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LAGE RAHO KEJRIWAL: ऐसा हुआ तो दिल्ली में शीला दीक्षित से भी बुरी होगी अरविंद केजरीवाल की हार!

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बेंगलुरू। गत शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की प्रचार समिति के अध्यक्ष कीर्ति आजाद ने दिल्ली गैंगरेप पीड़िता निर्भया की मां आशा देवी को लेकर ऐसा ट्वीट कर दिया कि देखते ही देखते वह पोस्ट वायरल हो गया। दिल्ली कांग्रेस के नेता कीर्ति आजाद ने ट्विटर पर लिखा, 'ऐ मां तुझे सलाम...आशा देवी जी आपका स्वागत है। इससे सोशल मीडिया में यह बात फैल गई कि निर्भया गैंगरेप पीड़िता की मां को कांग्रेस दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतारने जा रही है और निर्भया की मां आशा देवी को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के खिलाफ उतारा जाएगा।

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हालांकि थोड़ी देर बाद ही यह स्पष्ट हो गया कि निर्भया की मां आशा देवी चुनाव नहीं लड़ेंगी। मीडिया को दिए जवाब में निर्भया की मां ने स्पष्ट किया कि उनकी चुनाव में बिल्कुल रूचि नहीं है और उनकी किसी भी कांग्रेस नेता से इस संबंध में कोई बात नहीं हुई है। निर्भया की मां के बयान के बाद यह बात यही खत्म नहीं हुई है।

केजरीवाल सरकार पर आरोप लग रहा है कि 2018 में जेल मैनुअल में बदलाव के चलते ही निर्भया के चारों दोषियों को फांसी को चढ़ाने में देरी हो रही है। अगर यह सच निकला तो बीजेपी दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित नए जेल मैनुअल का हवाला देकर निर्भया की मां आशा देवी को केजरीवाल के खिला चुनाव लड़ने के लिए मना सकती है।

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क्योंकि तफ्तीश के बाद यह बात स्पष्ट हो चुका है कि दिल्ली सरकार ने वर्ष 2018 में जेल मैनुअल में संशोधन किया था, जिसका फायदा उठाकर चारों दोषी लगातार अपनी फांसी को टालने में सफल हो रहे हैं। पिछले 7 वर्षों से निर्भया के दोषियों को फांसी पर चढ़ाए जाने का इंतजार कर रही निर्भया की मां आशा देवी के लिए दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित जेल मैनुअल नि-संदेह अन्याय कर रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आशा देवी केजरीवाल को जवाब देने के लिए उनके खिलाफ चुनाव में उतार दी जाएं।

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अगर ऐसा हुआ तो दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल को महंगा पड़ सकता है, क्योंकि निर्भया के दोषियों के खिलाफ लामंबद हुई ऐतिहासिक भीड़ ने ही वर्ष 2013 में पहली बार केजरीवाल को दिल्ली का विधायक बनने और राजनीतिक पार्टी बनाने का मौका दिया था। 2013 दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल ने पूर्व दिल्ली सीएम शीला दीक्षित को रिकॉर्ड 53000 से अधिक मतों से हराया था।

करीब 15 वर्षों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित की यह हार बहुत अपमानजक रही थी। बीजेपी निर्भया की मां आशा देवी को अगर केजरीवाल के खिलाफ नई दिल्ली विधानसभा सीट से उतारने में कामयाब हो गई तो केजरीवाल की शीला दीक्षित से बड़ी हार होनी तय मानी जा सकती है।

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ऐसा इसलिए संभव हो सकता है कि 16 दिसंबर, 2012 में जब निर्भया के साथ राजधानी दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप किया गया था तो दिल्ली ही नहीं, पूरा देश कांग्रेस के खिलाफ लामंबंद हो गया। कांग्रेस के खिलाफ उभरे राष्ट्रव्यापी मुहिम का ही असर था कि अन्ना आंदोलन से निकलकर अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक पार्टी बना ली थी और 2013 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में दिल्ली की जनता ने न केवल केजरीवाल को भारी मतों से जिताया बल्कि पहले ही चुनाव 28 सीटों पर जीत दर्ज करने मदद की थी।

