कौन हैं भारत के वो दो रेल मंत्री? जिन्होंने दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी के चलते दिया था इस्तीफा
भारत के दो ऐसे रेल मंत्री हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हुए रेल हादसे को लेकर अपना पद छोड़ दिया था।

Coromandel Express Accident: ओडिशा के बालासोर जिले में बहानागा रेलवे स्टेशन के पास शुक्रवार देर शाम कोरोमंडल एक्सप्रेस की मालगाड़ी से जोरदार टक्कर हो गई। घटना में कोरोमंडल एक्सप्रेस के कई डिब्बे पटरी से उतर गए। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन अभी जारी है। इस हादसे ने भारतीय रेलवे की तमाम दुर्घटनाओं की एक बार फिर याद दिला दी।
इतिहास के पन्नों को पलटे तो उसमें यह भी साफ नजर आता है कि दो ऐसे रेल मंत्री भी रहे, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हुई रेल दुर्घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था। आइए पलटे हैं इतिहास के पन्ने...
लाल बहादुर शास्त्री ने 1956 में दिया था इस्तीफा
बात साल 1956 की है। जब नवंबर में तमिलनाडु में अरियालुर ट्रेन दुर्घटना घटित हुई थी। उस वक्त दुर्घटना के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए भारत के तीसरे रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री (13 मई 1952 से 7 दिसंबर 1956 तक) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस हादसे में 142 लोग मारे गए थे। वहीं, सर्वोच्च सत्यनिष्ठ व्यक्ति के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा इन्हें सम्मान प्राप्त है।
नीतीश कुमार 1999 में दिया था इस्तीफा
वहीं, भारत के 28वें रेल मंत्री नीतीश कुमार ने (19 मार्च 1998 से 5 अगस्त 1999 तक) असम में अगस्त 1999 में गैसल ट्रेन दुर्घटना के लिए नैतिक आधार पर अपना पद छोड़ दिया था। इस हादसे में 290 लोगों की जान गई थी।
ममता बनर्जी का इस्तीफा हुआ था खारिज
वहीं, साल 2000 में दो ट्रेन दुर्घटनाए हुईं। उस वक्त रेल मंत्री रहीं ममता बनर्जी ने अपने इस्तीफा के पेशकश की। लेकिन, उस वक्त प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने उसे खारिज कर दिया था। वहीं, साल 2016 में पटना-इंदौर एक्सप्रेस के 14 डिब्बे कानपुर के पास पटरी से उतरे। इसमें 150 लोगों की मौत हुई थी। उस वक्त रेल मंत्री रहे सुरेश प्रभु ने भी इस्तीफे की पेशकश की थी। लेकिन, मंजूर नहीं हुआ।












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