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MP में भाजपा जीती तो क्या इस बार आदिवासी बनेगा मुख्यमंत्री? केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का आया जवाब

मध्य प्रदेश में अगर इस बार भी बीजेपी सत्ता में आई तो क्या राज्य को पहला आदिवासी मुख्यमंत्री मिलेगा? इस सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि भाजपा में ऐसे फैसले पार्टी की विधायक दल करती है।

मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में 230 में से 47 सीटें अनुसूचित जनजातियों (ST) और 35 सीटें अनुसूचित जातियों (SC) के लिए आरक्षित हैं। राज्य में अभी तक एक भी आदिवासी को सीएम बनने का मौका नहीं मिला है।

mp-bjp

'बीजेपी ऐसे मामलों पर कभी भी जाति के आधार पर फैसला नहीं करती'
झारखंड के पूर्व सीएम और जनजातीय मामलों के मौजूदा केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है, 'चुनावों के बाद विधानसभा के चुने हुए सदस्य अपने नेता का चुनाव करते हैं। प्रत्येक राज्य का विधायक दल यह फैसला लेता है कि किसे मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। बीजेपी ऐसे मामलों पर कभी भी जाति के आधार पर फैसला नहीं करती है, बल्कि यह सुनिश्चित करती है कि ऐसे सारे मुद्दों पर बैठक में चर्चा की जाए।'

एमपी में आदिवासी वोटरों के मतदान का ट्रेंड
सीएसडीएस के आंकड़ों के मुताबिक 2018 के विधानसभा चुनावों में मध्य प्रदेश में 30% आदिवासी वोटरों ने भाजपा के पक्ष में और 40% ने कांग्रेस के पक्ष में वोट डाले थे। लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनावों में आदिवासी वोट के मामले में भाजपा ने कांग्रेस पर निर्णायक बनाई थी और ज्यादातर आदिवासी वोट उसी के खाते में गए थे। यानी यह आंकड़ा क्रमश: 54% और 38% का रहा था।

अटल सरकार में बना अलग से जनजातीय मंत्रालय- मुंडा
वहीं बीजेपी सरकारों की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए मुंडा ने कहा कि जब केंद्र में दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, तब उनके नेतृत्व में आदिवासियों के लिए अलग से मंत्रालय बनाया गया था।

बीजेपी सरकार में आदिवासियों के लिए हुए काम गिनाए
उन्होंने कहा कि बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार ने ही पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार)(PESA)ऐक्ट लागू किया, आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में 15 नवंबर को आदिवासी जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया, मध्य प्रदेश में आदिवासी समुदाय को शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए 63 एकलव्य स्कूल और 1,083 आश्रम स्कूल स्थापित किए।

कांग्रेस का घोषणापत्र 'झूठ का पुलिंदा' -केंद्रीय मंत्री
उन्होंने आदिवासियों के कल्याण के लिए कांग्रेस के घोषणापत्र में किए गए दावों को 'झूठ का पुलिंदा' बताते हुए दावा किया कि जिस चीज को लागू करने के कांग्रेस दावे कर रही है, पेसा ऐक्ट समेत वे सब बीजेपी सरकार पहले ही शुरू कर चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया, 'कांग्रेस ने लंबे समय तक शासन किया और सत्ता में बने रहने के सारे हथकंडे अपनाए, लेकिन उनके (आदिवासियों के) जीवन में बदलाव लाने के लिए कुछ भी करने में नाकाम रही।'

उन्होंने कहा कि 'उसके शासन में दूर-दराज आदिवासी इलाके पिछड़े बने रहे और अधिकतर आदिवासी लोग अपने मूल स्थान छोड़ कर बाहर निकल गए या विकास के अभाव में विस्थापित हो गए....' (इनपुट-पीटीआई)

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