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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल संभवतः इससे वाकिफ हैं कि अगर निर्भया की मां आशा देवी को बीजेपी उनके खिलाफ खड़ा करने में कामयाब हो गई तो उनके लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी, इसलिए उन्होंने आनन-फानन में निर्भया की मां को भरोसा दिलाया है कि दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सारे काम कुछ ही घंटे में पूरे कर लिए गए थे। आम आदमी पार्टी चाहती है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी दी जाए।

यह केजरीवाल का डर ही है, जो उन्हें बयान देने के लिए आगे आना पड़ा। लेकिन यह तय है कि अगर एक बार फिर निर्भया के दोषियों की फांसी की तारीख बढ़ी तो निर्भया को इंसाफ मिलने की बाट जोह रही एक मां केजरीवाल को जवाब देने के लिए चुनावी हथियार चुन सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो सहानुभूति वाले सारे वोट आशा देवी को मिल सकते हैं और केजरीवाल को लेने के देने पड़ सकते हैं।

माना जा रहा है दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित मैनुअल के हिसाब से निर्भया के चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए जारी नई तारीख 1 फरवरी पर आशंका के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि अभी निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के केवल एक दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका रद्द हुई है।

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लेकिन अभी तीन अन्य दोषी क्रमशः अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और विनय शर्मा के पास दया याचिका दायर करने का विकल्प बचा हुआ है। ऐसे में पटियाला हाउस कोर्ट से जारी 1 फरवरी को भी दोषियों को फांसी पर लटकाना असंभव हो जाएगा, जिसके लिए कोर्ट को फिर एक नई तारीख और एक नया डेथ वारेंट जारी करना पड़ सकता है।

उल्लेखनीय है दिल्ली सरकार के अधीन जेल का संशोधित जेल मैन्युअल का रूल 854 कहता है कि एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है, जब तक कि हरेक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए।

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यही नियम दिल्ली की जेलों में बंद सजायाफ्ता मुजरिमों पर लागू होता है। इसमें कहा गया है कि अगर एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो और उनमें सिर्फ एक दया याचिका दायर करता है तो उसकी याचिका पर फैसला आने तक सभी दोषियों की फांसी टाल दी जाएगी।

निर्भया के दोषियों की फांसी में हो रही देरी के लिए बीजेपी ने दिल्ली सरकार को आड़ो हाथ लिया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि जुलाई 2018 में दोषियों की फांसी के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद जेल विभाग सो क्यों रहा था।

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ईरानी से सवाल उठाए कि अगर दोषियों के प्रति सहानुभूति नहीं है तो दिल्ली सरकार ने निर्भया के साथ सबसे बर्बर तरीके से पेश आए किशोर अपराधी के रिहा होते समय उसे 10 हजार रुपए और सिलाई किट क्यों दी? उधर, दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा द्वारा भी अदालत में प्रक्रिया संबंधी कारणों का हवाला देते हुए फांसी को टालने का प्रयास किया गया।

कहा जा रहा है कि 2018 में दिल्ली सरकार द्वारा जेल मैन्युअल में संशोधन के चलते ही निर्भया के चारों दोषी संशोधित नियम की आड़ में लगातार फांसी की तारीख टालने में सफल हो रहे हैं, जिससे निर्भया की मां को इंसाफ मिलने में देरी हो रही है। निर्भया की मां ने चारों दोषियों को जल्द फांसी पर चढ़ाने के लिए दिल्ली की पटियाला हाऊस कोर्ट से जल्द डेथ वारेंट ने जारी करने की अपील की थी।

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तब सुप्रीम कोर्ट में दोषियों की पुनर्विचार याचिका लंबित थी और कोर्ट ने सुनवाई 17 दिसंबर तक के लिए टाल दी थी और पुनर्विचार याचिका 18 दिसंबर को सुनवाई के बाद दिल्ली पटियाला हाऊस कोर्ट ने चारों को फांसी पर लटकाने के लिए 22 जनवरी की तिथि मुकर्रर की थी, लेकिन शातिर दोषी मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति दया याचिका भेजकर फांसी को टलवा दिया।

पूरी आशंका है कि दिल्ली पटियाला हाऊस द्वारा दी फांसी की नई तारीख 1 फरवरी को चारों दोषियों को फांसी पर नहीं लटकाया जा सकेगा, क्योंकि भले ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रिकॉर्ड 4 दिन में मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज कर दी है, लेकिन बाकी तीन दोषियों के पास अभी दया याचिका दायर करने का विकल्प बचा हुआ है।

