बिहार में इन 10 लोकसभा सीटों को BJP ने माना मुश्किल, JDU के अलग होने से जीत के लिए बदली रणनीति
भाजपा बिहार की 10 लोकसभा सीटों को अपने लिए मुश्किल मानकर चल रही है। इनमें से 6 सीटें JDU के अलग होने की वजह से बढ़ी हैं। देश में यह संख्या बढ़कर 160 हो चुकी है, जिनमें से 100 सीटों के लिए पटना में बड़ी बैठक हो रही है।

2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी काफी समय से रणनीति बनाने में जुटी हुई है। पार्टी संगठन से जुड़े कद्दावर नेता पहले उन सीटों पर फोकस करना चाहते हैं, जिसे पार्टी जीतने के लिए कठिन मानती है। देश भर में लोकसभा की कुल सीटों में से पहले पार्टी ने 144 सीटों की पहचान की हुई थी, जिसे जितना वह चुनौती समझती है। अब उस लिस्ट में 16 और लोकसभा क्षेत्र शामिल कर दिए गए हैं। यानि अब देश में कुल ऐसी 160 सीटें हो गई हैं, जिसे भारतीय जनता पार्टी अपनी जीत के लिए कठिन मानती है। लेकिन उन सीटों को जीतने के लिए उसने अभी से मेहनत शुरू कर दी है। पार्टी ने इसी रणनीति से गुजरात में विधानसभा की उन सीटों पर भी कांग्रेस को हराया है, जहां वह कभी भी हारी ही नहीं थी। भाजपा ने जिन मुश्किल 16 लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई है, वह बिहार और महाराष्ट्र में हैं।

2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा में मंथन
गुजरात विधानसभा के लिए 5 दिसंबर को अंतिम चरण का मतदान हुआ और भारतीय जनता पार्टी ने उसी दिन आने वाले राज्य विधानसभाओं और 2024 के लोकसभा चुनावों के अपनी रणनीति पर आगे की चर्चा शुरू कर दी। यह विचार-विमर्श भाजपा के राष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुआ था। बीजेपी ने कुछ महीने पहले ही देश की कुल 144 लोकसभा सीटों को अपने लिए कठिन माना था और उसे जीतने के लिए ज्यादा मेहनत करने का संकल्प लिया था। पार्टी के कई केंद्रीय मंत्री एक चरण में उन सीटों पर दौरा भी कर चुके हैं। कमजोर सीटों पर जीतने का लक्ष्य तय करके उसके लिए कोशिश करने का नतीजा गुजरात विधानसभा में पार्टी को सकारात्मक दिखा है। जहां पार्टी कभी नहीं जीती थी, वहां भी उसे कामयाबी मिली है।

पूरे देश में '160' लोकसभा सीटों को कठिन मानती है बीजेपी
2019 के लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा का मुख्य रूप से बिहार और महाराष्ट्र में सहयोगी दलों से गठबंधन टूटा है। पंजाब में वैसे भी बीजेपी ज्यादा प्रभावी नहीं रही है, हालांकि इस बार वह वहां भी अपने दम पर तैयारियों में जुटी है। जहां तक बिहार की बात है तो वहां भाजपा से अलग होकर जेडीयू के नीतीश कुमार ने आरजेडी के साथ मिलकर सरकार बनाई तो महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई में शिवसेना करीब ढाई साल तक कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार चला चुकी है। लिहाजा 2024 में भाजपा ने महाराष्ट्र और बिहार में बदले राजनीतिक हालात को देखते हुए मुश्किल लोकसभा सीटों वाला अपना लक्ष्य 144 से बढ़ाकर अब 160 कर लिया है।

पटना में 100 लोकसभा सीटों के लिए बैठक
बिहार में बीजेपी की चुनौती बड़ी है, लेकिन विधानसभा उपचुनावों में उसने जिस तरह से महागठबंधन को हराया है, उससे उसका मनोबल बढ़ा हुआ है। बुधवार से ही पार्टी राजधानी पटना में देश के 100 लोकसभा सीटों के विस्तारकों या फुल टाइम कार्यकर्ताओं की बैठक कर रही है। इस कार्यक्रम के दौरान पार्टी के संगठन महासचिव बीएल संतोष,महासचिव सुनील बंसल और विनोद तावड़े, संयुक्त महासचिव शिव प्रकाश और बिहार के सह-प्रभारी हरीश द्विवेदी विस्तारकों को संबोधित करेंगे। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दिल्ली से ही वर्चुअल माध्यम से कार्यकर्ताओं से जुड़ेंगे। भाजपा में विस्तारक ऐसे कार्यकर्ता होते हैं, जो खास क्षेत्र में तसल्ली से अपना योगदान देते हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी नेटवर्क को मजबूत करने का काम करते हैं।

बिहार में इन 10 लोकसभा सीटों को भाजपा ने माना मुश्किल
पार्टी ने देश की जिन मुश्किल 144 लोकसभा सीटों की पहली लिस्ट तैयार की थी, उसमें बिहार की सिर्फ 4 सीटों को शामिल किया गया था- किशनगंज, वाल्मीकि नगर, वैशाली और नवादा। लेकिन, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू ने एनडीए से गठबंधन तोड़ लिया है और महागठबंधन में शामिल हो गए हैं, तो भाजपा को लगता है कि 6 और ऐसी सीटें बढ़ गई हैं, जहां चुनाव जीतने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी। यह सीटें हैं- पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, झंझारपुर, मुंगेर और गया।

नीतीश कुमार की जेडीयू ने बदला राजनीतिक समीकरण
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू ने बिहार की 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ा था और रामविलास पासवान की एलजेपी 6 सीटों पर लड़ी थी। इसमें सिर्फ नीतीश कुमार की पार्टी एक सीट हारी थी और बाकी 40 में से सभी 39 सीटों पर भाजपा गठबंधन का कब्जा हुआ था। लेकिन, जदयू के अलग होने से बिहार का राजनीतिक समीकरण बदल चुका है।

महाराष्ट्र में भाजपा के लिए 10 सीटें 'कठिन'
इसी तरह बीजेपी को लगता है कि यदि महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी या शिवसेना (उद्धव), कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ा तो भाजपा के लिए 10 सीटों पर जीत दर्ज कर पाना और मुश्किल हो सकता है। इसके लिए पार्टी उन 'कमजोर' सीटों पर और ज्यादा फोकस करेगी। इसके लिए पटना के बाद इसी महीने 28 दिसंबर को पार्टी बाकी बची 60 मुश्किल लोकसभा सीटों को लेकर हैदराबाद में विस्तारकों की एक बैठक करने जा रही है। इस बैठक के अलावा पार्टी ने इन लोकसभा सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए दूसरे चरण का अभियान भी शुरू करेगी। पहल चरण की तरह ही इस दौर में भी केंद्रीय मंत्री उन 'कठिन' लोकसभा क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करेंगे और वहां पार्टी कैसे चुनाव जीत सकती है, इसके लिए रणनीति तैयार करेंगे।












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