• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

हैदराबाद डॉक्‍टर मर्डर: पीड़‍िता की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करने के खिलाफ याचिका, दिल्‍ली हाई कोर्ट कर सकता है कर्रवाई

|

हैदराबाद। पिछले कुछ दिनों से हैदराबाद खबरों में है। 26 साल की वेटनेरी डॉक्‍टर के पहले गैंगरेप और फिर निर्दयता के साथ उसकी हत्‍या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। वहीं अब मंगलवार को इस सिलसिले में एक याचिका दिल्‍ली हाई कोर्ट में दायर की गई है। इस याचिका में मीडिया हाउसेज पर नियमों के उल्‍लंघन का आरोप लगाया गया है।

यह भी पढ़ें-पड़ोसियों से हमेशा हंस कर मिलती थीं डॉक्‍टर

आईपीसी के नियमों का उल्‍लंघन

आईपीसी के नियमों का उल्‍लंघन

याचिका में कहा गया है कि मीडिया हाउसेज ने पीड़‍िता का नाम उजागर उसकी पहचान सार्वजनिक करने की कोशिश की है। उन्‍होंने एक ऐसी महिला के बारे में जानकारी को सार्वजनिक मंच पर लाने की कोशिश की जिसका बलात्‍कार के बाद हत्‍या कर दी गई। यह याचिका दिल्‍ली के ही एक वकील यशदीप चहल की तरफ से दायर की गई थी। उनका कहना था कि याचिका के जरिए उनका मकसद रेप पीड़‍िताओं की पहचान को जाहिर न होने देना है जो कि आईपीसी के कानूनों का उल्‍लघंन करता है और साथ ही सुप्रीम कोर्ट की तरफ से भी इस बात को स्‍पष्‍ट किया जा चुका है। चहल ने कहा कि पीड़‍िता की पहचान को सामने लाकर मीडिया हाउस आईपीसी के 228ए का उल्‍लंघन है।

ऑनलाइन पोर्टल्‍स लगातार तोड रहे नियम

ऑनलाइन पोर्टल्‍स लगातार तोड रहे नियम

इसके अलावा कई ऑनलाइन और ऑफलाइन पोर्टल्‍स पर पीड़‍िता के साथ ही साथ चारों आरोपियों की पहचान भी सार्वजनिक कर दी गई है। आईपीसी के सेक्‍शन 228ए के तहत साफ है कि रेप और कुछ और अपराधों में पीड़‍िता की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। अगर ऐसा हुआ तो फिर दो साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है। इस तरह का वाकया अप्रैल 2018 में सामने आए कठुआ गैंगरेप के समय भी हुआ था। उस समय दिल्‍ली हाई कोर्ट की तरफ से 12 मीडिया हाउसेज और 10 लाख रुपए तक जुर्माना हो किया गया था।

क्या कहती हैं सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस

क्या कहती हैं सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस में भी स्‍पष्‍ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी मीडिया हाउस या व्‍यक्ति को पीड़‍िता का नाम या फिर उससे जुड़ी कोई भी ऐसी जानकारी उजागर करे जिसके बड़े स्‍तर पर उसकी पहचान सामने आए, ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने का अधिकार नहीं है। यहां तक उनके रिश्‍तेदारों के बारे में भी कोई सूचना सामने नहीं आनी चाहिए। इन गाइडलाइंस में पुलिस को भी निर्देश दिए गए हैं कि पुलिस को भी अपनी एफआईआर में पहचान सामने लाने का कोई नैतिक हक नहीं है। ओरिजिनल रिपोर्ट को एक सीलबंद लिफाफे में जांच एजेंसी या फिर कोर्ट भेजना चाहिए।

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Hyderabad Doctor gangrape murder: Plea against media houses for revealing victim's identity.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more