India-China: चीन से नहीं डरेगा भारत, चीनी बॉर्डर पर हर हाल में पूरा होगा इन दो सड़कों का काम
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी तनाव का असर पूर्वी लद्दाख में बन रही दो अहम सड़कों के निर्माण कार्य पर नहीं पड़ा है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) की तरफ से इस सड़क का काम जारी है। पांच मई से ही भारत और चीन के बीच टकराव की स्थिति है और हाल-फिलहाल इसका कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। दो सीनियर ऑफिसर्स के हवाले से इंग्लिश डेली हिन्दुस्तान टाइम्स ने बताया है कि एक अहम इलाके को बाकी हिस्सों से जोड़ने के लिए अग्रिम इलाके (फॉरवर्ड एरिया) जिसे मिलिट्री सब-सेक्टर नॉर्थ (एसएसएन) कहती है, वहां दो सड़कों को निर्माण कार्य जारी है।

सेना के लिए मददगार साबित होगी सड़क
पहली सड़क रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण दारबुक-श्योक-दौलब बेग ओल्डी (डीएस-डीबीओ) रोड है और दूसरी सड़क को ससोमा से सासेर ला तक तैयार किया जा रहा है। दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड लद्दाख के एकदम किनारे पर स्थित इलाके को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ती है। दूसरी सड़क डीबीओ के लिए एक विकल्प के तौर पर है और काराकोरम पास के करीब स्थित है। ससोमा-सासेर ला रोड डीबीओ के दक्षिण-पश्चिम में है। दोनों ही प्रोजेक्ट्स बीआरओ की तरफ से पूरे किए जा रहे हैं। इस समय करीब 11,815 मजदूर लद्दाख में चीन बॉर्डर के करीब लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सड़कों के निर्माण कार्यों में लगे हुए हैं।

BRO पर 61 सड़कों का जिम्मा
पिछले वर्ष रक्षा मंत्रालय की तरफ से संसद की स्टैंडिंग कमेटी को बताया गया था कि ससोमा-सासेर ला सड़क एक चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट है। सरकार के मुताबिक इस प्रोजेक्ट की विलक्षणताएं इसे एक मुश्किल प्रोजेक्ट बनाती हैं। सड़क निर्माण में सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआआरआई) की मदद भी ली गई है। सरकार के मुताबिक सीआरआरआई की तरफ से की गई सिफारिशों के बाद एक प्रस्ताव का निर्माण किया जा रहा है। बॉर्डर पर जारी टकराव के बीच ही बीआरओ पर 61 रणनीतिक सड़कों को पूरी करने की जिम्मेदारी है।

चीन ने तैनात किए 5,000 जवान
बीआरओ को दिसंबर 2022 तक इन सड़कों जिसमें से कुछ चीन बॉर्डर के करीब हैं, उन्हें पूरा करना है। इसका मकसद सेना को फॉरवर्ड इलाकों में मदद पहुंचाना है। चीन की तरफ से करीब 5,000 जवानों को एलएसी पर रवाना किया गया है। साथ ही उसने लद्दाख सेक्टर में मौजूद बॉर्डर पर टैंक्स और तोप भी तैनात कर दी हैं। इसके बाद भारत की तरफ से रि-इनफोर्समेंट भेजी गई है। भारत और चीन के बीच दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में तैयार हो रही सड़क चीन के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है। इसी वजह से चीन का पारा कोरोना वायरस महामारी के बीच इतना हाई है।

साल 2000 में लॉन्च हुआ प्रोजेक्ट
साल 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार पहली सरकार थी जिसने लेह से डीबीओ को जोड़ने वाली सड़क निर्माण की योजना का ऐलान किया था। सड़क पर साल 2012 तक 320 करोड़ की लागत का अनुमान लगाया गया था। इस प्रोजेक्ट पर प्रधानमंत्री ऑफिस व्यक्तिगत तौर पर नजररखता आ रहा है। बीआरओ ने श्योक गांव के करीब सड़क का निर्माण कार्य सबसे पहले शुरू किया था। यह सड़क श्योक नदी के करीब से बहती है और वी के आकार में है। श्योक घाटी लेह से पश्चिम में पड़ती है और दक्षिण में श्योक वैली पैंगोंग झील से इसी सड़क के जरिए जुड़ी हुई है। बीआरओ की सड़क श्योक नदी के किनारों को पार करती हुई नदी के पश्चिम तक जाती है।
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तेजी से हो सकेगी जवानों की तैनाती
यह सड़क ना केवल जवानों की तैनाती तेजी से सुनिश्चित करती है बल्कि यही एक रास्ता है जहां से एएलजी यानी एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड तक पहुंचा जा सकता है। यहां पर सी-130जे जैसा भारी एयरक्राफ्ट भी आसानी से लैंड कर सकता है। इस सड़क की एक शाखा गलवान घाटी तक भी जाती हैं। भारत इस सड़का को हमेशा से ही सुरक्षित करना चाहता है। इस हिस्से में तापमान सर्दियों में -55 डिग्री से नीचे तक चला जाता है। न तो इस हिस्से पर जंगली जानवर हैं और न ही किसी प्रकार के पेड़ पौधे।












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