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Independence Day : राष्ट्रपति का देश के नाम संदेश- 2047 तक पुरखों का सपना पूरा करेंगे, जानिए बड़ी बातें

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नई दिल्ली, 14 अगस्त :भारत की आजादी की 75 साल पूरे होने के मौके पर पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा है। देश में आजादी का अमृत महोत्सव चल रहा है। इसी बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर देश के नाम अपना पहला संबोधन दिया। राष्ट्रपति ने 76वें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त के दिन को विभाजन-विभीषिका स्मृति-दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस स्मृति दिवस को मनाने का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, मानव सशक्तीकरण और एकता को बढ़ावा देना है।

independence day 15 august eve

महिलाओं को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, 15 अगस्त 1947 के दिन हमने औपनिवेशिक शासन की बेड़ियों को काट दिया था। उस शुभ-दिवस की वर्षगांठ मनाते हुए हम लोग सभी स्वाधीनता सेनानियों को सादर नमन करते हैं। उन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया ताकि हम सब एक स्वाधीन भारत में सांस ले सकें। उन्होंने कहा, अधिकांश लोकतान्त्रिक देशों में वोट देने का अधिकार प्राप्त करने के लिए महिलाओं को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा था। लेकिन हमारे गणतंत्र की शुरुआत से ही भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया।

संघर्ष को सम्मान

'आज़ादी के अमृत महोत्सव' का जिक्र कर राष्ट्रपति ने बताया, मार्च 2021 में दांडी यात्रा की स्मृति को फिर से जीवंत रूप देकर Aazadi ka Amrit Mahotsava शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव से दांडी यात्रा का आंदोलन और भारत का संघर्ष विश्व-पटल पर दोबारा स्थापित हुआ। उन्होंने कहा कि संघर्ष को सम्मान देकर आज़ादी के अमृत महोत्सव की शुरुआत की गई। यह महोत्सव भारत की जनता को समर्पित है।

2047 तक पुरखों का सपना पूरा करने का संकल्प

बकौल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, साल 2021 से हर साल 15 नवंबर को 'जन-जातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाने का सरकार का निर्णय स्वागत-योग्य है। उन्होंने कहा कि हमारे जन-जातीय महानायक केवल स्थानीय या क्षेत्रीय प्रतीक नहीं हैं बल्कि वे पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। राष्ट्रपति ने कहा, हमारा संकल्प है कि वर्ष 2047 तक हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को पूरी तरह साकार कर लेंगे।

भारत सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी में से एक

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने भारत में ही निर्मित वैक्सीन के साथ मानव इतिहास का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू किया। उन्होंने कहा कि पिछले महीने भारत में दो सौ करोड़ वैक्सीन कवरेज का आंकड़ा पार हो गया। इस महामारी का सामना करने में हमारी उपलब्धियां विश्व के अनेक विकसित देशों से अधिक रही हैं। उन्होंने कहा, जब दुनिया कोरोना महामारी के गंभीर संकट के आर्थिक परिणामों से जूझ रही थी तब भारत ने स्वयं को संभाला। अब दोबारा भारत तेज गति से आगे बढ़ने लगा है। इस समय भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही प्रमुख अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक है।

नागरिक मूल कर्तव्यों के बारे में जानें

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में आज संवेदनशीलता व करुणा के जीवन-मूल्यों को प्रमुखता दी जा रही है। इन जीवन-मूल्यों का मुख्य उद्देश्य हमारे वंचित, जरूरतमंद तथा समाज के हाशिये पर रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए कार्य करना है। उन्होंने कहा,
देश के प्रत्येक नागरिक से मेरा अनुरोध है कि वे अपने मूल कर्तव्यों के बारे में जानें, उनका पालन करें, जिससे हमारा राष्ट्र नई ऊंचाइयों को छू सके।

देश की महिलाओं से बढ़ा कॉन्फिडेंस

बकौल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, आज देश में स्वास्थ्य, शिक्षा और अर्थ-व्यवस्था तथा इनके साथ जुड़े अन्य क्षेत्रों में जो अच्छे बदलाव दिखाई दे रहे हैं उनके मूल में सुशासन पर विशेष बल दिए जाने की प्रमुख भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारत के नए आत्म-विश्वास का स्रोत देश के युवा, किसान और सबसे बढ़कर देश की महिलाएं हैं। राष्ट्रपति ने कहा, महिलाएं अनेक रूढ़ियों और बाधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ रही हैं। सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं में उनकी बढ़ती भागीदारी निर्णायक साबित होगी। आज हमारी पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या 14 लाख से कहीं अधिक है।

भारत की बेटियों का परचम

बकौल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, हमारे देश की बहुत सी उम्मीदें हमारी बेटियों पर टिकी हुई हैं। समुचित अवसर मिलने पर वे शानदार सफलता हासिल कर सकती हैं। हमारी बेटियां फाइटर पायलट से लेकर अंतरिक्ष विज्ञानी तक बन रही हैं। हर क्षेत्र में भारत की बेटियां अपना परचम लहरा रही हैं।

अपना सब कुछ अर्पण करने का संकल्प

उन्होंने कहा कि आज जब हमारे पर्यावरण के सम्मुख नई-नई चुनौतियां आ रही हैं, तब हमें भारत की सुंदरता से जुड़ी हर चीज का दृढ़तापूर्वक संरक्षण करना चाहिए। जल, मिट्टी और जैविक विविधता का संरक्षण हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है। राष्ट्रपति ने कहा, हमारे पास जो कुछ भी है वह हमारी मातृभूमि का दिया हुआ है। इसलिए हमें अपने देश की सुरक्षा, प्रगति और समृद्धि के लिए अपना सब कुछ अर्पण कर देने का संकल्प लेना चाहिए।

सुखद और मंगलमय जीवन की शुभकामनाएं

संबोधन के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, वे भारत के सशस्त्र बलों, विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों और अपनी मातृभूमि को गौरवान्वित करने वाले प्रवासी-भारतीयों को भी स्वाधीनता दिवस की बधाई देती हूं। उन्होंने सभी देशवासियों के सुखद और मंगलमय जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।

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English summary
independence day 15 august eve president droupadi murmu address
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