22 जून को चीनी कमांडर से लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह की क्या बात हुई, सेना ने बताया
नई दिल्ली। सेना की तरफ से 22 जून को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के दूसरी तरफ मोल्डो में भारत और चीन के बीच हुई कोर कमांडर स्तर की वार्ता पर बयान जारी किया गया है। सेना ने कहा है कि मोल्डो में सोमवार को भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की वार्ता सकारात्मक रही है। छह जून की ही तरह सोमवार को दोनों देशों के आर्मी कमांडर्स के बीच हुई मीटिंग काफी लंबी चली थी।

सकारात्मक माहौल में हुई वार्ता
मंगलवार को सेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया, 'भारत और चीन के बीच मोल्डो में हुई कोर कमांडर स्तर की वार्ता सकारात्मक रही है। बातचीत एक सकारात्मक, आपसी सौहार्द और सृजनात्मक माहौल में हुई।' सेना ने आगे कहा है, 'पीछे हटने को लेकर भी आपसी सहमति बनी है। पूर्वी लद्दाख के सभी विवादित इलाकों से पीछे हटने को लेकर चर्चा हुई और उस पर एक समानता नजर आई। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की तरफ से इसे आगे बढ़ाया जाएगा।' इंडियन आर्मी की तरफ से चीन को स्पष्ट कर दिया गया था कि वह गलवान घाटी को छोड़कर चली जाए और यहां की यथास्थिति को बहाल किया जाए।

11 घंटे तक चली मीटिंग
यह मीटिंग सुबह 11:30 बजे शुरू होकर रात 10:15 मिनट तक चली। सूत्रों के मुताबिक पीएलए के सैनिक फिंगर एरिया पर मौजूद हैं। फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच चीनी गतिविधियों ने इंडियन आर्मी को परेशान कर दिया है। फिंगर 4 से 8 तक के इलाके को भारत अपनी सीमा में मानता है। लेकिन चीनी मिलिट्री के अधिकारी भारतीय जवानों को गश्त नहीं करने दे रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से भी इस पर बयान दिया गया है। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने विदेश मंत्रालय के हवाले से लिखा है कि सोमवार को हुई कोर कमांडर की मीटिंग 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद पहली मीटिंग थी। मीटिंग

फिंगर एरिया पर लाव-लश्कर के साथ चीनी जवान
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पैंगोग त्सो का फिंगर एरिया वह इलाका है जहां पर चीन की सेनाएं अड़ी हुई हैं। सोमवार को दोनों देशों के कमांडर्स के बीच जो मीटिंग हुई है, उसमें पैंगोग झील के उत्तरी किनारे पर स्थित फिंगर एरिया से भी पीछे हटने को लेकर सहमति बनी है। लेकिन जब तक चीन की सेनाएं फिंगर एरिया से पीछे नहीं हटती हैं तब तक सफलता तय नहीं मानी जा सकती हैं। पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच स्थायी तौर पर बंकर्स और ऑब्जर्वेशन पोस्ट बना ली है। सूत्रों की मानें तो फिंगर 8 से उनके बंकर्स और पोस्ट का हटाना डिसएंगेजमेंट की सबसे मुश्किल प्रक्रिया होगी। फिंगर एरिया में आठ चोटियां हैं और ये सभी पैंगोंग त्सो से साफ नजर आती हैं। ये फिंगर एरिया सरीजाप रेंज के तहत आता है।

तीन सेक्टर्स में बंटी भारत-चीन सीमा
भारत का मानना है कि चीन के साथ लगी एलएसी करीब 3,488 किलोमीटर की है, जबकि चीन का कहना है यह बस 2000 किलोमीटर तक ही है। एलएसी दोनों देशों के बीच वह रेखा है जो दोनों देशों की सीमाओं को अलग-अलग करती है। एलएसी तीन सेक्टर्स में बंटी हुई है जिसमें पहला है अरुणाचल प्रदेश से लेकर सिक्किम तक का हिस्सा, मध्य में आता है हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का हिस्सा और पश्चिम सेक्टर में आता है लद्दाख का भाग। दोनों देशों के बीच पूर्वी सेक्टर में मैक्मोहन रेखा है और यहीं पर स्थिति को लेकर विवाद है। भारत और चीन के बीच पूर्वी सेक्टर में जो एलएसी है, वहीं भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा भी है। लेकिन कुछ हिस्से जैसे लोंग्जू और एसाफिला तक ही यह सीमा है। मध्य क्षेत्र में भी एलएसी को लेकर विवाद है लेकिन संक्षिप्त में बॉर्डर बाराहोटी मैदान तक है।












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