राज्यसभा चुनाव: BSP की हार से अखिलेश के इस 'बड़े प्लान' पर फिरा पानी
अखिलेश ने प्लान किया था ग्रैंड डिनर, परिणाम के बाद किया रद्द
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों में से 1 पर समाजवादी पार्टी अपना उम्मीदवार भेजने में सफल हो गई है। हालांकि पार्टी के लिए यह खुशी आधी ही रही क्योंकि पार्टी बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी को अपना वोट दिलाने के बाद भी राज्यसभा भेजने में नाकाम रही है। बसपा की हार के बाद अखिलेश का 'बड़े प्लान' पर पानी फिर गया। भारतीय जनता पार्टी कांटे की टक्कर में अपने 9वें उम्मीदवार को जिताने और बसपा को हराने में सफल रही है। बता दें कि बीते दिनों सपन्न हुए लोकसभा उपचुनाव में बसपा और सपा ने भाजपा को हराया था ऐसे में उन्हें राज्यसभा चुनाव में विश्वास था कि वो जीत जाएंगे।

ये था प्लान
अखिलेश यादव ने चुनाव के बाद की बड़ी तैयारियां कर रखी थीं। उन्होंने एक भजन सत्र और ग्रैंड डिनर आयोजित किया था। लखनऊ के एक पांच सितारा होटल में होने वाले इस कार्यक्रम को हालांकि रद्द कर दिया गया। जब परिणाम आने की शुरूआत हुई उसके बाद ही अखिलेश ने कार्यक्रम रद्द कर दिए। अखिलेश की योजना थी कि इस ग्रैंड डिनर में मुलायम सिंह यादव और जया बच्चन पहुंचे।

रिटर्न गिफ्ट देना चाहते थे अखिलेश
हालांकि परिणाम विपरीत आने पर जश्न की तैयारी रद्द कर दी गई। दूसरी ओर देखा जाए तो अखिलेश ने बसपा के प्रत्याशी भीमराव आंबेडकर को जिताने के लिए कड़ी मेहनत की। वो गोरखपुर और फूलपुर में बसपा की बदौलत मिली जीत पर रिटर्न गिफ्ट देना चाहते थे।

नहीं रंग लाई मेहनत
जब मायावती ने उनसे राज्यसभा चुनाव के पहले एक निश्चित सूची मांगी तो उन्होंने सबसे विश्वसनीय विधायकों का नाम भेजा। समाजवादी पार्टी के पास जया बच्चन की जरूरत के 37 वोट के बाद 10 अतिरिक्त वोट थे, जो बसपा को दिए गए। यहां तक अखिलेश ने प्रतापगढ़ स्थित कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह से मुलाकात की। हालांकि मेहनत रंग नहीं लाई और भीमराव आंबेडकर को हार का सामना करना पड़ा।

भाजपा के खाते में 9 सीट
गौरतलब है कि वोटिंग में कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की जिसके चलते बसपा के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा अपने 9वें उम्मीदवार को भी राज्यसभा भेजने में सफल हो गई। वोटिंग के आखिरी दो घंटे में हुए इस खेल ने सपा और बसपा की रणनीति पर पानी फेर दिया, जिसके बाद भाजपा के खाते में 9 और सपा के खाते में 1 सीट आई, जबकि बसपा खाली हाथ रह गई।












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