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खबर है दोषी पवन गुप्ता ने मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज होने के बाद अब राष्ट्रपति के पास दया याचिका भिजवाई है, जिसको खारिज होने में कम से कम 7 दिन का वक्त लगेगा और अगर खारिज होने में 4 दिन का ही वक्त लगा तो पूरी आशंका है कि तीनों आरोपी 1 फरवरी को मुकर्रर फांसी को टालने के लिए ऐसा करने से नहीं चूकेंगे।

शायद यही कारण है कि चारों दोषी बारी-बारी से दया याचिका समेत सभी विकल्पों का इस्तेमाल कर रह रहे हैं। इसके लिए पूरी तरह से दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित नया जेल मैनुअल है। यही वजह है कि दिल्ली हाई कोर्ट के जजों ने खीझकर दिल्ली सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई।

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जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संगीता धींगड़ा सहगल की पीठ ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा, 'अगर आप तब तक एक्शन नहीं ले सकते जब तक कि सभी दोषियों ने दया याचिका दायर नहीं कर दी हो तो आपका कानून खराब है। ऐसा लगता है कि (नियम बनाते वक्त) दिमाग का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया गया। हर दया याचिका अलग-अलग आधार पर दायर की जाती है। आप आखिरी न्यायिक फैसले का इस तरह मजाक नहीं बना सकते।'

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कोर्ट ने दिल्ली सरकार के साथ-साथ जेल अथॉरिटीज को भी फटकार लगाई। जजों ने इस बात पर दुख जताया कि ऐसा सिस्टम बनाया गया जो 'कैंसर से जूझ रहा है' और जो 'रणनीति के तहत' फांसी टालने के लिए दोषियों को 'कानून के दुरुपयोग करने' का मौका देता है। दरअसल, संशोधित जेल मैनुअल के मुताबिक एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है जब तक प्रत्येक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए।

यह भी पढ़ें- केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ने पर निर्भया की मां ने कही ये बात

क्या कहता है दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित नया जेल मैन्युअल

क्या कहता है दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित नया जेल मैन्युअल

जेल मैन्युअल का रूल 854 कहता है कि एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है, जब तक कि हरेक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए। यही नियम दिल्ली की जेलों में बंद सजायाफ्ता मुजरिमों पर लागू होता है। इसमें कहा गया है कि अगर एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो और उनमें सिर्फ एक दया याचिका दायर करता है तो उसकी याचिका पर फैसला आने तक सभी दोषियों की फांसी टाल दी जाएगी।

निर्भया के तीन दोषी अभी भेज सकते हैं दया याचिका

निर्भया के तीन दोषी अभी भेज सकते हैं दया याचिका

निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के एक दोषी मुकेश सिंह (32) की दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को खारिज कर दी। हालांकि, अक्षय ठाकुर (31), पवन गुप्ता (25) और विनय शर्मा (26) के पास दया याचिका दायर करने का विकल्प बचा हुआ है। मुकेश सिंह याचिका खारिज होने के बाद पवन गुप्ता ने दायर कर दी दया याचिका। ऐसे में पटियाला हाउस कोर्ट से जारी 1 फरवरी का नया डेथ वॉरंट भी आशंका के बादल मंडरा रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा था 22 जनवरी को फांसी नहीं होगी

दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा था 22 जनवरी को फांसी नहीं होगी

आप सरकार ने बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट से कहा था कि पटियाला हाउस कोर्ट से जारी पहले डेथ वॉरंट के मुताबिक 22 जनवरी को दोषियों को फांसी पर नहीं लटकया जा सकता है क्योंकि दिल्ली प्रिजन मैन्युअल कहता है कि दया याचिका खारिज होने के 14 दिन बाद ही फांसी दी जा सकती है। लगातार तारीख पर तारीख मिलने से निराश निर्भया के माता-पिता ने तब कहा था इस देश में महिलाओं के लिए न्याय पाना बेहद कठिन जान पड़ता है।'

निर्भया की मां का आप सरकार पर लेटलतीफी का आरोप

निर्भया की मां का आप सरकार पर लेटलतीफी का आरोप

निर्भया की मां ने भी दिल्ली सरकार पर लेटलतीफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा 'जब 2012 में घटना हुई तो इन्हीं लोगों ने हाथ में तिरंगा लिया, काली पट्टी बांधी और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खूब रैलियां की और खूब नारे लगाए, लेकिन आज यही लोग उस बच्ची की मौत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि आपने रोक दिया, कोई कह रहा है कि हमें पुलिस दे दीजिए, मैं दो दिन में दिखाऊंगा। मैं अब जरूर कहना चाहूंगी कि ये अपने फायदा के लिए उनकी फांसी को रोके हैं और हमें इस बीच में मोहरा बनाया।'

