इतनी जल्दी LAC पर सबकुछ सामान्य नहीं होगा, चीनी जवानों के पीछे हटने में लगेगा काफी समय
नई दिल्ली। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं को पीछे हटने में अभी लंबा समय लगेगा। इंग्लिश डेली हिन्दुस्तान टाइम्स ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि भारतीय और चीनी जवानों का टकराव वाले बिंदुओं से पीछे हटना एक लंबी प्रक्रिया है और जितनी जल्दी लोग सोच रहे हैं उतनी जल्दी यह संभव नहीं हो सकती। यह बात उन्होंने उस समय कही जब गुरुवार को कुछ ऐसी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि गलवान घाटी से दोनों देशों की सेनाएं कुछ पीछे हटी हैं।
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अभी पीछे नहीं हटी हैं सेनांए
सूत्रों की मानें तो अभी तक सेनाओं ने पीछे हटना शुरू नहीं किया है। एक अधिकारी ने कहा, 'सह बिल्कुल किसी टेस्ट मैच की तरह है न कि कोई टी-20 जहां सबकुछ कुछ घंटों में खत्म हो जाएगा।' अधिकारी ने इसे एक जटिल प्रक्रिया करार दिया। गुरुवार को खबर आई थी कि भारत और चीन की सेना के बीच 15 जून को गलवान घाटी में जहां हिंसा हुई थी, वहां से अब पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों का पीछे हटना शुरू हो गया है। सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि चीनी सेना ने इस क्षेत्र में अपने जवानों की संख्या में कुछ कमी की है। 15/16 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसा में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे।
22 जून को हुई थी कमांडर लेवल वार्ता
जब 22 जून को मोल्डो में भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई थी। इसके बाद 24 जून को दोनों देश के बीच राजनयिक स्तर की वार्ता हुई। सूत्रों की मानें तो फिलहाल अतिरिक्त चीनी जवान सिर्फ गलवान घाटी में ही पीछे हट रहे हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने टेंट जैसा ढांचा फिर से पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 14 के करीब तैयार कर लिया है। यहीं पर 15 जून की रात भारतीय सेना और पीएलए के बीच हिंसक टकराव हुआ था। अखबार के मुताबिक यह ढांचा कमांडर्स के बीच हुई वार्ता के बाद आया है। हालांकि कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यह इंडियन आर्मी का टेंट है। नई सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से भी कुछ एक्सपर्ट यही कह रहे हैं।












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