• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

#ICUdiary : कोरोना ICU वॉर्ड में ड्यूटी करने वाली डॉक्टर की आपबीती

By BBC News हिन्दी
Google Oneindia News
आईसीयू डायरी
BBC
आईसीयू डायरी

कोरोना से जंग में लाखों लोगों ने अपनी जान गँवाई है. कोरोना से सीधी जंग में मरीज़ों के बाद कोई रहा है तो वो हैं डॉक्टर्स.

दूसरों की मौत से जंग लड़ने का काम डॉक्टरों के लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा?

किस तरह के अनुभव रहे और कैसे अंजान लोगों की ज़िंदगी या मौत एक डॉक्टर को प्रभावित करती है?

ये समझने के लिए बीबीसी आपके लिए पेश करता है नई सिरीज़- ICU DIARY

#ICUdiary में आप एक से पांच जून तक पढ़ेंगे- कोविड आईसीयू वॉर्ड में ड्यूटी करने वाली डॉ दीपशिखा घोष के लिखे अनुभव.

इन अनुभवों में आपको बेटा भी मिलेगा, बेटी भी. पिता भी और पति पत्नी भी. अंजान चेहरे वाले मरीज़ भी और मास्क लगाए डॉक्टरों का दुख भी.

आईसीयू डायरी
BBC
आईसीयू डायरी

ये बच तो जाएंगे न? #ICUdiaryICU में मैं सिर्फ़ ऐसे मरीज़ों को देखती हूँ, जिनकी हालत बद से बदतर हो. मैंने काफ़ी नए चेहरे देखे. ज़्यादातर चेहरे उम्मीदों को खो चुके थे. मैंने लड़खड़ाती आवाज़ में कितने ही वो सवाल सुने, जो पूछने वाले भी पूछना नहीं चाहते थे. फिर भी उम्मीद लिए पूछते- ये बच तो जाएंगे न?बर्बादी के कितने ही मंज़र इन आंखों को नसीब हुए. ये मंज़र पूरी दुनिया में देखे जा रहे हैं. किसी मुल्क़ में कम तो किसी मुल्क़ में ज़्यादा. ये सारे चेहरे और आवाज़ें सिर्फ़ एक नंबर नहीं हैं. इन सबकी भी ज़िंदगी और सपने उतने ही सच हैं, जैसे हम सबके हैं.कोरोना ने इस वक़्त की गुल्लक को तोड़ने को काम किया है, जिसके चलते सब बिखर गया है. सपनों को पूरा करने की उम्मीदें और ये ख्वाहिश कि दुनिया को अलविदा कहने से पहले हम कुछ ऐसा कर जाएं, जिसे देखकर कोई हमें याद कर सके.कुछ कहानियां अब कभी नहीं कही जा सकेंगी. क्योंकि कुछ कहानियां गैर-मामूली सी बातों को समेटे हुए थीं और कुछ रोज़मर्रा के कामों से भरी.

ICUdiary The story of the doctor doing duty in the Corona ICU ward

कुछ कहानियां एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद होने के दरमियां खो जाएंगी. कुछ शायद इसलिए खो जाएंगी कि कोई नहीं बचा था जिससे बात की जा सके. कोरोना ने हम डॉक्टरों को मरीज़ों का इलाज करने में लगाकर हमारा वक़्त बाँट दिया है. इसके बावजूद कई बार थोड़ा सा वक़्त या थक चुका दिमाग ये मोहलत देता है कि हम बात कर सकें.ऐसे मौक़ों पर हमेशा दो तरह की बातें होती हैं. पहली बातचीत, जिसमें हम मरीज़ों से मास्क ढंग से लगाने, दवाएं लेने के लिए कह रहे होते हैं. या फिर लोगों से परिवार, काम या ज़िंदगी के बारे में बात करके समझा रहे होते हैं कि ये ज़िंदगी कितनी ख़ूबसूरत है और मरीज़ को इस बिन बुलाए वायरस से जंग जीतकर जल्द अस्पताल को टाटा कहकर घर लौटना है.दूसरी बातचीत, जिसमें हमसे कुछ कठोर सवाल पूछे जा रहे होते हैं. ये सवाल मरीज़ सीधा आपकी आंख में देखते हुए पूछता है, मैं बच तो जाऊंगा ना डॉक्टर?ऐसे सवालों पर हम सही चीजें बताने की कोशिश करते हैं. लेकिन कई बार चीज़ें सही होती ही नहीं हैं. आंखों में देखते हुए ये बताना कि ये आंखें जल्द बंद हो जाएंगी, हमारे काम का सबसे कठोर हिस्सा हो चला है.

