आजादी के दिन झंडा फहराते समय न करें ऐसी गलती, तो आजादी के दिन खानी पड़ सकती है जेल की हवा
आजादी का दिन हर देशवासी के लिए बेहद खास है। 15 अगस्त साल 1947 को जब देशवासियों को गुलामी से आजादी मिली तो हर किसी का सीना गर्व से तन गया। तभी से लेकर 15 अगस्त के दिन को स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। आज के दिन देशभर में तिरंगा फहराया जाता है। मगर क्या आप जानते हैं कि तिरंगा फहराने के कुछ नियम भी हैं, अगर नहीं जानते तो जान लीजिये।
आजादी के महत्वपूर्ण दिन पर प्रधानमंत्री लाल किला पर तिरंगा फहराते हैं। स्कूल, कॉलेज, सोसायटी और अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। ऐसे में ये बात जान लेना बेहद जरूरी है कि झंडा फहराने के भी अपने नियम होते हैं और अगर इन नियमों का पालन ना किया जाए तो आजादी के दिन ही जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

सबसे पहले तो बता दें कि गलत तरीके से झंडा फहराना बेहद भारी पड़ सकता है। अगर आप नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करते तो जेल की हवा खानी पड़ सकती है। सही तरीके से झंडा कैसे फहराया जाता है, इसके क्या नियम हैं।
चलिये आपको बताते हैं।सबसे पहले तो आपको इस बात का खास ख्याल रखना है कि झंडा उल्टा ना हो। झंड़े का केसरिया रंग हमेशा ऊपर रहता है। सफेद रंग बीच में और हरा रंग हमेशा नीचे रहता है।
तिरंगा फहराते हुए इस बात का खास ख्याल रहे कि ये कहीं से कटा-फटा हुआ ना हो। और ये गीला भी नहीं होना चाहिए।
तिरंगा किसी भी हालत में जमीन को नहीं छूना चाहिए। ये भी ध्यान रहे कि राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा कोई भी ध्वज ना हो।
राष्ट्रीय ध्वज पर कुछ भी लिखा हुआ ना हो और फेंकने या फिर इसे नुकसान पहुंचाने पर भी मनाही है।
अगर आप झंडे को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाते हैं या फिर किसी भी तरह से इसका अपमान करते हैं तो आपको 3 साल की जेल, जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं।
अगर बात करें ध्वजाहोरण और झंडा फहराने की तो कई बार लोगों को इसके बीच का फर्क नहीं मालूम होता। बता दें कि जब 15 अगस्त को प्रधानमंत्री रस्सी के जरिये खींचकर झंडा फहराते हैं तो इसे ध्वजारोहण कहा जाता है। वहीं 26 जनवरी के दिन झंडा ऊपर ही बंधा होता है, जिसे पूरा खोलकर फहराते हैं। इसे झंडा फहराना कहते हैं।












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