शादीशुदा दो लोग बिना तलाक दिए लिव इन में रहे, फिर रेप का आरोप लगाया, कोर्ट ने बरी किया

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नई दिल्‍ली। ''उन्‍होंने जबरदस्‍ती शारीरिक संबंध नहीं बनाया था। वो अपनी इच्‍छा से और अपने होशो-हवास में इस रिश्‍ते के लिए राजी हुए थे। इसलिए आरोपी व्‍यक्ति पर बलात्‍कार का कोई मामला नहीं बनता है और उसे बरी किया जाता है।'' यह फैसला पश्चिम बंगाल की अदालत ने उस मामले की सुनवाई पर सुनाया जिसमें पहले से दो शादीशुदा लोग लिव इन में रह रहे थे और बार में महिला ने पार्टनर पर रेप का आरोप लगाया था।

शादीशुदा दो लोग बिना तलाक दिए लिव इन में रहे, फिर रेप का आरोप लगाया, कोर्ट ने बरी किया

उल्‍लेखनीय है कि आरोपी शिकायतकर्ता के चचेरी बहन का पति है। शिकायतकर्ता भी पहले से शादीशुदा है। मामला यह है कि दोनों ने अपनी शादीशुदा जिंदगी को तलाक दिए बिना एक दूसरे के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। कुछ सालों तक साथ रहने के बाद 10 फरवरी 2014 को महिला ने अपने पार्टनर पर रेप का आरोप लगाया था। उसने शिकायत पत्र में लिखा था कि आरोपी ने उसके साथ शादी का झांसा देकर कई साल तक बलात्‍कार किया।

क्‍या कहा कोर्ट ने

कोर्ट में जज संजीव जैन ने अपने फैसले में कहा कि ना ही आरोपी और ना ही शिकायतकर्ता ने अपने जीवनसाथी को तलाक नहीं दिया था और साथ रहे रहे थे। कोर्ट ने कहा कि यह साफ होता है कि सबकुछ जानते हुए भी दोनों लिव इन में थे। ऐसे में य‍ह मामला धोखा देकर शारीरिक संबंध बनाने का नहीं है।

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English summary
“They were not naive to the physical relations. They , out of their own will and choice, developed the physical relationship and her consent for the physical relations was an act of her conscious decision,“ a court has pointed out while acquitting a man accused of rape by a woman.
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