Whats App पर भारतीय सैनिकों के लिये ढेर सारे रेस्ट्रिक्शन
नई दिल्ली। शुक्रवार को कश्मीर के बारामूला के उरी सेक्टर में आर्मी कैंप पर जो हमला हुआ था, उसके बाद व्हाट्स एप पर एक मैसेज तेजी से सर्कुलेट हुआ। इस मैसेज के मुताबिक जूनियर ऑफिसर्स ने अपने सीनियर ऑफिसर्स पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए गए थे। गुरुवार को भारतीय सेना के ओर से इसी के मद्देनजर सोशल मीडिया के प्रयोग से जुड़ी नई गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं।

क्या हैं नई गाइडलाइंस
इंडियन आर्मी के फेसबुक पर बने पेज पर इन गाइडलाइंस का जिक्र किया गया है। गाइडलाइंस के मुताबिक
- सभी रैंक के पर्सनल के लिए सेना की ओर से सोशल मीडिया नीति को फिर से दोहराया जा रहा है।
- इंटरनेट का प्रयोग सिर्फ व्यक्तिगत ही रहना चाहिए।
- किसी भी स्थिति में कोई भी पर्सनल अपनी आफिशियल आईडेंटीटी को उजागर नहीं करेगा।
- रैंक, यूनिट, अप्वाइंटमेंट, प्लेस ऑफ ड्यूटी और अपने मूवमेंट के बारे में कोई भी जानकारी अपलोड नहीं होनी चाहिए।
- किसी भी तरह की ऑनलाइन पोलिंग, आर्म्ड फोर्सेज या फिर सरकार से जुड़े किसी भी कैंपेन से रहें दूर।
- ऑपरेशनल, प्रशासनिक मुद्दों, सेना की छवि खराब करने वाले मुद्दों से दूर रहें।
- सेना, डिफेंस मिनिस्ट्री और सरकार की नीतियों और गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर कमेंट करने से बचें।
- यूनिफॉर्म में फोटोग्राफ और ऐसा बैकग्राउंड जहां पर आर्मी के इंस्टॉलेशन या फिर उसके उपकरण नजर आ रहे हों अपलोड न हों।
- सैनिक ऐसे किसी भी ग्रुप को न तो क्रिएट करें और न ही उनके साथ शामिल हों जो धर्म, राजनीतिक संगठनों, फॉरेन मिलिट्री नेटवर्क या फिर किसी हेट ग्रुप से जुड़ें हों।
- ऐसे किसी भी मैसेज को सर्कुलेट और पोस्ट न करें जो सेना से जुड़ा हो और सेना पर प्रभाव डालता हो।
वेटरेंस भी रखें ध्यान
भारतीय सेना की ओर से बयान दिया गया है कि पिछले कुछ समय से सेना की छवि को दागदार करने की कोशिश की जा रही है। आधी हकीकत के आधार पर इस तरह के मैसेज को कुछ लोग पोस्ट कर रहे हैं जिनसे सेना का मनोबल कम हो रहा है। इस नई पॉलिसी के मुताबिक सर्विंग पर्सनल, वेटरेन और सोशल मीडिया यूजर्स किसी भी मैसेज को सर्कुलेट करने से पहले हर तथ्य की जांच कर लें।
क्या हुआ था पिछले दिनों
उरी में हुए आतंकी हमले के बाद व्हाट्स एप पर एक मैसेज को तेजी से सर्कुलेट किया गया था। इस मैसेज में एक जूनियर ऑफिसर का हवाला देते हुए कहा गया था कि अनतंनाग में हुई घटना के बाद वरिष्ठ अफसरों की ओर से उन्हें सख्त आदेश दिए गए हैं कि वह किसी भी तरह का कोई एक्शन लेते समय हर बात का ध्यान रखें। इस वजह से वह खुद को लाचार पाते हैं।
इसके अलावा एक और मैसेज तेजी से सर्कुलेट हुआ है जिसमें श्रीनगर में हुई पीएम नरेंद्र मोदी की रैली का हवाला दिया गया। इस मैसेज में कहा गया कि जिस तरह से पंडित जवाहर लाल नेहरु ने 50 के दशक में उस समय के सेना प्रमुख जनरल थिमैया के मुद्दे पर अपनी पीठ ठोंकी थी उसी तरह से मोदी ने भी बडगाम फायरिंग हादसे के बाद सेना के फैसले का क्रेडिट खुद को दे डाला।












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