आईसीयू डायरी
BBC
आईसीयू डायरी

#ICUdiary 1: तुमी तो आमार मां...

हम लगातार एक जंग लड़ रहे हैं. जंग न सिर्फ़ कई रूप वाले वायरस से है बल्कि कई दूसरी मुश्किलों से भी है.

हमारे अस्पताल में एक महिला भर्ती हुई, जो ख़ुद एक डॉक्टर हैं. उनका ऑक्सीजन लेवल काफ़ी कम था. फिर भी वो ज़्यादा इलाज या वेंटिलेटर पर जाने से इंकार करती हैं.

ऑक्सीजन पर होने के बावजूद वो एक पूरा वाक्य बोलने में लड़खड़ा जातीं. वो एक सांस में कुछ ही शब्द बोल पातीं. बीते कुछ हफ़्तों में मैंने उनके मिजाज़ को तेज़ी से बदलते देखा है. शुरू में मुझसे और नर्सों के लिए जो बेरुखी थी, वो अब प्यार में बदल गई थी.

अब वो मेरा हाथ पकड़कर अक्सर नींद आने वाली दवा मांगतीं.

वो बंगाली में कहतीं- तुमी तो आमार मां...

यानी तुम ही तो मेरी मां हो.

ये बातें उन नौजवानों के मन में जाकर ठहर रही थीं, जो बेहद कम उम्र के हैं और अचानक मौत से लड़ते लोगों का ख़याल रखने के रोल में आ गए हैं.

उनके पति भी कोरोना मरीज़ हैं और बेहतर तबीयत होने की वजह से इसी अस्पताल के दूसरे वार्ड में भर्ती हैं. अक्सर वो अपनी पत्नी से कहते- कम से कम प्रोन वेंटिलेशन तो कर लो.

प्रोन वेंटिलेशन में मरीज़ को पेट के बल लेटने को कहा जाता है, इससे सांस लेने की दिक्कत दूर होने की संभावना रहती है.

लेकिन उनका वज़न ज़्यादा है, इसलिए प्रोन वेंटिलेशन तकलीफों से भरा हो सकता है. वो ये जानती हैं कि उनके पति भी ये बात समझते हैं.

फिर भी वो अपना हाथ उठाती हैं और पति को इशारे से समझाती हैं कि वो पूरी कोशिश कर रही हैं. उनके पति हमसे गुज़ारिश करते हैं कि चाहे जैसे भी हो, हम उनकी पत्नी से इलाज करवाने के लिए कहें.

मैं दिलासा देती हूं कि हर संभव कोशिश करूंगी.

हाथ जोड़े और आंखों में खूब सारी उदासी लिए वो शख्स अपने बेड तक चले जाते हैं. एक ऐसी उम्मीद लिए जो पूरी होनी मुश्किल है.

कुछ रोज़ बाद वो शख्स अस्पताल से घर चला जाता है. लेकिन अकेला...

'तुमी तो आमार मां....' ये बात बिना किसी लड़खड़ाहट के कानों में गूंजती रहती है.

(सिरीज़ प्रोड्यूसर: विकास त्रिवेदी/इलस्ट्रेशन: पुनीत बरनाला)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
ICUdiary The story of the doctor doing duty in the Corona ICU ward
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X