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Rafale Deal India France: 114 राफेल खरीदने की तैयारी में भारत, इसी महीने फाइनल होगी डील, पाकि-चीन के उड़े होश

Rafale Deal India France: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। फरवरी 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक पहले, रक्षा मंत्रालय 114 राफेल लड़ाकू विमानों की ऐतिहासिक खरीद को मंजूरी देने की तैयारी में है।

लगभग 3.2 लाख करोड़ रुपये का यह मेगा-प्रोजेक्ट भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता को मजबूती प्रदान करने और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को गति देने के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। चीन और पाकिस्तान की दोहरी चुनौतियों के बीच, यह सौदा भारत की हवाई संप्रभुता सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

Rafale Deal India France

राफेल डील और 'मेक इन इंडिया' का संकल्प

इस प्रस्तावित सौदे की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वदेशीकरण है। 114 विमानों में से लगभग 80 प्रतिशत का निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिसमें डसॉल्ट एविएशन भारतीय निजी कंपनियों के साथ सहयोग करेगी। योजना के अनुसार, 18 विमान 'फ्लाई-अवे' स्थिति में सीधे फ्रांस से आएंगे, जबकि शेष का निर्माण घरेलू स्तर पर होगा। इन विमानों में 60 फीसदी स्वदेशी तकनीक का उपयोग करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे न केवल रोजगार पैदा होंगे बल्कि भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक पहचान मिलेगी।

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वायुसेना की मारक क्षमता में भारी वृद्धि

भारतीय वायुसेना वर्तमान में 30 स्क्वाड्रन के साथ काम कर रही है, जो स्वीकृत 42 की संख्या से काफी कम है। इस डील के तहत वायुसेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर राफेल मिलेंगे। जब यह सौदा पूरा हो जाएगा, तो भारत के पास कुल 150 राफेल विमानों का विशाल बेड़ा होगा। ये 4.5 जेनरेशन के लड़ाकू विमान 'मेटियोर' और 'स्कैल्प' जैसी घातक मिसाइलों से लैस हैं, जो दुश्मन के विमानों को सीमा पार से ही मार गिराने में सक्षम हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक चुनौतियां

पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते सैन्य गठबंधन ने दक्षिण एशिया में सुरक्षा समीकरण बदल दिए हैं। चीन की विस्तारवादी नीति और पाकिस्तान की सीमा पर सक्रियता के बीच राफेल एक मजबूत रक्षा कवच प्रदान करता है। चूँकि भारत के स्वदेशी 'तेजस' कार्यक्रम में इंजनों की आपूर्ति के कारण देरी हो रही है और पांचवीं पीढ़ी के विमान (AMCA) अभी विकास के चरण में हैं, इसलिए राफेल की तत्काल आवश्यकता महसूस की गई है ताकि किसी भी आकस्मिक सुरक्षा खतरे से निपटा जा सके।

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मैक्रों की यात्रा और भविष्य की राह

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की आगामी बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने की पूरी संभावना है। राष्ट्रपति मैक्रों की 18-20 फरवरी की यात्रा के दौरान इस सौदे पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी सैन्य गतिविधियों ने पहले ही राफेल की तकनीकी श्रेष्ठता सिद्ध कर दी है। यह समझौता न केवल भारत की सैन्य ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में तकनीकी हस्तांतरण के जरिए भारत को विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की नींव भी रखेगा।

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