यास जारी है। अहम बात यह है कि चीन की सीमा से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर ही भारतीय सैनिक यह अभ्यास कर रहे हैं। दुर्गम इलाकों में टैंक किस तरह से बेहतर काम करे इसके लिए भी भारतीय सेना लगातार पुख्ता तैयारी कर रही है, टैंक को पार्क करने की जगह तैयार की गई है, जिससे कि सर्दियों में टैंक खुले में ना खड़े रहे।

टैंकों का रखरखाव अहम
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि भीषण सर्दियों में इन टैंक के रबर और अन्य पुर्जों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचे इसका खयाल रखा जा रहा है। अगर हम इन टैंक का यहां बेहतर रखरखाव करते हैं तो इसका इस्तेमाल भी लंबे समय तक यहां कर सकते हैं। गौर करने वाली बात है कि फिंगर एरिया और गलवान घाटी में मई 2020 में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के बाद से ही भारतीय सेना ने अपनी टुकड़ियों की संख्या और हथियार-मशीन आदि की संख्या में काफी इजाफा किया है।












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