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India-China tension: जानें 1996 में चीन के साथ साइन हुआ था कौन सा एग्रीमेंट जिसकी वजह से गलवान में भारतीय जवानों को बरतना पड़ा संयम!

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नई दिल्‍ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर सवाल उठाए और पूछा कि आखिर 15 जून को गलवान घाटी में जब चीन के साथ भारतीय सेना के जवानों की झड़प हो रही थी तो सैनिकों के पास हथियार क्‍यों नहीं थे? राहुल के सवाल का जवाब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिया है। विदेश मंत्री ने उन्‍हें बताया है कि इसकी वजह साल 1996 में हुआ एक समझौता था जिसकी वजह से सैनिकों के पास हथियार नहीं थे। पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) वीपी मलिक ने एक चैनल को दिए इंटरव्‍यू में कहा है कि 1996 में जो एग्रीमेंट भारत और चीन के बीच हुआ था वह आजादी के बाद मिलिट्री फील्‍ड में हुआ सबसे अहम एग्रीमेंट था। क्‍या था वह एग्रीमेंट और क्‍यों इस एग्रीमेंट के तहत हथियारों का प्रयोग नहीं किया जा सकता है, जानने के लिए पढें यह रिपोर्ट।

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मुलायम सिंह यादव थे रक्षा मंत्री

मुलायम सिंह यादव थे रक्षा मंत्री

नवंबर 1996 में नई दिल्‍ली में चीन और भारत के बीच यह समझौता साइन हुआ था। उस समय मुलायम सिंह यादव रक्षा मंत्री थे और केंद्र में तीसरे मोर्चे की सरकार थी जिसे कांग्रेस का समर्थन हासिल था। जो समझौता भारत और चीन के बीच हुआ था, उसकी सारी जानकारी यूनाइटेड नेशंस की वेबसाइट पर मौजूद है। इस समझौते के तहत एलएसी के इलाकों पर शांति कायम रखने के लिए आपसी विश्‍वास को बरकरार रखने वाले उपायों को आगे बढ़ाना था। इस समझौते में 12 आर्टिकल थे और इनमें से ही एक आर्टिकल के तहत दोनों देशों की सेनाओं के लिए आपसी संयम और दो किलोमीटर तक की दूरी पर हथियार प्रयोग न करने का नियम बनाया गया था। भारत ने तो इस नियम का पालन किया और तकनीकी तौर पर चीनी सेना ने भी किया लेकिन जब हम समझौते को पूरा पढ़ते हैं तो समझ आता है कि चीनी सेना ने भारत के साथ धोखा किया।

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    सैन्‍य क्षमताओं का प्रयोग न करने का नियम

    सैन्‍य क्षमताओं का प्रयोग न करने का नियम

    इस एग्रीमेंट के पहले आर्टिकल के तहत, 'कोई भी पक्ष अपनी सैन्‍य क्षमताओं का प्रयोग दूसरे पक्ष पर नहीं करेगा। किसी भी पक्ष की तरफ से हथियारों के साथ सेनाओं को वास्‍तविक नियंत्रण रेखा के आसपास के इलाकों में तैनात नहीं किया जाएगा। अपनी सैन्‍य ताकत का प्रयोग दूसरे पक्ष पर हमला करने या फिर उन सैन्‍य गतिविधियों के लिए नहीं किया जाएगा जिनसे दूसरे पक्ष या भारत-चीन के सीमाई इलाकों की शांति और स्थिरता नुकसान में पड़े।'

    एलएसी का सम्‍मान करेंगे देश

    एलएसी का सम्‍मान करेंगे देश

    दोनों पक्ष सीमा से जुड़े सवाल के हल के लिए उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान को मानेंगे। सीमा से जुड़े सवाल के अटके रहने पर एक समाधान तय किया जाएगा और इस पर दोनों देश अपनी प्रतिबद्धता का सख्‍ती से पालन करेंगे और एलएसी का सम्‍मान करेंगे। कोई भी देश ऐसी कोई भी गतिविधि नहीं करेगा जिससे एलएसी पार हो।

    जवानों की तैनाती को लेकर निर्देश

    जवानों की तैनाती को लेकर निर्देश

    दोनों पक्ष भारत और चीन के सीमाई इलाकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर परस्पर सहमती से अपने सैन्य बलों को कम करने या सीमित करेंगे और इन उपायों को मानेंगे:

    1. दोनों पक्ष इस बात की पुष्टि करते हैं कि उनके बीच दोस्‍ताना और अच्छे पड़ोसी संबंध होंगे और इसके तहत वास्तविक नियंत्रण रेखा के क्षेत्रों पर पारस्परिक रूप से आपसी सहमति के साथ अपने सैन्य बलों को कम या सीमित करेंगे। दोनों देश आपसी और समान सुरक्षा के सिद्धांत का पालन करेंगे।
    2. दोनों देश एलएसी पर तैनात फील्ड आर्मी, बॉर्डर डिफेंस फोर्स, अर्धसैनिक बलों और किसी दूसरे श्रेणी के सशस्त्र बल की संख्या को आपसी सहमति के साथ कम या सीमित कर देंगे। इसके साथ ही लड़ाकू टैंक, इंफेंट्री कॉम्‍बेट व्‍हीकल, बंदूकें (हॉवित्जर समेत) 75 मिमी या बड़े कैलिबर के साथ, 120 मिमी या बड़े कैलिबर के साथ मोर्टार, सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सतह -एट-एयर मिसाइलों और किसी भी अन्य हथियार प्रणाली पर इनकी तैनाती की संख्‍या कम या सीमित होगी।
    3. दोनों देश सैन्य बलों और सेनाओं पर डेटा को कम या सीमित करने पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा युद्धसामग्री को आपसी और समान सुरक्षा के सिद्धांत की आवश्यकता के अनुरूप निर्धारित किया जाएगा, जिसमें उचित मानदंड जैसे इलाके, सड़क संचार और अन्य बुनियादी ढांचे की प्रकृति और सैनिकों और सेनाओं को शामिल करने या हटाने के लिए लिए गए समय को ध्यान में रखा जाएगा।
    मिलिट्री एक्‍सरसाइज से पहले देनी होगी जानकारी

    मिलिट्री एक्‍सरसाइज से पहले देनी होगी जानकारी

    एलएसी के इलाकों पर शांति और व्‍यवस्‍था कायम करने के लिए भारत और चीन किसी गलतफहमी की वजह से होने वाले तनाव से बचने के लिए इन उपायों को मानेंगे:

    1. दोनों देश एलएसी के करीब बड़े स्‍तर पर उन मिलिट्री अभ्‍यास से बचेंगे जिसमें एक डिविजन से ज्‍यादा यानी 15,00 से ज्‍यादा जवान होंगे। हालांकि अगर ऐसे युद्धाभ्‍यासों को करना है तो फिर मुख्‍य बल की रणनीतिक दिशा दूसरे पक्ष की तरफ नहीं होगी।
    2. अगर कोई एक देश बड़े स्‍तर पर मिलिट्री अभ्‍यास का आयोजन करता है जिसमें एक ब्रिगेड ग्रुप जितने यानी करीब 5,000 जवान हैं और यह अभ्‍यास एलएसी के करीब हो रहा है तो इसके लिए दूसरे पक्ष को पहले से जानकारी देनी होगी जिसमें यह बताना होगा कि यह किस प्रकार की है, किस स्‍तर की है, इसकी समय-सीमा कितनी तय की गई है और कितने हिस्‍से में यह एक्‍सरसाइज होगी। इसके अलावा यह भी बताना होगा कि यूनिट की संख्‍या कितनी है और किस प्रकार की है या फिर अभ्‍यास में हिस्‍सा लेने वाली यूनिट का फॉर्मेशन क्‍या है।
    3. अभ्यास के क्षेत्र से सैनिकों के अभ्यास और इसके पूरा होने की तारीख दूसरे देश को पांच दिन के अंदर दे देनी होगी।
    4. हर पक्ष को इस आर्टिकल के पैराग्राफ 2 में अभ्‍यास से जुड़ी बातों को मानना जरूरी होगा।
    फाइटर जेट्स को लेकर भी बना है नियम

    फाइटर जेट्स को लेकर भी बना है नियम

    भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार हवाई रास्‍ते से घुसपैठ को रोकने और मिलिट्री एयरक्राफ्ट की तरफ से लैंडिंग को सुविधाजनक बनाने के लिए नियम:

    1. दोनों पक्ष यह सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी उपाय करेंगे कि एलएसी पर हवाई रास्‍ते पर घुसपैठ न हो। अगर कोई घुसपैठ होती है, तो उसे जल्द से जल्द
      पता चल जाना चाहिए और एयरक्राफ्ट किस देश का है उसकी तुरंत जांच की जानी चाहिए। जांच के परिणामों को तुरंत राजनयिक जरियों या फिर बॉर्डर पर तैनात सैन्‍य बल के ऑफिसरों के जरिए दूसरे पक्ष के साथ साझा किया जाना चाहिए।
    2. इस आर्टिकल के 3 और 5 के तहत, लड़ाकू विमान (लड़ाकू, बाम्‍बर्स, सर्विलांस, मिलिट्री ट्रेनर जेट, सशस्त्र हेलीकॉप्टर और दूसरे सशस्त्र जेट) वास्तविक नियंत्रण रेखा के दस किलोमीटर के अंदर उड़ान नहीं भरेंगे।
    3. अगर वास्तविक नियंत्रण रेखा से दस किलोमीटर के अंदर किसी भी तरह के लड़ाकू विमान को टेक ऑफ करने की जरूरत या फ्लाइंग की जरूरत होती है जो उसे राजनयिक जरिए से जानकारी दूसरे पक्ष के साथ साझा करनी होगी। उसे यह बताना होगा कि-
    • फाइटर जेट किस प्रकार का है और इनकी कितनी संख्‍या है
    • प्रस्‍तावित जेट कितनी ऊंचाई में उड़ान भरेगा।
    • जेट कितने समय तक उड़ान भरेगा (नियमानुसार 10 दिन से ज्‍यादा की अवधि नहीं होनी चाहिए)
    • फ्लाइट्स की टाइमिंग क्‍या होगी
    • ऑपरेशंस का एरिया कितना होगा।
    1. बिना हथियार वाले ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, सर्वे एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्‍टर्स को एलएसी पर उड़ान भरने की मंजूरी होगी।
    2. दोनों देशों के किसी भी प्रकार के मिलिट्री एयरक्राफ्ट को बिना पूर्व आज्ञा के एलएसी पार करने की अनुमति नहीं होगी।
    दो किलोमीटर के दायरे में बरतना होगा संयम

    दो किलोमीटर के दायरे में बरतना होगा संयम

    • वास्तविक नियंत्रण रेखा से दो किलोमीटर के भीतर न तो कोई पक्ष आग लगाएगा, न ही बायो-डिग्रेडेशन पैदा करेगा, न, खतरनाक रसायनों का उपयोग करेगा, न ही किसी प्रकार से बंदूकों और विस्‍फोटकों की मदद से ब्‍लास्‍ट करेगा। यह पांबदी, नियमित तौर पर होने वाली फायरिंग एक्टिविटीज पर नहीं होगी।
    • एलएसी पर अगर किसी वजह से दो किलोमीटर के दायरे के अंदर ब्‍लास्‍ट ऑपरेशंस करने की जरूरत है और यह विकासात्मक गतिविधियों (जैसे सड़क निर्माण) का हिस्‍सा है तो फिर दूसरे पक्ष को राजनयिक चैनलों के माध्‍यम से या फिर बॉर्डर पर्सनल मीटिंग के जरिए पांच दिन पहले इसकी जानकारी देनी होगी।
    • जिंदा गोला बारूद (Live ammunition) के साथ एलएसी से सटे इलाकों पर अभ्‍यास करते समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी गोली या फिर मिसाइल गलती से वास्‍तविक नियंत्रण रेखा के पार न जाए और किसी भी प्रकार से किसी व्‍यक्ति और संपत्ति को नुकसान पहुंचाए।
    • अगर एलएसी पर दोनों पक्षों के सैनिक किसी मतभेद के चलते आमने-सामने आते हैं तो उन्‍हें आत्म-संयम बरतना होगा और तनाव को कम करने के कदम उठाने होंगे। दोनों देश स्थिति की समीक्षा करने और तनाव को बढ़ाने से रोकने के लिए राजनयिक या दूसरे उपलब्‍ध चैनलों के जरिए वार्ता करेंगे या बाकी उपाय अपनाएंगे।

    English summary
    Rahul Gandhi questions govt why soldiers were unarmed in Galwan Valley, Ladakh. The reason was this agreement signed in 1996 between India-China.
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