ICMR-भारत में भी चमगादड़ों में मिला Coronavirus,1000 साल में भी इंसान में संक्रमण की उम्मीद नहीं
नई दिल्ली- चीन दावा करता रहा है कि उसके यहां कोरोना वायरस चमगादड़ों से पहले पैंगोलिन में पहुंचा और फिर वह उससे इंसानों तक हस्तांतरित हुआ। लेकिन, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने जो शोध किया है, उससे चीन के दावों की पोल खुलती दिख रही है। क्योंकि, भारतीय वैज्ञानिकों को दो तरह के चमगादड़ों में कोरोना वायरस तो मिला है, लेकिन वह चमगादड़ों से इंसानों में संक्रमित होकर पहुंच जाएगा इसकी संभावना 1,000 साल में भी मुश्किल से ही एक बार भी नजर आती है। जाहिर है कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च जैसे प्रतिष्ठित शोध संस्थान के रिसर्च के ये नतीजे उन दावों को और ज्यादा हवा दे सकते हैं, जिसमें चीन पर कोविड-19 को प्रयोगशाला में विकसित करने और एक रणनीति के तहत दुनिया भर में फैलाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

चीन ने चमगादड़ों से कोविड-19 फैलने का दावा किया है
चीन में पिछले साल दिसंबर के पहले हफ्ते में जब से कोरोना वायरस का पता चला है वह लगातार दावा करता रहा है कि उसके यहां ये वायरस वुहान के वेट मार्केट से आया है। चीन के दावे के पीछे ये भी तर्क रहा है कि उसके यहां के शुरुआती ज्यादातर मरीज उसी मार्केट या आसपास में काम करने वाले लोग थे। चीन ने अब तक दुनिया को यही समझाया है कि यह वायरस या तो चमगादड़ों के अंदर ही बदलाव करके (म्युटेशन) इंसानों में प्रवेश कर गया है। या फिर वह चमगादड़ों से पहले पैंगोलिन में पहुंचा और वहां से वुहान के जीव-जंतुओं के बाजार के जरिए इंसानों के शरीर में दाखिल हो गया। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. रमन गंगाखेडकर ने भी कहा है, 'चीन ने जो कहा है उसके मुताबिक उसने यह पाया है कि कोरोना वायरस चमगादड़ों में म्युटेशन की वजह से पैदा हुआ होगा। चमगादड़ों ने उसे पैंगोलिंस तक हस्तांतरित किया होगा और पैंगोलिन से यह इंसानों तक पहुंच गया।' लेकिन, इसके बाद डॉक्टर गंगाखेडकर ने जो खुलासा किया है, उससे दुनिया भर के वैज्ञानिकों का माथा ठनक सकता है।
एक हजार साल में भी शायद ही चमगादड़ों से फैलेगा वायरस-आईसीएमआर
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर के डायरेक्टर डॉक्टर रमन ने कहा है कि, 'हमने भी पड़ताल की है, जिसमें दो प्रकार के चमगादड़ों में कोरोना वायरस के बारे में पता चला है, लेकिन वो चमगादड़ों का कोरोना वायरस था, वो इंसानों में आने के काबिल नहीं था। चमगादड़ों से इंसान में आने की घटना समझाने के लिए बोलता हूं कि शायद 1,000 साल में एक-आध बार ही होती होगी। जब कोई वायरस स्पेसीज चेंज करता है तो वह बहुत ही रेयर इवेंट होता है और उस तरह से वह इंसानों में आता है। '

चार राज्यों में मिले कोरोना वायरस वाले चमगादड़
जानकारी के मुताबिक भारतीय शोधकर्ताओं को केरल, हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी और तमिलनाडु में ऐसे 25 चमगादड़ मिले हैं जिनमें चमगादड़ों वाले कोरोना वायरस मौजूद थे। ये चमगादड़ Rousettus और pteropus प्रजाति के बताए गए हैं। आईसीएमआर के मुताबिक पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के लैब में पिछले तीन साल से चमगादड़ों पर शोध चल रहा था। लेकिन, मौजूदा परिस्थितियों में वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस को लेकर भी चमगादड़ों के नमूनों की जांच शुरू की। शोध के दौरान उसके गले और मलाशय के सैंपल की जांच में ये चमगादड़ संक्रमित पाए गए हैं।












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