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Coronavirus: फिर से लॉकडाउन की आशंका देख अपने-अपने गांव वापस लौटने लगे प्रवासी मजदूर

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नई दिल्‍ली, 15 अप्रैल: देश में कोरोना का कहर और 'क्रूर' हो गया है। संक्रमित मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ती जा रही है। सबसे खराब मामला महाराष्‍ट्र उसकी राजधानी मुंबई का है। वहां आंशिक लॉकडाउन लगा हुआ है। एक बार फिर मार्च 2020 में देश में जैसा नजारा था वैसा ही देखने को मिल रहा है। प्रवासी मजदूरों को डर है कि बेकाबू होते कोरोना के दूसरे लहर में फिर से देश में लॉकडाउन का ऐलान हो सकता है इसलिए वो फिर अपने गांव की तरफ पलायन करने लगे हैं। मुंबई से जो ट्रेने यूपी और बिहार जा रही हैं खचाखच भरी हुई हैं।

Coronavirus: फिर से लॉकडाउन की आशंका देख अपने-अपने गांव वापस लौटने लगे प्रवासी मजदूर
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    आरपीएफ के सुरक्षाकर्मी संजय कुमार ने बताया कि स्‍टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं है। लोग शहर छोड़कर जा रहे हैं क्‍योंकि उन्‍हें फिर से लॉकडाउन का डर सता रहा है। मुंबई में एक फैक्‍ट्री में टाइल्‍स काटने का काम करने वाले ललित सिंह मुंबई से उत्तराखंड जाने के लिए अपनी पत्‍नी और 5 साल के बच्‍चे को लेकर खचाखच भरी ट्रेन में सवार थे। उन्‍हें अपने गांव पहुंचने के लिए 20 घंटे से अधिक समय की यात्रा करनी थी। उन्‍होंने बताया कि पिछले साल मार्च में जब काम मिलना बंद हो गया तो वापस घर लौट आए थे। उसके बाद जनवरी में जब हालात सही हुए तो मालिक ने टिकट भेजकर ललित को फिर काम पर वापस बुलाया। ललित ने बताया कि फिर से वायरस ने पलटवार किया है और काम बंद है तो घर वापस जाना मजबूरी है।

    वहीं उत्तर प्रदेश के लिए ट्रेन पकड़ने पहुंचे एक युवक ने कहा कि वो दोबारा उस दर्द को नहीं झेलना चाहते जो पिछले लॉकडाउन के दौरान उन्‍होंने सहा है। उसने बताया कि राज्य में कर्फ्यू लगने के बाद उसके पास करने को कुछ नहीं बचा है अगर काम नहीं होगा तो हम खाएंगे क्या इसलिए हम जल्द से जल्द गांव वापस लौट जाना चाहते हैं। ऐसे ही कई प्रवासी मजदूर हैं जो लॉकडाउन और ट्रेन बंद होने की आशंका से घर वापस लौट रहे हैं। ऐसा ही हाल दिल्‍ली का है। यहां के रेलवे स्‍टेशनों पर भारी संख्‍या में प्रवासी मजदूर अपने अपने गृह राज्‍य जाने के लिए पहुंचे हैं। उन्‍हें भी लॉकडाउन का डर सता रहा है। उनका कहना है कि अगर लॉकडाउन जैसी स्थिति बनती है तो वो यहां फंसना नहीं चाहते हैं।

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    English summary
    As Covid-19 roars back in India, migrant workers who had just started to resettle in the cities they left during last year’s outbreak are packing up to return to their villages again.
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