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LAC पर PLA की आक्रामकता में कमी स्थाई है या चीन की कोई नई चाल

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नई दिल्ली- पिछले कुछ दिनों से पूर्वी लद्दाख के उन इलाकों में चीन की आक्रामकता में कमी महसूस की जा रही है, जहां 29-30 अगस्त को भारतीय सेना ने पीएलए को नाकाम कर महत्वपूर्ण चोटियों पर कब्जा कर लिया था। लेकिन, पड़ोसी मुल्क छल की नीति अपनाकर भारत को इतने सारे घाव दे चुका है कि अब उसपर विश्वास करना आसान नहीं रह गया है। एलएसी पर चीन की गतिविधियों में आई कुछ कमी मास्को में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत के बाद देखी जा रही है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या चीन वाकई सुधर गया है या फिर इसके पीछे उसके किसी और भयानक साजिश का संकेत है।

चीन पर कैसे करें भरोसा

चीन पर कैसे करें भरोसा

इसी हफ्ते पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच मिलिट्री कमांडर स्तर पर बात होने की संभावना है। इस बातचीत का आधार वही रहेगा, जो विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चाइनीज समकक्ष वांग यी के बीच मास्को में तय की गई थी। मिलिट्री कमांडर स्तर की बातचीत का तात्कालिक मकसद उन इलाकों से जवानों की तैनाती घटाना है, जहां दोनों देशों के जवान कुछ सौ मीटर की दूरी पर एक-दूसरे के सामने हैं, जिस वजह से हर वक्त हालात विस्फोटक बनी हुई है। लेकिन, चीन की ओर से हुई बार-बार की धोखाबाजी ने भरोसा इतना घटा रखा है कि सेना को उच्चस्तरीय अलर्ट पर रखा गया है। सेना कोई भी जोखिम लेने को तैयार नहीं है। सर्विलांस अपने चरम स्तर पर है और पूरे ठंड में भी बॉर्डर आउटपोस्ट पर डटे रहने की योजना तैयार की जा चुकी है। वैसे आर्मी कमांडर स्तर की बातचीत से यह भी पता चल जाएगा कि कूटनीतिक स्तर पर चीन जो कुछ मान लेता है, जमीन पर पीएलए उसके लिए कितनी तैयार होती है।

एलएसी पर क्यों शांत हुआ है ड्रैगन ?

एलएसी पर क्यों शांत हुआ है ड्रैगन ?

प्राथमिकता इस बात पर दी जा रही है कि चुशूल सब-सेक्टर और फिंगर एरिया में कई स्थानों पर सबसे पहले तनाव घटाने के कदम उठाए जाएं। इसके लिए सेना ने साफ कर दिया है कि सैनिकों के जमावड़े को कम करने की प्रक्रिया तभी पूरी हो सकती है, जब चीन के सैनिक अप्रैल से पहले वाली जगहों पर लौट जाएं और उन्होंने एलएसी के पास जो फॉर्वर्ड लोकेशन पर अड्डा जमा रखा है उसे भी खाली कर दें। क्योंकि, भरोसा इतना टूट चुका है कि चीन पर जरा भी यकीन नहीं रह गया है। आशंका है कि कहीं एकबार फिर से वो दक्षिणी पैंगोंग के इलाकों की महत्वपूर्ण चोटियों पर कब्जे की कोशिश ना करे। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने दिल्ली में बताया कि 'बीते दो दिनों से चीन की ओर से कोई आक्रामाक युद्धाभ्यास जैसी स्थिति नहीं देखी गई है, लेकिन विश्वास की समस्या बरकरार है, क्योंकि चीन के साथ कूटनीतिक बातचीत और उसके सैनिकों की सीमा पर गतिविधियों में स्पष्ट अंतर नजर आता है।'

मौके की तलाश में बैठा हो सकता है चीन!

मौके की तलाश में बैठा हो सकता है चीन!

सिक्किम के डोकलाम से लेकर पूर्वी लद्दाख तक में पिछले कुछ वर्षों से जो कुछ दिखा है, उसके बाद चीन से हर वक्त सतर्क रहने में ही समझदारी है। खासकर अमेरिकी अखबार न्यूजवीक के उस दावे ने तो और सचेत कर दिया है कि चीन भारत के साथ सीमा पर जो माहौल तैयार कर रहा है, वह सब किसी और के इशारे पर नहीं खुद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इशारे पर हो रहा है। 15 जून की रात गलवान घाटी की खूनी झड़प उसका सबसे ताजा उदाहरण है। उसी तरह की साजिश तो 29 अगस्त की रात दक्षिणी पैंगोंग की ऊंची चोटियों पर भी रची गई थी, लेकिन इसमें चीन भारत को धोखा दे पाने में पूरी तरह नाकाम रह गया था। इसीलिए अगर चुशूल सेक्टर में पैंगोंग के दक्षिणी किनारे से लेकर रियांग ला, रेचिन ला दर्रों के अलावा स्पंगुर गैप पर आज भारत की स्थिति मजबूत हो चुकी है तो चीन की चुप्पी में एक और खौफनाक साजिश भी छिपी हो सकती है- उनपर कब्जा करने के लिए अचानक धावा बोलने की!

तनाव का मौजूदा केंद्र चुशूल सेक्टर

तनाव का मौजूदा केंद्र चुशूल सेक्टर

गलवान घाटी के बाद इस वक्त चुशूल सेक्टर ही युद्ध जैसे हालात का केंद्र बना हुआ है। 10,000 से ज्यादा पीएलए के जवान सीमा के करीब मौजूद हैं। उनके साथ बख्तरबंद गाड़ियों और हल्के टैंक मौजूद हैं और बैकअप के लिए तोपखाने की भी बड़ी खेप मंगा ली गई है। चीन की ओर से भारतीय सैनिकों को फॉर्वर्ड पोस्ट से पीछे करने की कोशिशें हो चुकी हैं और वॉर्निंग शॉट्स फायर किए गए हैं। दो जगहों पर पीएलए की बख्तरबंद गाड़ियों ने भी घुसपैठ की कोशिश की थी, जो भारतीय टैंको की मौजूदगी देखकर भाग खड़े हुए। लद्दाख में एलएसी की जानकारी रखने वाले अधिकारियों का कहना है कि संघर्ष वाली जगह पर भारत और चीन की सेनाएं आंखों में आंखें डालकर तैनात रहने वाली स्थिति में हैं।

इसे भी पढ़ें- गलवान की घटना के पीछे था कौन, अमेरिकी अखबार का बड़ा दावा

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English summary
India China tension:Reduction in aggression of PLA on LAC is permanent or any new move by China
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