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AN-32 का मलबा मिलने के बाद अब फ्लाइट लेफ्टिनेंट आशीष तंवर की मां को बेटे का इंतजार

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नई दिल्‍ली। तीन जून से लापता इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट एएन-32 का मलबा मंगलवार को मिल गया। इस एयरक्राफ्ट का मलबा अरुणाचल प्रदेश के उत्‍तर में स्थित लिपो में मिला है जो सियांग जिले में आता है। आईएएफ अब इस हादसे में बचे हुए लोगों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रही है। इस एयरक्राफ्ट को हरियाणा के पलवल के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट आशीष तंवर उड़ा रहे थे। आशीष की मां को यकीन है कि उनका बेटा जरूर वापस लौटेगा। घरवाले उनसे जुड़ी हर खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें-अरुणाचल प्रदेश में मिला IAF के एयरक्राफ्ट एएन-32 का मलबा

'मेरा बेटा जिंदा है'

'मेरा बेटा जिंदा है'

आशीष की मां ने न्‍यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, 'मुझे यकीन है कि मेरा बेटा जिंदा है।' जब से एयरक्राफ्ट के गायब होने की खबरें आई हैं, तब से ही उनकी मां बेसुध हैं। एयरफोर्स की ओर से कहा गया है कि हादसे में बचे हुए लोगों की स्थिति का पता लगाने के लिए कोशिशें लगातार जारी हैं। विमान का मलबा करीब 12,000 फीट की ऊंचाई पर मिला है। ऊंचाई पर होने के अलावा घने जंगल और खराब मौसम ने हालात लगातार बिगाड़ दिए हैं। वायुसेना की मानें तो मौसम और घने जंगलों ने सर्च ऑपरेशन में खासी दिक्‍कतें पैदा की हैं।

पुराने एयक्राफ्ट पर उठाए सवाल

पुराने एयक्राफ्ट पर उठाए सवाल

आशीष तंवर के परिवारवाले अब सवाल उठा रहे हैं कि इतने पुराने एयरक्राफ्ट को इस जगह के लिए क्‍यों रवाना किया गया। आशीष के चाचा उदयवीर सिंह ने सवाल किया, 'यह एयरक्राफ्ट अपग्रेडेड नहीं था और इससे सरकार की तरफ से होने वाली लापरवाही भी सामने आ जाती है। अगर आशीष को कुछ हुआ तो हम बिखर जाएंगे।' आशीष की पत्‍नी फ्लाइट लेंफ्टिनेंट संध्‍या तंवर उस दिन जोरहाट में बतौर एयर ट्र‍ैफिक कंट्रोलर अपनी ड्यूटी को पूरा कर रही थीं। उन्‍होंने अपनी आंखों के सामने पति के एयरक्राफ्ट को गायब होते देखा।

बचपन से था सेना में जाने का सपना

बचपन से था सेना में जाने का सपना

उदयवीर सिंह ने बताया कि तीन जून को दोपहर 12:35 मिनट पर जब एएन-32 एयरक्राफ्ट 13 वायुसैनिकों को लेकर लापता हुआ तो संध्‍या ड्यूटी पर थीं। चाचा उदयवीर को याद है कि आशीष जब छोटे थे तब से ही उन्‍हें फौज में जाने का जुनून था। उन्‍होंने पहले केंद्रीय विद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर कानपुर से बीटेक का कोर्स किया। इसके बाद कुछ दिनों तक एक एमएनसी में काम करने के बाद दिसंबर 2013 में एयरफोर्स ज्‍वॉइन कर ली। मई 2015 में वह पायलट के तौर पर सेना में कमीशंड हुए थे।

मां को गिफ्ट की थी नई कार

मां को गिफ्ट की थी नई कार

एक और फैमिली मेंबर ने बताया कि आशीष को अपनी मां से बहुत प्‍यार था। पिछले माह जब वह अपनी पत्‍नी के साथ छुट्टी पर घर आए थे तो उन्‍होंने अपनी मां को एक नई कार गिफ्ट की थी। ट्विन इंजन वाले इस एयरक्राफ्ट ने तीन जून करीब 12 बजकर 27 मिनट पर असम के जोरहाट से अरुणाचल प्रदेश के मेचुका के लिए टेक ऑफ किया था। आखिरी बार एक बजे एयरक्राफ्ट ने एटीसी से कॉन्‍टेक्‍ट किया और इसके बाद से ही इसका कुछ पता नहीं लग पा रहा था।आईएएफ के हेलीकॉप्‍टर एमआई-17 ने मलबा तलाशने में कामयाबी पाई।

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English summary
Indian Air Force's transport aircraft AN-32's pilot Ashish Tanwar's mother believes her son will return.
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