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India-China: साल 2008 में सरकारी मंजूरी के बिना IAF ने इस तरह से दौलत बेग ओल्‍डी पर लैंड कराया AN-32

नई दिल्‍ली। साल 2008 और महीना था मई का, इसी समय लद्दाख के दौलत बेग ओल्‍डी (डीबीओ) पर इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट एएन-32 ने सफल लैंडिंग की और इतिहास रच दिया। 16,614 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस एयरबेस पर आईएएफ के एयरक्राफ्ट की लैंडिंग आसान बात नहीं थी। उस समय एयर मार्शल (रिटायर्ड) प्रणब कुमार बारबोरा वेस्‍टर्न एयरकमांड के चीफ थे, उन्‍होंने सरकार की मंजूरी के बिना इस एयरक्राफ्ट की लैंडिंग की थी। एयर मार्शल बारबोरा ने इकोनॉमिक टाइम्‍स को दिए इंटरव्‍यू में इस बात से पर्दा उठाया है कि उन्‍होंने क्‍यों सरकार से चीन के बॉर्डर से सटी इस एयरस्ट्रिप को एक्टिवेट करने के लिए सरकार की मंजूरी लेना जरूरी नहीं समझा था।

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    सेना की मदद के लिए एक्टिवेट एयरबेस

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    इकोनॉमिक टाइम्‍स के मुताबिक यह पूरा मिशन एक सीक्रेट मिशन था क्‍योंकि आईएएफ के पास किसी तरह का कोई लिखित आदेश नहीं था। यहां तक तत्‍कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। सन् 1965 के बाद आईएएफ का कोई एयरक्राफ्ट यहां पर उतरा था। एयर मार्शल बारबोरा ने बताया है कि सरकार की मंजूरी के बिना कैसे उन्‍होंने यह फैसला किया कि एयरक्राफ्ट को डीबीओ पर लैंड कराया जाएगा? एयरमार्शल बाराबोरा के शब्‍दों में, 'मैंने साल 2008 में वेस्‍टर्न एयर कमांड के कमांडर-इन-चीफ का जिम्‍मा संभाला था और उसी समय से इस पर काम शुरू हो गया था। लद्दाख से लेकर राजस्‍थान तक की वायुसीमा वेस्‍टर्न एयर कमांड के तहत आती है।'

    1965 में बंद कर दी गई DBO पर लैंडिंग

    1965 में बंद कर दी गई DBO पर लैंडिंग

    एयर मार्शल बारबोरा के शब्‍दों में, 'मेरे पास करीब 60 एयरफोर्स स्‍टेशनों का जिम्‍मा था। मैंने इस बात को परखा कि कैसे मुश्किल जगहों पर तैनात हमारी सेना और अर्धसैनिक बलों को आईएएफ सामान और बाकी जरूरी चीजों से ज्‍यादा से ज्‍यादा मदद कर सकती है तो दौलत बेग ओल्‍डी का ध्‍यान आया।' उन्‍होंने बताया कि वायुसेना ने लद्दाख और दूसरे एडवांस लैंडिंग ग्राउंड्स के लिए योजना भी बनाई थी। लेकिन दौलत बेग ओल्‍डी कई वजहों से आईएएफ की प्राथमिकता लिस्‍ट में आ गया था। पहली वजह थी कि यह दुनिया में सबसे ज्‍यादा ऊंचाई पर स्थित एयरबेस है और दूसरी वजह थी कि काराकोरम पास से इसकी दूरी बस कुछ ही किलोमीटर है। दौलत बेग ओल्‍डी पर एयरस्ट्रिप का निर्माण साल 1962 में चुका था और इसका मकसद पाकिस्‍तान को रोकना और चीनी घुसपैठ पर लगाम लगाना था। लेकिन साल 1965 में इस पर लैंडिंग बंद कर दी गई थी। हेलीकॉप्‍टर्स जाते थे लेकिन वह सिर्फ एयरड्रॉप करके वापस आ जाते।

