अमेरिका में नहीं हो पाया इलाज, तो बच्चों ने 1 करोड़ रुपए खर्च कर प्राइवेट जेट से मां को भेजा इंडिया

नई दिल्ली, 20 जुलाई: आमतौर पर भारत में अमीर लोग अच्छे इलाज के लिए अमेरिया या यूरोपीय देश जाना पसंद करते हैं। लेकिन अब इन देशों में महंगे इलाज के चलते लोग भारत जैसे देशों में आना पसंद कर रहे हैं। भारत पूरी दुनिया में मेडिकल टूरिज्म को हब बनकर उभरा है। बड़ी संख्‍या में लोग विदेश से भारत इलाज कराने आ रहे हैं। इसी बीच भारतीय इतिहास का सबसे लंबा एयरोमेडिकल इवैकुएशन हुआ है। जिसमें एक महिला को अमेरिका से चेन्नई इलाज के लिए प्राइवेट जेट से लाया गया है।

 महिला भारत पहुंचाने में दो सुपर-मिड साइज जेट का इस्तेमाल किया गया

महिला भारत पहुंचाने में दो सुपर-मिड साइज जेट का इस्तेमाल किया गया

क्रिटिकल हार्ट कंडीशन की स्थिति वाली 67 वर्षीय बेंगलुरु निवासी महिला को संयुक्त राज्य अमेरिका के पोर्टलैंड से 26 घंटे की एयर एम्बुलेंस के जरिए चेन्नई पहुंचाया गया। इस दौरान फ्लाइट को दो जगहों पर लैंड करना पड़ा। फ्लाइट पहले आइसलैंड और फिर तुर्की में लैंड हुई। मामले में महिला को भारत लाने में 1,33,000 डॉलर (एक करोड़ रुपये से कुछ ज्‍यादा) का खर्च आया। महिला भारत पहुंचाने में दो सुपर-मिड साइज जेट का इस्तेमाल किया गया।

अमेरिका में महंगा इलाज करना हो गया था मुश्किल

अमेरिका में महंगा इलाज करना हो गया था मुश्किल

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला की चेन्नई में हार्ट सर्जरी हुई थी। मरीज चेन्नई के इंदिरानगर की रहने वाली हैं। वह ओरेगॉन में पिछले कुछ सालों से बच्‍चों के साथ रह रही थीं। इस दौरान ही उन्‍हें दिल की बीमारी हो गई। इसके बाद उनका अमेरिका में ही इलाज कराया जाने लगा। एयर एंबुलेंस सर्विस फर्म आईसीएटीटी की सह-संस्‍थापक और डायरेक्‍टर डॉ शालिनी नलवाड़ ने बताया कि महिला के परिवार को महसूस हो रहा था कि अमेरिका में उपलब्‍ध हेल्‍थ सर्विसेज उनके लिए काफी नहीं हैं। जिसके बाद उनके बच्चों ने अपनी मां को भारत शिफ्ट करने की सोची।

ऐसे प्लान की गई थी अमेरिका से भारत तक की फ्लाइट

ऐसे प्लान की गई थी अमेरिका से भारत तक की फ्लाइट

कई घंटों की इस एयरलिफ्ट की शुरुआत रविवार सुबह ओरेगॉन के पोर्टलैंड से हुई। उन्‍हें लीगेसी गुड समैरिटन मेडिकल सेंटर से पोर्टलैंड इंटरनेशनल एयरपोर्ट शिफ्ट किया गया। यहां मरीज को सुपर मिडसाइज प्राइवेट जेट चैलेंजर 605 में रखा गया। इसे फ्लाइंग इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) की व्यवस्था की गई थी। इस जेट में पांच मेडिकल स्टाफ भी तैनात थी। इस फ्लाइंग आईसीयू में तीन डॉक्‍टर और दो पैरामेडिक की टीम थी। ये लगातार मरीज की निगरानी कर रहे थे। साढ़े सात घंटों की उड़ान के बाद जेट रेकजाविक एयरपोर्ट पर उतरा।

तुर्की में बदला गया मेडिकल स्टाफ

तुर्की में बदला गया मेडिकल स्टाफ

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयर एंबुलेंस को रेकजाविक ईंधन भरवाने के लिए लैंड कराया गया था। आइसलैंड की राजधानी रेकजाविक से चैलेंजर छह घंटों उड़ान के बाद तुर्की के इस्‍तानबुल पहुंचा। यहां मेडिकल और एविशन क्रू को रिप्‍लेस किया गया। इस रिप्लेस में बेंगलुरु के उन डॉक्‍टर को नहीं बदला गया जो मरीज की निगरानी के लिए अमेरिका गए थे। यही नहीं तुर्की में महिला को दूसरे प्राइवेट जेट में शिफ्ट किया गया। एक अन्‍य चैलेंजर 605 ने तुर्की से दियारबकिर एयरपोर्ट से उड़ान भरी।

देश में अब तक का सबसे लंबा एयरोमेडिकल इवैकुएशन

देश में अब तक का सबसे लंबा एयरोमेडिकल इवैकुएशन

चार घंटे की फ्लाइट के बाद विमान मंगलवार तड़के सुबह 2.10 चेन्‍नई पहुंचा। इमीग्रेशन से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद महिला को तुरंत अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। बेंगलुरु स्थित एयर एम्बुलेंस सेवा फर्म आईसीएटी के सह-संस्थापक और निदेशक डॉ शालिनी नलवाड़ ने कहा, "अमेरिका में ट्रीटमेंट पीरियड लंबा और खर्चीला था। भारत में महिला को लाने के मुकाबले इसमें ज्‍यादा खर्च आता। इससे अलावा महिला को मेडिकल इंश्योरेंस में भी दिक्कतें आ रही है। क्योंकि महिला भारतीय नागरिक थी। डॉ नलवाड़ ने दावा किया, "यह शायद देश में अब तक की सबसे लंबी एयरोमेडिकल पुनर्प्राप्ति थी, जिसमें मरीज को अमेरिका से भारत लाया गया था।

फोटो साभार: ICATT

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