बीजेपी का दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर किया हमला

बीजेपी का दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर किया हमला

बीजेपी ने भी दोषियों को फांसी देने में देरी के लिए आप सरकार की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इस मामले में मौत की सजा के खिलाफ दोषियों की याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2017 में खारिज किए जाने के ढाई साल बाद भी दिल्ली सरकार ने उन लोगों को नोटिस नहीं भेजा। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक हफ्ते के अंदर सभी दोषियों को अगर आप सरकार ने नोटिस दे दिया होता तो अब तक उन्हें फांसी हो चुकी होती और देश को इंसाफ मिल चुका होता।

स्मृति ईरानी का आरोप, केजरीवाल मामले को दबाए बैठे रहे

स्मृति ईरानी का आरोप, केजरीवाल मामले को दबाए बैठे रहे

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि जहां सारा देश निर्भया को जल्दी न्याय दिलाने के पक्ष में लामबंद हुआ है, वहीं पिछले पांच साल में केजरीवाल सरकार की तरफ से कई बार न्यायालय में इस मामले पर टालमटोल की गई। उन्होंने कहा कि जेल विभाग दिल्ली सरकार के तहत आता है और सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 में निर्भया के आरोपियों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी, मगर उसके बाद लंबे समय तक जेल प्रशासन और फिर केजरीवाल सरकार खुद भी मामले को दबाए बैठी रही। स्मृति ने यह सवाल भी उठाया कि क्या कारण है कि जिस नाबालिग पर सबसे अधिक बर्बरता करने का आरोप लगा था, उसकी रिहाई पर आम आदमी पार्टी की सरकार ने उसे 10 हजार रुपए दिए और सिलाई मशीन दी।

दिल्ली सरकार के जेल मैनुअल में बदलाव से हो रही है फांसी में देरी

दिल्ली सरकार के जेल मैनुअल में बदलाव से हो रही है फांसी में देरी

दिल्ली सरकार के अधीन तिहाड़ जेल का संशोधित जेल मैन्युअल का रूल 854 कहता है कि एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है, जब तक कि हरेक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए। यही नियम दिल्ली की जेलों में बंद सजायाफ्ता मुजरिमों पर लागू होता है। इसमें कहा गया है कि अगर एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो और उनमें सिर्फ एक दया याचिका दायर करता है तो उसकी याचिका पर फैसला आने तक सभी दोषियों की फांसी टाल दी जाएगी।

1 फरवरी को चारों दोषियों का फांसी पर लटकाया जाना मुश्किल

1 फरवरी को चारों दोषियों का फांसी पर लटकाया जाना मुश्किल

पूरी आशंका है कि दिल्ली पटियाला हाऊस द्वारा दी फांसी की नई तारीख 1 फरवरी को चारों दोषियों को फांसी पर नहीं लटकाया जा सकेगा, क्योंकि भले ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रिकॉर्ड 4 दिन में मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज कर दी है, लेकिन बाकी तीन दोषियों के पास अभी दया याचिका दायर करने का विकल्प बचा हुआ है। खबर है दोषी पवन गुप्ता ने मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज होने के बाद अब राष्ट्रपति के पास दया याचिका भिजवाई है, जिसको खारिज होने में कम से कम 7 दिन का वक्त लगेगा और अगर खारिज होने में 4 दिन का ही वक्त लगा तो पूरी आशंका है कि तीनों आरोपी 1 फरवरी को मुकर्रर फांसी को टालने के लिए ऐसा करने से नहीं चूकेंगे। शायद यही कारण है कि चारों दोषी बारी-बारी से दया याचिका समेत सभी विकल्पों का इस्तेमाल कर रह रहे हैं।

English summary
Delhi CM Arvind Kejriwal is being accused that due to the change in the jail manual of the Delhi government in the year 2018, there is a delay in hanging the four convicts of Nirbhaya. If this is true then BJP can convince Nirbhaya's mother Asha Devi to contest against Kejriwal by citing new jail manual revised by Delhi government.
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