700 करोड़ की हज सब्सिडी खत्म करने के पीछे ये है मोदी सरकार का पूरा राजनीतिक गणित
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नई दिल्ली। मोदी सरकार ने हज पर मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर देने का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इस फैसले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सालाना हज सब्सिडी के रूप में 700 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा था। मोदी सरकार इस राशि को सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर खर्च करेगी। यहां तक तो बात समझ में आती है कि हज सब्सिडी का पैसा मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर खर्च किया जाएग, लेकिन केंद्र सरकार के हज सब्सिडी खत्म करने के फैसले की टाइमिंग कुछ और इशारा कर रही है। यह बात सच है कि हज सब्सिडी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खत्म की गई है, लेकिन कोर्ट ने इसे 2022 तक खत्म करने को कहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि तय वक्त से चार साल पहले हज सब्सिडी खत्म करने का फैसला क्यों लिया गया? कहीं इसके पीछे हिंदुत्व की उस लकीर को और मजबूत करने की मंशा तो नहीं, जिसे कांग्रेस से लेकर टीएमसी तक तक हर कोई पीटने लगा था? कहीं हज सब्सिडी खत्म करने के पीछे कर्नाटक, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में होने जा वाले विधानसभा चुनावों का कोई गणित तो नहीं है? तो जवाब है- हां। आइए समझने की कोशिश करते हैं हज सब्सिडी और चुनावों का पूरा अंक गणित।

गुजरात चुनाव में 'बच के निकली' बीजेपी को सता रहा था डर
गुजरात चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष का मंदिर-मंदिर घूमना और पीएम नरेंद्र मोदी के गढ़ में बीजेपी को सिर्फ 99 पर समेटना , चिंता की बात है। बीजेपी का यह डर उस वक्त और पुख्ता हो गया जब कर्नाटक में सिद्धारमैया को अपने नाम में छिपे राम याद आ गए। जवाब में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कर्नाटक में याद दिलाया कि कांग्रेस को अब हिंदुत्व की याद आ रही है, जबकि हम तो पहले से ही हिंदुओं के रखवाले हैं। कर्नाटक में मई में चुनाव होने हैं। ऐसे में बीजेपी को खुद को कांग्रेस बड़ा हिंदू बनकर दिखाना ही था। जिस हिंदुत्व में विकास की चाशनी लपेटकर नरेंद्र मोदी लोकसभा जीते उस फार्मूले पर तो कांग्रेस समेत बाकी सभी दल नजर गढ़ाए हैं। ऐसे में बीजेपी को बड़ी लकीर खींचनी ही थी। उसे हिंदू वोटबैंक पर अपना हक जताना ही था। इसी क्रम में हज सब्सिडी को खत्म करने का बड़ा फैसला लिया गया।

एक तीर से दो शिकार करेगी बीजेपी
हज सब्सिडी खत्म करके बीजेपी न सिर्फ हिंदू वोट पर पकड़ और मजबूत करेगी, बल्कि तीन तलाक बिल लाकर मुस्लिम महिलाओं को अपनी ओर खींच रही बीजेपी अब हज सब्सिडी के पैसे से मुस्लिम लड़कियों के बड़े ऐलान कर सकती है। मोदी सरकार का यह दांव कांग्रेस, सपा, आरजेडी और टीएमसी समेत सभी तथाकथित सेक्युलर पार्टियों के मुस्लिम वोट में सेंध लगा देगा।

चार साल पहले इसलिए खत्म करने पड़ी बीजेपी को हज सब्सिडी
मोदी सरकार को केंद्र में आए करीब 4 वर्ष हो चुके हैं। इस दौरान बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने कई बड़े फैसले लिए, जिनकी तारीफ भी हुई, लेकिन कई मोर्चों पर सरकार को कड़ी चुनौती का सामना भी करना पड़ रहा है। ऐसे में बीजेपी के पास हिंदुत्व नाम के अलावा दूसरा कोई सहारा नहीं है। यही कारण है कि हज सब्सिडी चार पहले खत्म कर दी गई। वहीं दूसरी ओर बीजेपी अपनी राज्य सरकारों के जरिए हिंदुओं के प्रति सहानुभूति दिखा रहा है। मसलन, यूपी की योगी सरकार गाजियाबाद के इंदिरापुरम में 90 करोड़ की लागत से कैलाश मानसरोवर यात्रा भवन का निर्माण करा रही है। कैलाश यात्रा के लिए सरकार 1-1 लाख रुपये आर्थिक सहायता भी दे रही है।

बीजेपी को बड़ा राजनीतिक फायदा दिला सकता है ये फैसला
आने वाले समय में कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में हिंदुत्व पार्टी के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है। ऐसे में हज सब्सिडी खत्म करने का प्रभाव हिंदू वोटरों पर स्पष्ट तौर से दिख सकता है। वैसे भी छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में सरकार को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि चुनावी रणनीति पर लंबी चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है। यह 'सोचा-समझा' और 'कैल्कुलेटिव डिसिजन', कोई आनन-फानन में लिया गया फैसला। याद रहे कि दो दिन पहले ही बीजेपी ने भविष्य की चुनावी रणनीति में लंबी बैठक की है और उसके बाद ये फैसला सामने आया है।












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