मां से सुनकर की पढ़ाई, बिना आंखों की रोशनी के UPSC की परीक्षा पास कर बना IAS
नई दिल्ली। हर किसी की जिंदगी में कभी ना कभी एक मोड़ ऐसा आता है जो उसकी जिंदगी बदल देता है। ऐसी ही कहानी अंकुरजीत सिंह की भी है। अगर हमारे हमें जरा सी खरोंच भी आ जाती है तो हम परेशान हो जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो बहुत सी मुश्किलों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य की तरह कदम बढ़ाते हैं और उसे हासिल करते हैं। अंकुरजीत सिंह देख नहीं सकते हैं, वे जब स्कूल में थे तब उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगी थी।

अंकुरजीत की आंखों की रोशनी चली गई थी
आखिरकार एक वक्त ऐसा आया जब उनको दिखना बंद हो गया। लेकिन अंकुरजीत ने हिम्मत नहीं हारी और परिस्थितियों से लड़ते रहे। अंकुरजीत ने इसी जज्बे के साथ सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर ली। अंकुर ने साल 2017 में यूपीएसएसी की परीक्षा में 414वां रैंक हासिल किया। हरियाणा के यमुनानगर के रहने वाले अंकुरजीत बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छे थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आंखों की रोशनी कम होने लगी और पढ़ाई में दिक्कतें आने लगी।

अंकुरजीत ने हिम्मत नहीं हारी, मां की मदद से की पढ़ाई
अंकुरजीत को ब्लैकबोर्ड तक को देखने में परेशानी होती थी। इस दौरान एक दिन उनकी आंखों से दिखना बिल्कुल बंद हो गया। अंकुरजीत की मां बताती हैं कि जब उन्हें अपने बेटे की इस समस्या के बारे में पता लगा, जो कुछ वह स्कूल से पढ़कर आता, वे रात को उसे पढ़कर सुनाने लगीं। इसके बाद अब अंकुरजीत सुनकर पढ़ाई करने लगा। अंकुरजीत ने दसवीं तक पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में की। गर्मी की छुट्टियों में अंकुरजीत मां की मदद से सारी किताबें पहले ही पढ़ लेते ताकि जब क्लास में टीचर पढ़ाएं तो सब समझ में आ जाए।

यूपीएससी परीक्षा में हासिल किया 414वां रैंक
आगे चलकर अंकुर ने आईआईटी के लिए फॉर्म भरा और उनका एडमिशन आईआईटी रुढ़की में हो गया। बकौल अंकुर, आईआईटी में कई दोस्त यूपीएससी की तैयारी करते थे, वे भी इस तैयारी में जुट गए। इस मुश्किल परीक्षा की तैयारी में अंकुर को दोस्तों और टेक्नोलॉजी से मदद मिली। वह अब स्क्रीन रीडर की मदद से किताबें पढ़ने लगे थे। जब कहीं दिक्कत होती तो वे दोस्तों से हेल्प ले लेते। आखिरकार, अंकुरजीत की मेहनत रंग लाई और साल 2017 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। इस परीक्षा में अंकुर ने 414वां रैंक हासिल किया।
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