• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

कोरोना से ठीक होने के बाद फंगल इंफेक्शन 'म्यूकोरमाइकोसिस' का खतरा बढ़ा, महाराष्ट्र में 8 की मौत, जानिए लक्षण

|

नई दिल्ली, 09 मई: देश में कोरोना वायरस का कहर जारी है। जैसे-जैसे नए केसों की संख्या बढ़ रही है, ठीक वैसे ही कोरोना और भी जानलेवा होता जा रहा है। कोविड-19 से ठीक होने वाले मरीजों में अब फंगल इंफेक्शन 'म्यूकोरमाइकोसिस' का खतरा बढ़ता जा रहा है। लोग अब ब्लैक फंगस का शिकार हो रहे हैं। गुजरात, दिल्ली और महाराष्ट्र में कई ऐसे केस सामने आए हैं, जिसमें कोरोना से ठीक हुए मरीज में म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षण पाए गए हैं। महाराष्ट्र में इसी ब्लैक इंफेक्शन म्यूकोरमाइकोसिस की वजह से कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई है। वहीं 200 लोग ऐसे हैं, जिनमें म्यूकोरमाइकोसिस पाया गया है। मेडिकल एजूकेशन और रिसर्च के प्रमुख डॉ. तात्याराव लहाणे ने कहा है कि म्यूकोरमाइकोसिस के केस बढ़ते ही जा रहे हैं।

mucormycosis black fungus

डॉ. लहाणे ने पीटीआई को बताया कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अब तक इलाज किए गए 200 मरीजों में से 8 की मौत म्यूकोरमाइकोसिस के कारण हुई है, जिन्हें एक ब्लैक फंगस के रूप में भी जाना जाता है। जिन मरीजों की मौत हुई है, वो कोविड-19 से तो बच गए लेकिन फंगल संक्रमण ने उनकी कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला किया जो घातक साबित हुआ है।

क्या होता है म्यूकोरमाइकोसिस और लक्षण ?

मेडिकल टर्म में म्यूकोरमाइकोसिस एक तरह का फंगल इंफेक्शन है। इसे आम तौर पर ब्लैक फंगस भी कहा जाता है। इसका असर फेफड़े, दिमाग और स्किन पर होता है। ब्लैक फंगस होने वाले लोगों की आंखों की रौशनी चली जाती है। ज्यादा बढ़ने पर इससे कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी भी गल जाती है। समय रहते अगर मरीज ठीक ना हो तो मौत भी हो सकती है।

नीती आयोग सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने कहा है कि म्यूकोरमाइकोसिस 'म्यूकॉर' नामक फंगल से होता है। जो शरीर में ज्यादातर गीली सतहों पर पाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि जब एक ही कोविड-19 मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाता है, जिसमें पानी के साथ ह्यूमिडिफायर होता है, तो उसके फंगल इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।

किन मरीजों को म्यूकोरमाइकोसिस होने का खतरा ज्यादा है?

वीके पॉल ने कहा है आम तौर पर म्यूकोरमाइकोसिस के मामले डायबिटिक यानी शुगर के मरीजों में मिलते रहते हैं। लेकिन अगर शुगर कंट्रोल में नहीं है और मरीज को कोविड हो जाए तो खतरा और भी अधिक बढ़ जाता है।

म्यूकोरमाइकोसिस आमतौर पर उन लोगों को ज्यादा होता है, जिनकी इम्यूनिटी बहुत कमजोर होती है या कम होती है। जो शुगर पेशंट में होता है। वहीं कोरोना से ठीक हुए मरीजों की इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर हो जाती है, इसलिए कोविड से रिकवर हुए मरीज म्यूकोरमाइकोसिस का शिकार हो रहे हैं।

अगर कोरोना के जिन मरीजों शुगर है और उनका शुगर लेवल बढ़ जाने पर उनमें म्यूकोरमाइकोसिस और भी जानलेवा रूप ले लेता है। वीके पॉल ने कहा है कि ऐसे केस में इलाज के लिए ज्यादातर स्टेरॉइड्स का उपयोग किया जाता है। लेकिन इसका इस्तेमाल नियंत्रित होना चाहिए।

ये भी पढ़ें- दिल्‍ली में कोरोना से हुई मौत के आधे आंकड़े ही हुए हैं दर्ज, अंतिम संस्‍कार की कुल संख्‍या से हुआ ये खुलासाये भी पढ़ें- दिल्‍ली में कोरोना से हुई मौत के आधे आंकड़े ही हुए हैं दर्ज, अंतिम संस्‍कार की कुल संख्‍या से हुआ ये खुलासा

डॉ. लहाणे ने कहा कि म्यूकोरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगल बीमारी पहले से ही जाना जाता है, लेकिन कोविड-19 संबंधित जटिलताओं के कारण मामले बढ़ रहे हैं, जिसमें हम इलाज के लिए स्टेरॉइड्स का उपयोग करते हैं तो मरीज के खून में शुगर लेवल बढ़ जाता है। वहीं कुछ दवाओं के परिणामस्वरूप मरीजों की इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हो जाती है। इस तरह की स्थिति में ब्लैक फंगल रोगी को आसानी से संक्रमित करता है और फैलता है। यदि फंगल संक्रमित व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाता है, तो यह घातक साबित हो सकता है। इस तरह के एक मामले में मरीजों की आंखों में से एक को स्थायी रूप से रौशनी चली जाती है।

English summary
How mucormycosis black fungus affect on covid 19 patients and symptoms
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X