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भारतीय किसान यूनियन मैनिफिस्टो में खुद कर चुकी है एमएसपी, मंडी और आढ़तियों से मुक्ति की मांग?

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नई दिल्ली। नए कृषि कानून 2020 में किए गए प्रावधानों को लेकर किसानों का आंदोलन थमता दिख नहीं रहा है और किसानों का नेतृत्व कर रही भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि इसका एकमात्र इलाज है कि सरकार संसद का संत्र बुलाकर कृषि कानून को रद्द करें, तभी 8वें दिन में प्रवेश कर चुका किसानों का आंदोलन खत्म होगा। कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन में उतरे हरियाणा और पंजाब के किसान एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) खत्म होने की आशंकाओं पर समाधान के लिए न ही सरकार की बातों पर भरोसा करना चाहती है और न ही कृषि कानूनों पर विश्वास कर रही है, जिसमें एमएसपी, मंडी और एपीएमसी एक्ट खत्म करने की बात कहीं नहीं कही गई है।

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गरीबों को मुफ्त अनाज देने के लिए एमएसपी पर खऱीदना अनिवार्य है

गरीबों को मुफ्त अनाज देने के लिए एमएसपी पर खऱीदना अनिवार्य है

लोकतांत्रिक राष्ट्र में जन कल्याणकारी योजनाओं के मद्देनजर सरकार गरीबों को मुफ्त अनाज देने के लिए एमएसपी पर खऱीदना अनिवार्य कड़ी है। पीडीएस के अलावा सरकार को एमएसपी पर अनाज खरीदने की जरूरत लागू राइट टू फूड कानून की वजह से भी करनी पड़ती है। राइट टू फूड के तहत सरकार गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को मुफ्त अनाज देने की जिम्मेदारी है, इसके लिए सरकार को किसानों से ही अनाज खऱीदती है। उपरोक्त तथ्यों की रोशनी में कम से कम हिंदुस्तान में सरकारों द्वारा एमएमसपी के प्रावधानों से छेड़छाड़ करने की बात हजम होने लायक नहीं है।

नए कृषि कानून और क्या नए प्रावधान से किसानों का डरना जायज है?

नए कृषि कानून और क्या नए प्रावधान से किसानों का डरना जायज है?

नए कृषि कानून क्या हैं और किए गए प्रावधानों से क्या सचमुच किसानों का डरना जायज है। इससे भी बड़ी बात क्या मोदी सरकार कृषि कानूनों आंदोलन के दवाब में वापस ले सकती है। इतिहास गवाह है मोदी सरकार नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ मचे राष्ट्रव्यापी आंदोलन के बाद भी नहीं झुकी है और मोदी सरकार द्वारा लाए किसी भी कानून को अब तक रद्द नहीं किया गया है। तो क्या कृषि कानून को लेकर मोदी सरकार को झुकाने में किसान कामयाब हो सकते हैं, यह इसलिए भी संभव नहीं लगता है, क्योंकि इस आंदोलन में केवल हरियाणा और पंजाब के किसान ही शामिल है।

कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन सुविधा) विधयेक 2020

कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन सुविधा) विधयेक 2020

मोदी सरकार ने संसद में दोनों सदनों में कृषि कानून से जुड़े कुल जमा तीन विधेयक पास करवाए थे। पहला विधयेक, कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन सुविधा) विधयेक 2020। इसके अनुसार किसान अपनी फसल अपने मुताबिक मनचाही जगह पर बेच सकते हैं। य़हां पर कोई भी दखलंदाजी नहीं कर सकता है। य़ानी कि एग्रीकल्चर मार्केटिंग प्रोड्यूस कमेटी (एपीएमसी) के बाह भी फसलों को किसान बेच-खरीद सकते हैं। फसल की बिक्री पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, किसान फसल का ऑनलाइन भी बेच सकते हैं।

मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान अनुबध विधेयक 2020

मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान अनुबध विधेयक 2020

दूसरा विधेयक, मूल्या आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण व संरक्षण) अनुबध विधेयक 2020। इसके अनुसार देशबर में कांट्रैक्ट फॉर्मिंग को लेकर व्यवस्था बनाने का प्रस्वाव है। फसल खराब होने पर कांट्रैक्टर को पूरी भरपाई करनी होगी। किसान अपने दाम पर कंपनियों को फसल बेच सकेंगे। इससे उम्मीद जताई गई है कि किसानों की आय बढ़ेगी।

तीसरा कानून है, आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020

तीसरा कानून है, आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020

तीसरा विधेयक, आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020। आवश्यक वस्तु अधिनियम को 1955 में बनाया गया था। खाद्य तेल, दाल, तिल, आलू, प्याज जैसे कृषि उत्पादों पर से स्टॉक लिमिट हटा ली गई है। अति आवश्यक होने पर स्टॉक लिमिट लगाया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय आपदा, सूखा शामिल है। प्रोसेसर या वैल्यू चेन पार्टिसिपेंट्स के लिए ऐसी स्टॉक लिमिट लागू नहीं होगी। उत्पादन स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी नियंत्रण खत्म होगा।

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English summary
The agitation of farmers is not stopping with regard to the provisions made in the new Agricultural Law 2020 and the Indian Farmers Union, which is leading the farmers, says that the only cure is that the government should call the Parliament and cancel the agricultural law, only on the 8th day The agitation of farmers who have entered will end. Neither the farmers of Haryana and Punjab, who have gone against the agricultural law in the agitation against the MSP (Minimum Support Price), do not want to rely on the government's talk for resolving the fears of the MSP (or the minimum support price), including the MSP, There is no talk of ending the Mandi and APMC Act.
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