ISIS के पैरोडी अकाउंट की ट्वीट और मीडिया ने पैदा की सनसनी
बेंगलुरु। सोमवार को जब सबकी नजरें ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में चल रहे घटनाक्रम पर लगी थीं तब उसी समय एक ऐसी खबर आई जिसने भारत में लोगों को दहलाकर रख दिया।

बेंगलुरु में सिडनी जैसे नजारे की धमकी!
ट्विटर पर ISIS_Med का हवाला देते हुए एक चैनल ने दावा किया कि अब भारत की सिलिकॉन वैली बेंगलुरु को भी सिडनी के घटनाक्रम की तर्ज पर दहलाने की पूरी तैयारी हो चुकी है। कहा गया कि आईएसआईएस के इस पैरोडी अकाउंट से यह ट्वीट बेंगलुरु में पिछले दिनों गिरफ्तार हुए मेहदी मसरूर बिस्वास जो आईएसआईएस का ट्विटर हैंडल @shammiwitness को ऑपरेट कर रहा था, उसके समर्थन में की गई थी।
बिना जांच के चला दी एक्सक्सूलिव खबर
बिना किसी जांच के एक्सक्लूसिव के नाम पर यह खबर चलने लगी। जिस ट्विटर हैंडल से यह ट्वीट किए गए वह दरअसल आईएसआईएस का पैरोडी अकाउंट था। लेकिन एक बार फिर से साफ हो गया कि मीडिया इस तरह के मुद्दों को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझने को तैयार नहीं है।
आईबी के अधिकारियों के मुताबिक बेंगलुरु में जब से मेहदी को गिरफ्तार किया गया है तब से ही अलर्ट बढ़ा दिया गया है। लोग किसी भी तरह से मेहदी से संपर्क नहीं कर सकते हैं।
साथ ही वह @shammiwitness इस हैंडल के जरिए तनाव पैदा करने की कोशिशें हो पाएंगी। वहीं इस बात की भी संभावना है कि मेहदी के समर्थक ऑन लाइन आकर एक तरह से युद्ध छेड़ने की भी तैयारी कर चुके हैं।
मीडिया का फायदा उठाते आतंकी
अगर इस बारे में किसी भी विशेषज्ञ से बात की जाए तो वह यह मानेंगे कि इस तरह की खबरें आतंकी संगठनों के प्रपोगेंडा का अहम हिस्सा हैं। यहां तक कि इस लड़ाई का 40 प्रतिशत हिस्सा प्रपोगेंडा पर ही आधारित होता है।
वह इस तरह के किसी भी घटनाक्रम को तूल देने की पूरी कोशिश करते हैं। अगर 3 लोग मारे जाते हैं तो वह इसकी संख्या बढ़ा-चढ़ाकर 30 बताएंगे। यह संगठन इस हद तक आगे बढ़ चुके हैं कि सिर कलम करने के वीडियोज को भी वह लोगों पर एक असर डालने के मकसद से ही पोस्ट करते हैं।
ऐसे में अगर मीडिया की ओर से उन्हें पब्लिसिटी मिल जाए तो उनका काम और आसान हो जाता है। सिडनी जैसे तनावपूर्ण हालातों के दौरान मीडिया हर बचकानी जानकारी को भी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने लगता है।
यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि किसी भी ट्विटर हैंडल को 5,000 से 10,000 तक लोग फॉलो करते हैं। ऐसे में जब उनकी ट्वीट को टीवी पर मेंशन कर दिया जाता है तो यह लाखों लोगों के बीच पहुंच जाती है।
26/11 से भी नहीं ली कोई सीख
मीडिया की आदत है कि वह आतंकियों को काफी अलग तरह से ही दिखाने लगता है। चीफ ऑफ साउथ या फिर साउथ इंडियन कमांडेंट, लीडर ऑफ स्लीपर सेल, मॉड्यूल बॉस इस तरह के विशलेषण इन आतंकियों के लिए प्रयोग किए जाने लगते हैं।
26/11 मुंबई आतंकी हमलों के दौरान जो नजारा पूरी दुनिया ने देखा था, सोमवार को सिडनी में हुए आतंकी हमले के दौरान कुछ वैसा ही नजारा देखने को मिला है। बिना किसी सूत्र के हवाले जो थोड़ी-बहुत जानकारी आ रही है, उसे मीडिया टेलीकास्ट कर दे रहा है।
पूरी दुनिया जानती है कि 26/11 के दौरान मीडिया ने जो रोल अदा किया था, उसका हमलों पर क्या असर देखने को मिला था। जानकारी के अभाव में ताज होटल के बारे में सबकुछ टेलीकास्ट किया जाता रहा जिसका नतीजा था कि होटल के अंदर कुछ बंधकों को मार डाला गया।












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