पी राजगोपाल ONGC में किस बड़े पद पर थे ? पीएम मोदी की मौजूदगी में 70 की उम्र में मिली PhD की डिग्री
चेन्नई, 29 जुलाई: तमिलनाडु में आज अन्ना यूनिवर्सिटी के 42वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उपस्थित हुए। इस मौके पर करीब 10 साल पहले ओएनजीसी में बड़े पद से रिटायर कर चुके पी राजगोपाल को भी पीएचडी की डिग्री दी गई। राजगोपाल को यह सफलता करीब 10 साल की मेहनत से मिली है और उन्होंने एकबार फिर साबित किया है कि अगर लगन हो तो शिक्षा के लिए कोई उम्र की सीमा नहीं होती। उनके पास एक बेहतर रिटायरमेंट लाइफ जीने का अवसर था। लेकिन, अपनी जिम्मेदारियों की वजह से जो वे पहले पूरा नहीं कर सकते थे, वह रिटायरमेंट के बाद करके दिखाया है।

करीब 10 साल की मेहनत से मिली सफलता
चेन्नई के अन्ना यूनिवर्सिटी में आज के दीक्षांत समारोह में 70 साल की उम्र में पी राजगोपाल को पीएचडी की डिग्री से नवाजा गया है। इस मौके पर उन्होंने कहा, 'मुझे गैर-शिक्षण कर्मचारियों के साथ ही अपने सहयोगियों से भी सौहार्दपूर्ण मदद मिली। दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री का होना हमारे लिए सम्मान की बात है।' अलगप्पा कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी के पूर्व छात्र पी राजगोपाल पिछले लगभग 10 वर्षों से आज के दिन के लिए मेहनत कर रहे थे।

कैसे मिली इस उम्र में पीएचडी करने की प्रेरणा ?
इन्होंने अलगप्पा कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी के केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से 1978 में बीटेक और 1980 में एम टेक किया था। उसके बाद उन्होंने ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) ज्वाइन कर लिया था। जब रिटायरमेंट के बाद ये वापस चेन्नई लौटकर आए तो अपनी बेटी को छोड़ने के लिए अपने पुराने कॉलेज जाने लगे। वहां इनकी बेटी इंडस्ट्रीयल इंजीनियरिंग में डिग्री ले रही थीं। बस यहीं से उन्हें फिर पढ़ाई शुरू करने की प्रेरणा मिली और उन्होंने पीएचडी करने की ठान ली।

2013 में ओएनजीसी के जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए
राजगोपाल 2013 में ओएनजीसी के जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने कहा, 'इस प्रोग्राम को पूरा करने में मुझे आठ साल लगे, क्योंकि मुझे अपने परिवार को भी देखना था।' पीएचडी करते समय इनके पहले गाइड एम वेलन भी रिटायर हो गए। इसके बाद एसोसिएट प्रोफेसर के चित्रा इनकी गाइड बनीं। उन्होंने बताया कि 'इनके दो आर्टिकल इंटरनेशनल जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं (पीएचडी की डिग्री के लिए यूजीसी ने निर्धारित कर रखा है।)'

ओएनजीसी की समस्या पर ही किया शोध
दिलचस्प बात ये है कि अपने शोध के माध्यम से पी राजगोपाल ने ओएनजीसी के सामने आने वाले खराब पानी की समस्या का समाधान निकालने का ही प्रयास किया है। उनके मुताबिक गाइड ने उन्हें सुझाव दिया कि वे रिसर्च के लिए दो अन्य उद्योगों के अपशिष्टों को भी शामिल करें। फिर उन्होंने कपड़ा और फार्मास्युटिकल उद्योग को शामिल किया। फिर उन्होंने प्रयोगशाला में पानी को दो अलग-अलग प्रक्रियाओं के साथ ट्रीट किया और फिर परिणामों की तुलना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्धारित सीमा से की। यह बहुत ही शुरुआती शोध है। जिसमें उन्हें काफी अच्छे परिणाम मिले हैं। हालांकि, औद्योगिक स्तर पर जाने के लिए शोधकर्ताओं को इसपर और ज्यादा काम करना होगा।

पारिवारिक दिक्कतों के बावजूद पूरा किया शोध
प्रोफेसर चित्रा ने इनके कोर्स के बारे में बताया, 'उन्होंने मुश्किलों के साथ अपने कोर्स का कार्य पूरा किया है। उनकी पत्नी बीमार थीं और कोविड से भी गुजरना पड़ा था।' उनके रिसर्च में लॉकडाउन की वजह से भी बाधाएं खड़ी हुईं। चित्रा ने कहा कि जब उन्हें राजगोपाल का गाइड बनाया गया तो वह शुरू में काफी हिचकिचा रही थीं। क्योंकि, वे पुराने छात्र ही नहीं थे, एक बहुत ही वरिष्ठ व्यक्ति थे।












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