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कठुआ गैंगरेप: 'घर आकर दो बार चेक करती हूं मेन गेट का लॉक क्‍योंकि एक दिन वो मुझे मार डालेंगें'

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श्रीनगर। जम्‍मू-कश्‍मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ जिस तरह की हैवानियत हुई, उसने मानवता के साथ-साथ पूरे देश को हिलाकर रख दिया। दीपिका सिंह राजावत उस मासूम के गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए जूझ रही है। वो कठुआ की रेप पीड़िता असिफा का केस लड़ रही हैं। हालात ऐसे है कि दीपिका को परिवार को जान का खतरा सता रहा है। वह जब भी अपने घर आती हैं तो मेन गेट दो बार चेक करती है कि ठीक से बंद है या नहीं। चौबीस घंटे और सातों दिन इस तरह चौकन्ना रहना उनकी जिन्दगी का हिस्सा बन गया है। दीपिका जब से कठुआ में आठ वर्षीय बच्ची के गैंगरेप और फिर हत्या के मामले में वकील बनी हैं तब से उन्हें जान का खतरा है। विस्‍तार से जानिए सबकुछ

दीपिका को मिल चुकी है जान से मारने और बलात्‍कार किए जाने की धमकी

दीपिका को मिल चुकी है जान से मारने और बलात्‍कार किए जाने की धमकी

अंग्रेजी वेबसाइट NEWS18 के मुताबिक इस साल के शुरुआत में जब दीपिका ने अपनी जान को खतरे का अंदेशा जताया तो राज्य की पुलिस ने सुरक्षा दी। इसके पहले दीपिका को जान से मारने और बलात्कार करने की धमकी दी जा चुकी थी। कठुआ मामले में पीड़िता की ओर से अदालत में पक्ष रखने के बाद से ही उन पर दबाव डाला जाने लगा। दीपिका को लगता है, 'वह मुझे एक दिन मार डालेंगे।

इस केस ने मेरी जिंदगी बदल दी

इस केस ने मेरी जिंदगी बदल दी

38 वर्षीय वकील दीपिका सिंह राजावत ने कहा कि वह पीड़िता के लिए न्याय की लड़ाई में खुद को अकेला महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा लगता है कि मेरे परिवार को परेशान किया जा सकता है। इतना ही नहीं मुझे लगता है कि मेरी प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचाई जा सकती है। दीपिका ने कहा, 'इस केस ने उनकी जिन्दगी बदल कर रख दी है। जबसे मैं इस केस में वकील बनी हूं तब से मुझ पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। दीपिका ने कहा, 'मुझे जब घटना की भयावह जानकारियां मिलीं तो मैंने खुद ही इस मामले में पीड़िता के परिजनों का वकील बनने का फैसला किया। मैं जो कर रही हूं उसमें कुछ असाधारण नहीं है।

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पेशे से वकील दीपिका राजावत एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं

पेशे से वकील दीपिका राजावत एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं

पेशे से वकील दीपिका राजावत एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह 'वॉयस फॉर राइट्स' नाम का एक एनजीओ चलाती हैं, जिसकी वे चेयरपर्सन हैं। जो बच्चों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करता है। उनका एनजीओ लैंडमाइन्स के पीड़ितों के लिए भी काम करता है। दीपिका को 2014-15 में महिला अधिकारों पर काम करने के लिए चुना गया था। इस दौरान उन्होंने भारत की पूर्व अडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह के साथ काम किया था।

दीपिका के पति रह चुके हैं सेना में

दीपिका के पति रह चुके हैं सेना में

दीपिका के एक पांच साल की बेटी है। उनके पति सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। फिलहाल वह बहरीन में कार्यरत हैं। दीपिका सिंह को 2012 में जम्मू बार एसोसिएशन से निष्कासित किया जा चुका है। तब वह एक 12 साल की कामवाली के लापता होने का केस लड़ रही थी। उनका आरोप है कि कठुआ केस सिलसिले में जम्मू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएस सलाठिया उन्हें धमकी दे चुके हैं।

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English summary
Every time she steps back into her house, Deepika Singh Rajawat double-checks the main gate. She fears for the safety of her own daughter, her husband and herself.
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