    सरकार से मंजूरी न मिलने की आशंका

    सरकार से मंजूरी न मिलने की आशंका

    एयरमार्शल बारबोरा के मुताबिक उन्‍होंने बिना किसी लिखित आदेश के डीबीओ एयर स्ट्रिप को सक्रिय करने का फैसला किया था। उन्‍होंने तय किया कि इस मिशन को लेकर कोई भी फाइल तैयार नहीं होगी और कुछ भी लिखित में नहीं होगा। उन्‍होंने इंटरव्‍यू में बताया है कि सरकार से आईएएफ को मंजूरी न मिलने की आशंका थी और इसलिए ही उन्‍होंने सेना में अपने समकक्षों से इस पर बात की। साथ ही एयरफोर्स के कुछ ऑफिसर्स को चुना और एयरस्ट्रिप पर जल्‍द से जल्‍द एक स्‍टडी कराई गई। इस स्‍टडी का मकसद वहां के मौसम और जरूरी हालातों को परखना था।

    मिशन से पहले पूरा किया गया अध्‍ययन

    मिशन से पहले पूरा किया गया अध्‍ययन

    हवाई पट्टी 43 सालों से ऐसे ही पड़ी थी और इसलिए ही एक अध्‍ययन जरूरी थी। एयर मार्शल बारबोरा को एयरस्ट्रिप से जुड़ी जरूरी जानकारियां जैसे उस पर कोई क्रैक नहीं है, मिल गईं, उन्‍होंने कुछ और जरूरी बातों को परखा। उन्‍होंने बताया है कि एएन-32 14,000 फीट से ज्‍यादा की ऊंचाई पर लैंड नहीं कर सकता। लैंडिंग से ज्‍यादा इतनी ऊंचाई पर इसे टेक ऑफ करने में काफी समस्‍यांए आती हैं। आईएएफ ने इस मिशन के लिए एएन-32 के साथ स्‍पेशल ट्रेनिंग को पूरा किया। टायर और बाकी जरूरी बातों को भी परखा गया। डीबीओ 16, 614 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

    लैंडिंग के बाद मिली रक्षा मंत्री को खबर

    लैंडिंग के बाद मिली रक्षा मंत्री को खबर

    31 मई 2008 को एयर मार्शल बारबोरा ने तत्‍कालीन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड) फली होमी मेजर और सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) दीपक कपूर से बात की। इस बातचीत में उन्‍हें मौखिक अनुमति मिली। इसके अलावा एयरमार्शल ने उस समय के उप-सेना प्रमुख प्रदीप नाइक को इस बारे में बताया था। रक्षा मंत्री एंटोनी को लैडिंग के बाद ही बताया गया था। उन्‍होंने बताया कि मिशन वाले दिन एयरक्राफ्ट में पांच लोग सवार हुए- दो एयरफोर्स पायलट, एक नेविगेटर, एक गनर और खुद एयरमार्शल बारबोरा।

    आईएएफ के कदम हैरान रह गया चीन

    आईएएफ के कदम हैरान रह गया चीन

    चंडीगढ़ से एयरक्राफ्ट ने टेक ऑफ किया और सुबह नौ बजे से कुछ मिनट पहले एएन-32 ने दौलत बेग ओल्‍डी पर सफल लैंडिंग की। इस पूरे मिशन को सरकार से इस तरह आईएएफ ने सीक्रेट रखा था। एयरमार्शल बारबोरा के मुताबिक आईएएफ ने वह करके दिखा दिया था जिसमें वह सक्षम है। चीन, आईएएफ के इस कदम से हैरान था। इसके बाद साल 2013 में आईएएफ ने चार इंजन वाले एयरक्राफ्ट सी-130 को दौलत बेग ओल्‍डी पर लैंड कराया था। एयरमार्शल बारबोरा की पत्‍नी को किसी तरह से इस बारे में पता लग गया था लेकिन मिशन में शामिल बाकी ऑफिसर्स की पत्नियों को भी इस बारे में कुछ नहीं बताया गया था।

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