यूपी में मुस्लिम महिलाओं के सहारे कैसे माया-अखिलेश के वोट बैंक में सेंध लगा रही है भाजपा, जानिए
नई दिल्ली- उत्तर प्रदेश में अब तक मुसलमानों को सपा-बसपा का ही वोट बैंक माना जाता रहा है। कहा जाता है कि यूपी के मुस्लिम चुनावों में इन दोनों पार्टियों में से उसी को वोट देते हैं, जिनके उम्मीदवारों में उन्हें बीजेपी के उम्मीदवारों को हराने का दम दिखता है। लेकिन, बीजेपी ने अब मुसलमानों की इस बाध्यता को तोड़ने की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया है। पार्टी ने पिछले 6 जुलाई से जो मेंबरशिप ड्राइव चलाया है, उसमें उसकी नजर मुसलमानों और खासकर मुस्लिम महिलाओं पर है और वह ज्यादा से ज्यादा संख्या में उन्हें बीजेपी के सदस्य के रूप में शामिल करने की कोशिशों में जुट चुकी है।

यूपी में 5 लाख मुसलमानों को सदस्य बनाने का लक्ष्य
बताया जा रहा है कि बीजेपी के मौजूदा सदस्यता अभियान में यूपी से अल्पसंख्यक समुदायों के 10 लाख लोगों को पार्टी में शामिल करने की योजना है। लेकिन, चौंकाने वाली बात ये है कि इन 10 लाख सदस्यों में से 5 लाख मुसलमानों को भाजपा में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। सुनने में बीजेपी का यह टारगेट अव्यवहारिक लग सकता है। क्योंकि, उसे अबतक कुल एक लाख मुसलमानों को भाजपा की सदस्यता दिलाने के लिए भी कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में सिर्फ यूपी में इतना बड़ा लक्ष्य कैसे हासिल किया जा सकता है? लेकिन, बीजेपी को उम्मीद है कि मुस्लिम महिलाओं में पीएम मोदी की बनी एक नई छवि के जरिए वह ऐसा संभव कर सकती है। यही वजह है कि मुस्लिम महिलाओं को पार्टी की सदस्यता दिलाने वाली तस्वीरें खुद पार्टी की मीडिया सेल ने जारी किए हैं, जिसमें और कोई नहीं खुद पार्टी के प्रदेश महासचिव (संगठन) सुनील बंसल मुस्लिम महिला को सदस्य बनाते दिखाई दे रहे हैं।

मुस्लिम-बहुल इलाकों पर फोकस
यूपी में बीजेपी ने मुस्लिम महिलाओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कोई अचानक शुरू नहीं किया है। जब से 2016 में बुंदेलखंड की एक रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रिपल तलाक का मुद्दा उठाकर मुस्लिम महिलाओं की भावनाओं पर मरहम लगाने की कोशिश की है, तभी से उन्हें अपने साथ लाने के लिए बीजेपी की कोशिशें जारी हैं। पार्टी नेताओं का दावा है कि इस मुद्दे ने काफी मुस्लिम महिलाओं का नजरिया भारतीय जनता पार्टी के प्रति बदल दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी की मेंबरशिप लेने वाली अलीगढ़ की एक मुस्लिम महिला गुलिस्ताना का कहना है, "मैं बीजेपी के साथ इसलिए हूं, क्योंकि ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला जैसी महिलाओं के शोषण करने वाली कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाकर इसने समाज की बहुत बड़ी सेवा की है।" जाहिर है कि मुस्लिम महिलाओं में भाजपा के प्रति बदलती भावना को देखते हुए ही बंसल सदस्यता अभियान के दौरान मुस्लिम-बहुल इलाकों पर फोकस रख रहे हैं। बीजेपी के एक पदाधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर माना है कि, "मुस्लिम महिलाओं को पार्टी के नजदीक लाना बीजेपी की भविष्य की योजनाओं में शामिल है।"

