यरुशलम पर अमेरिकी फैसले से भारत ने खुद को किया अलग
नई दिल्ली। अमेरिका की ओर से यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने पर भारत ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा है कि फिलीस्तीन को लेकर उसकी स्वतंत्र नीति बरकरार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने आज कहा कि फिलीस्तीन पर भारत की स्थिति स्वतंत्र और सुसंगत है। यह हमारे विचारों और रुचियों का आकार है, जिसे किसी भी तीसरे देश द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है। भारत ने खुद को अमेरिका के फैसले से अलग करते हुआ कहा कि इसराइल की राजधानी के रूप में इस विषय पर स्वतंत्र रुख होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बुधवार को की गई घोषणा के बाद, अमेरिका पूरे यरूशलेम पर इजराइली संप्रभुता को मान्यता देने वाला पहला देश बन गया था।अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ऐसा नहीं मानता-इसकी स्थिति को वार्ता में हल किया जाना चाहिए। किसी भी देश के पास यरूशलम में उसके दूतावास नहीं हैं। भारत दुनिया का पहला गैर-अरब मुल्क है जिसने फिलीस्तीन को मान्यता दी है।

वहीं भारत के रुख पर जम्मू और कश्मीर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा भारत की इच्छाशक्ति कम हो गई है। उन्होंने ट्वीटर पर लिखा कि- पूर्व में भारत की ओर से ऐसे कदमों की सख्त निंदा की गई है। बता दें कि साल 2016 में चुनाव प्रचार के दौरान डॉनल्ड ट्रंप ने वादा किया था कि वो यरुशलम को इजरायल की राजधानी का दर्जा देंगे।
भारत ने परंपरागत रूप से फिलिस्तीन का समर्थन किया और 1992 में इजरायल के साथ राजनयिक संबंध खोले जब दोनों पक्ष अमेरिका के तहत में शांति वार्ता के लिए एक साथ आए। वहीं इस घोषणा के बाद इंटेलीजेंस ब्यूरो ने भारत के कई हिस्सों में अलर्ट जारी किया है। इंटेलीजेंस ब्यूरो ने भारत में इजराइली दूतावास की सुरक्षा बढ़ाने को कहा है। साथ ही उन इलाकों में सुरक्षा कड़ी करने को कहा गया हैं जहां इजराइली पर्यटक काफी संख्या में आते हैं।












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