जानिए कब-कब कौन-कौन से देशों मे हाइवे बन गया एयरफोर्स का रनवे
बंगलुरु। इंडियन एयरफोर्स ने नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई से देश के आठ मुख्य राजमार्गों को एयरफोर्स जेट्स और दूसरे एयरक्राफ्ट्स की लैंडिंग के लिए प्रयोग करने देने के लिए अनुरोध किया है।
अगर ऐसा हुआ तो किसी इमरजेंसी की स्थिति में पंजाब, राजस्थान, गुजरात में मौजूद राजमार्गों को इंडियन एयरफोर्स के लिए खोल दिया जाएगा। जुलाई में इंडियन एयरफोर्स ने यमुना एक्सप्रेस हाइवे पर मिराज-2000 फाइटर जेट की लैंडिंग कराई थी। इंडियन एयरफोर्स ने इस बबात राजमार्गों की हालत के बारे में भी अथॉरिटी से पूछा है।
क्या है हाइवे स्ट्रिप
- हाइपे स्ट्रिप या रोड रनवे को खासतौर पर मिलिट्री एयरक्राफ्ट की लैंडिंग के लिए तैयार किया जाता है।
- इमरजेंसी की हालत में यह रनवे मिलिट्री एयरबेस में तब्दील हो जाते हैं।
- युद्ध की हालत में एयरबेस के पूरी तरह से खत्म हो जाने पर यहां से ही एयरक्राफ्ट ऑपरेट होते हैं।
- पहली हाइवे स्ट्रिप को वर्ल्ड वॉर टू के दौरान निर्मित किया गया था।
- उस समय मोटरवेज को एयरक्राफ्ट की लैंडिंग के लिए बड़े पैमाने पर प्रयोग किया गया था।
- वहीं कोल्ड वॉर के दौर में भी जर्मनी में खासतौर पर इनका प्रयोग हुआ था।
- चीन, नॉर्थ कोरिया, स्वीडन, फिनलैंड, स्विटजरलैंड, पोलैंड और चेकोस्लोवाकिया में हाइवे को प्रयोग किया जा रहा है।
- यह हाइवे स्ट्रिप साधारणतौर पर दो से 3.5 किलोमीटर तक लंबी होती है।
- यह हाइवे स्ट्रिप मोटाई में ज्यादा होती है और इसका बेस ठोस कंक्रीट से तैयार होता है।
- एयरबेस के लिए प्रयोग के समय इसके पास ही एयरफील्ड तैयार कर ली जाती है।
- एयरक्राफ्ट लैंडिंग के लिए जरूरी स्थान को कोटोबार सिस्टम के जरिए नियंत्रित किया जाता है।
आगे की स्लाइड्स में देखिए कुछ और खास बातें।

भारत
जुलाई में यमुना एक्सप्रेस हाइवे पर मिराज-20000 की लैंडिंग कराई गई थी। देश के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी हाइवे को सैन्य मकसद के लिए प्रयोग किया गया।

पाकिस्तान
पाकिस्तान एयरफोर्स, पीएफए पेशावर से इस्लामाबाद और इस्लामाबाद से लाहौर दो मोटरवे या हाइवे को वर्ष 2000 में ही लैंडिंग के लिए प्रयोग कर लिया था। पाक ने उस समय एफ-7पी फाइटर जेट की लैंडिंग कराई थी।

तीन बार पाकिस्तान का सफल प्रयोग
इसके बाद उसने इस्लामाबाद से लाहौर तक जाने वाले हाइवे पर 2010 में सी-130 की लैंडिंग कराई। फिर उसी वर्ष यानी 2010 मे पाक ने एक एक्सरसाइज के दौरान एफ-7पी और मिराज की लैंडिंग कराई।

स्वीडन
स्वीडन ने 150 0 मीटर की स्ट्रिप का निर्माण वर्ष 1949 में शुरू किया था। फिर वर्ष 1967 छह दिनों तक चले युद्ध में इसका प्रयोग हुआ।

जर्मनी
सन 1945 में वर्ल्ड वॉर टू के दौरान जर्मनी में पहली हाइवे स्ट्रिप का निर्माण हुआ।

नाटो
नाटो ने एक्सरसाइज के दौरान इस तरह से एक हाइवे पर ए-10 थंडरबोल्ट टू एयरक्राफ्ट की लैंडिंग कराई गई थी।

24 से 48 घंटे में तैयार
किसी भी हाइवे स्ट्रिप या मोटर वे को 24 से 48 घंटों के अंदर एयरबेस में तब्दील कर लिया जाता है।

सी-130 जैसे एयरक्राफ्ट की भी लैंडिंग
नाटो ने जर्मनी के एक हाइवे ए-29 पर सी-130 जैसे भारी-भरकम एयरक्राफ्ट तक की लैंडिंग कराई है।

साउथ कोरिया
साउथ कोरिया ने अमेरिका के साथ जारी ज्वाइंट वॉर एक्सरसाइज के दौरान हाइवे को लैंडिंग स्ट्रिप की तरह प्रयोग किया और फेयरचाइल्ड सी-123के की सफल लैंडिंग करवाई।












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