विपक्षी दलों में हड़कंप
उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की आबादी 19% है। खासकर रामपुर, बदायूं, अमरोहा, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, कैराना समेत कई और इलाकों में उनका काफी दबदबा है। यही वजह है कि बीजेपी के प्रयासों ने विपक्षी दलों में हड़कंप मचा दिया है। उन्हें लगता है कि भारतीय जनात पार्टी मुस्लिम वोट बांटने की कोशिशों में जुटी है। हाल ही में समाजवादी पार्टी के एक मुस्लिम विधायक नाहिद हसन का एक विवादित विडियो वायरल हुआ था जिसमें वे कथित तौर पर बीजेपी समर्थक कारोबारियों से चीजें नहीं खरीदने की नसीहत देते दिख रहे थे। वे कहते सुनाई दे रहे थे,"वे हमें बांट रहे हैं। उन व्यापारियों से कुछ भी न खरीदें जो बीजेपी के समर्थक हैं।" अब इस विडियो की वैध्यता की पुलिस जांच कर रही है।

मुसलमानों में बढ़ रहा है हमारा समर्थन- बीजेपी
हाल ही में ऐसी खबरें भी आ चुकी हैं कि कैसे बीजेपी में शामिल होने के चलते मुस्लिम महिलाओं को कहीं-कहीं परेशान भी किया जा रहा है। ऐसी ही दो महिलाओं ने भाजपा में शामिल होने के चलते मकान मालिक द्वारा धमकाए जाने को लेकर पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। इन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर दिलाने का भाजपा की ओर से वादा किया गया है। यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार में एक मात्र मुस्लिम चेहरे मोहसिन रजा कहा कहना है, "हमारा मुसलमानों समेत सभी समुदायों में समर्थन बढ़ता जा रहा है। क्या आपने किसी ऐसे मुसलमान से बात की है, जिन्हें बीजेपी के कार्यकाल में मुफ्त गैस कनेक्शन, बिजली, मेडिकल इंश्योरेंस और घर मिला है? उनके चेहरे पर संतुष्टि देखी जा सकता है, क्योंकि अभी तक उनका कांग्रेस, एसपी और बीएसपी द्वारा सिर्फ इस्तेमाल ही किया गया है।" कहा जा रहा है कि 2017 और 2019 के चुनावों में प्रदेश में मुसलमानों के एक वर्ग का भाजपा को समर्थन मिला भी है। इसी के चलते पार्टी का उत्साह बढ़ गया है। मौजूदा समय में यूपी में बीजेपी के दो मुस्लिम एमएलसी हैं, मोहसिन रजा और बुखाल नवाब। वे दोनों मंदिर भी जाते हैं और मुसलमानों से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेने की अपील भी करते हैं।

पार्टी को अभी और विश्वास बढ़ाने की जरूरत
ये सही है कि मोदी-योगी सरकार की कई वेलफेयर स्कीम से मुस्लिम महिलाएं भी लाभांवित हुई हैं और ट्रिपल तलाक समेत कई और मुद्दों पर केंद्र सरकार के ऐक्शन ने उनमें भाजपा के प्रति एक भरोसा बढ़ाया है। लेकिन, मुस्लिम बुद्धिजीवियों की मानें तो पार्टी को अभी और बहुत कुछ करना होगा, तभी मुस्लिम महिलाएं और मुस्लिम समाज बीजेपी को पूरी तरह से अपनाने को तैयार होंगे। लखनऊ में मुसलमान लड़कियों के लिए जामिया-उलूम दिन-ए-मिसवा मदरसा चलाने वाली और वुमेंस राइट्स एट्विस्ट शाजिया हसन कहती हैं, "अगर आप राजनीतिक तौर पर पूछेंगे, तो मुझे लगता है कि अभी भी समुदाय के बड़े हिस्से की कुछ चिंताएं हैं। बीजेपी ने कुछ का समाधान किया है, लेकिन अल्पसंख्यकों को ज्यादा संख्या में जोड़ने के लिए अभी और करने की जरूरत है।"
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